बक्सर
. शहर के पौराणिक रामरेखाघाट पर मुंडन संस्कार के लिए श्रद्धालुओं का रेला लग गया. इसके लिए श्रद्धालु सुबह से ही गंगा घाट पर पहुंचने लगे तथा उनके आने-जाने का सिलसिला दोपहर बाद तक जारी रहा. हालांकि सकून की बात यह थी कि ट्रैफिक पुलिस की सतर्कता के कारण इस बार नगर में जाम की स्थिति नहीं बनी.महिलाओं के मंगल गीत से गुलजार हुए घाट
जिससे लोगों को आवामन में परेशानी नहीं हुई. परंतु दूर-दराज से आने वाले वाहनों को शहर से बाहर ही रोके जाने के कारण उनकी मुश्किलें बढ़ गई थीं और महिलाओं को पैदल हांफते हुए रामरेखाघाट पर पहुंचना पड़ रहा था. गंगा तट पर पहुंचने के साथ ही परिजन मंगल गीतों के बीच बच्चों का मुंडन कराए. मुंडन के बाद बच्चों को स्नान कराया गया और आचार्यों द्वारा विधि-विधान से गंगा पूजन कराया गया. इसके बाद सगे-संबंधियों के साथ परिजन नाव से गंगा के उस पार भरौली गए और वहां भी गंगा की पूजा किए. महिलाओं द्वारा गाए जा रहे मंगल गीतों से माहौल गुलजार हो गया था. ज्योतिषाचार्य पं.मुन्ना जी चौबे ने बताया कि हिन्दू धर्म शास्त्रों में व्यक्ति के जन्म से लेकर मृत्यु तक सोलह संस्कारों से संस्कारित करने का उल्लेख किया गया है. उसी में से मुंडन आठवां संस्कार है. इसे चूाड़ा कर्म संस्कार भी कहा हाता है. उन्होंने बताया कि बक्सर में मुंडन संस्कार का विशेष महत्व है. क्योंकि यहां गंगा उतरायणी है. उतरायणी गंगा होने के कारण मुंडन तथा स्नान आदि के लिए यहां अन्य जिलों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं. श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ होने के कारण नाविकों की भी चांदी कटी और दिनभर व्यस्त रहे. वही नाई से लेकर पंडों तक को भी फुर्सत नहीं मिल रही थी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
