बक्सर कोर्ट. पॉक्सो अदालत ने 14 वर्षीय नाबालिग बच्ची से यौन उत्पीड़न का झूठा मुकदमा कराने वाले बाप के खिलाफ ही संज्ञान ले लिया. साथ ही आदेश की प्रति को पुलिस अधीक्षक को भेज कर निर्देश दिया है कि ऐसे मामलों की पूरी पड़ताल करने के बाद ही मुकदमा दर्ज करना चाहिए. मामला ब्रम्हपुर थाना के एक गांव के रहने वाले रामु प्रसाद से संबंधित है. बताते चले की 14 अक्टूबर 2021 को शाम के लगभग 6 बजे जब 14 वर्षीय बच्ची अपने घर में अकेली थी तब उसी गांव का रहने वाला अभियुक्त युवक उसके घर में घुस गया तथा बल पूर्व कमरे में ले जाकर यौन उत्पीड़न करने लगा. जब वह बचाने के लिए चिल्लाई तो अभियुक्त भाग खड़ा हुआ साथ ही घर से 50 हजार रुपये भी उठा ले गया. उक्त मामले की प्राथमिकी दर्ज कराई गयी थी. बाद में सुनवाई के दौरान पीड़िता को न्यायालय में उपस्थित कराया गया जहां उसने न्यायाधीश के समक्ष 164 का बयान देते हुए बताया कि उसके साथ ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी तथा उससे बलपूर्वक मुकदमा कराया गया था. मामले को न्यायालय ने काफी गंभीरता से लेते हुए पीड़िता के पिता को दो बार सूचना दिया लेकिन वह न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ. पोक्सो अदालत ने झूठे मुकदमे में लोगों को फसाने वाले ऐसे लोगों को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए कहा कि धारा 161 के तहत पीड़िता के पिता ने सभी दस्तावेजो को पुलिस को दिया था साथ ही अपनी नाबालिक बच्ची को कोर्ट में गवाही के लिए प्रस्तुति भी किया था लेकिन जानबूझकर विशेष उद्देश्य से तथा सावधानी से बिना जल्दबाजी कीजिए स्वयं केस नहीं किया ताकि उस पर सीधा दायित्व नहीं रहे और अपनी नाबालिक लड़की से झूठा मुकदमा दाखिल कराया .ऐसे मामलों में कानून में बच्चों के ऊपर कोई जिम्मेदारी नहीं बनती है, न्यायालय पीड़िता के पिता के खिलाफ संज्ञान लेकर सम्मन जारी करता है साथ ही एक प्रति को पुलिस अधीक्षक को भी अग्रसारित किया जाता है ताकि ऐसे झूठे मामले को दर्ज करने के पूर्व सही ढंग से जांच करें.
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