प्रभात खबर की खबर का असर: ब्रह्मपुर के 16 स्कूलों में कनीय शिक्षकों से वरीय को प्रभार दिलाने की कवायद शुरू

प्रभात खबर में खबर प्रकाशित होने के बाद ब्रह्मपुर के 16 स्कूलों में कनीय शिक्षकों से प्रभार लेकर वरीय शिक्षकों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. तीन महीने पहले जारी आदेश के बावजूद कई स्कूलों में प्रभार हस्तांतरण नहीं हुआ था.

Buxar News : ब्रह्मपुर प्रखंड क्षेत्र के विद्यालयों में वरीय शिक्षकों की अनदेखी कर कनीय शिक्षकों को स्कूल का प्रभार सौंपे जाने का मामला एक बार फिर चर्चा में है. तीन महीने पहले प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) की ओर से वरीय शिक्षकों को प्रभार सौंपने का आदेश जारी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद कई विद्यालयों में स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं हुआ. आरोप है कि विभागीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण कनीय शिक्षक प्रभार छोड़ने से कतरा रहे हैं. अब मामले की खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग की ओर से प्रभार हस्तांतरण से संबंधित कागजी कार्रवाई शुरू की गयी है.

16 विद्यालयों में नियमविरुद्ध प्रभार का हुआ था खुलासा

पूर्व में ब्रह्मपुर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने प्रखंड के 16 विद्यालयों में कनीय शिक्षकों के पास प्रभार होने का मामला सामने आने के बाद इसे नियमविरुद्ध बताया था. इसके बाद बीईओ की ओर से पत्र जारी कर संबंधित विद्यालयों में वरीय शिक्षकों को प्रभार सौंपने का निर्देश दिया गया था. आदेश में निर्धारित समय के भीतर प्रभार हस्तांतरित कर इसकी सूचना कार्यालय को देने को कहा गया था.

हालांकि, संबंधित शिक्षकों और विभागीय अधिकारियों के स्तर पर आदेश के अनुपालन को लेकर सवाल उठते रहे. तीन महीने बीत जाने के बाद भी कई विद्यालयों में प्रभार हस्तांतरण नहीं होने की बात सामने आ रही है. इससे विभागीय आदेशों के पालन और स्कूलों में प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग में बढ़ी हलचल

विद्यालयों में कनीय शिक्षकों के प्रभार को लेकर सामने आयी अनियमितता की खबर प्रकाशित होने के बाद शिक्षा विभाग में हलचल बढ़ी है. इसके बाद अब प्रखंड संसाधन केंद्र (बीआरसी) स्तर से वरीय शिक्षकों को प्रभार देने से संबंधित कागजी प्रक्रिया शुरू किये जाने की बात सामने आ रही है.

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि तीन महीने पहले जारी आदेश के बाद अब तक कितने विद्यालयों में नियम के अनुसार प्रभार का हस्तांतरण हो चुका है. विभागीय अधिकारियों से इस संबंध में जानकारी मांगे जाने पर स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया.

प्रभार विवाद पहुंच चुका है तालाबंदी और प्रदर्शन तक

ब्रह्मपुर प्रखंड में स्कूलों के प्रभार को लेकर विवाद नया नहीं है. कई विद्यालयों में प्रभार को लेकर उत्पन्न विवाद के कारण मामला तालाबंदी और विरोध प्रदर्शन तक पहुंच चुका है. इससे स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था भी प्रभावित हुई है.

रघुनाथपुर कन्या मध्य विद्यालय में प्रभार को लेकर विवाद सामने आने के बाद जांच कमेटी ने विद्यालय का निरीक्षण किया था. जांच के दौरान यह बात सामने आयी थी कि चार वरीय शिक्षकों के रहते हुए एक कनीय शिक्षक के पास प्रभारी प्रधानाध्यापक का प्रभार था. मामले को गंभीरता से लेते हुए डीपीओ माध्यमिक शिक्षा ने बीईओ को वरीय शिक्षक को प्रभार सौंपने का निर्देश दिया था.

गरहथा कला मध्य विद्यालय में तालाबंदी से बढ़ा था विवाद

इसी तरह गरहथा कला मध्य विद्यालय में प्रभार विवाद, विद्यालय के समुचित निरीक्षण के अभाव और शिकायतों की अनदेखी को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी सामने आयी थी. मामला इतना बढ़ा कि विद्यालय में तालाबंदी तक की स्थिति उत्पन्न हो गयी थी. लगातार दो दिनों तक यह मामला चर्चा में रहा था.

विद्यालयों में इस तरह के विवाद सामने आने के बावजूद समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने को लेकर विभागीय कार्यशैली पर सवाल उठते रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रभार से संबंधित नियमों का समय पर पालन कराया जाता, तो विवाद को बढ़ने से रोका जा सकता था.

तीन महीने बाद कार्रवाई, अब उठ रहे सवाल

कार्यालय आदेश पत्रांक-253, दिनांक 13 मई 2026 के अनुसार, इससे पहले ज्ञापांक-236, दिनांक 4 मई 2026 के माध्यम से प्रखंड के 16 चिन्हित विद्यालयों के कनीय प्रभारी प्रधानाध्यापकों को तीन दिनों के अंदर वरीय शिक्षकों को प्रभार हस्तगत कराने का निर्देश दिया गया था.

आदेश में प्रभार देने और लेने वाले दोनों पक्षों को 24 घंटे के अंदर प्रभार हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी कर कार्यालय को सूचित करने को कहा गया था. लेकिन तीन महीने बाद भी कुछ विद्यालयों में ही प्रभार का आदान-प्रदान होने की बात सामने आ रही है. शेष विद्यालयों में स्थिति पहले जैसी रहने के आरोप लग रहे हैं.

जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल

प्रभार विवाद को लेकर अब जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं. विभागीय आदेश जारी होने के बावजूद उसका पूरी तरह अनुपालन नहीं होना प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़ा करता है.

जानकारों का कहना है कि यदि आदेश जारी होने के बाद नियमित रूप से विद्यालयों की निगरानी की जाती और अनुपालन नहीं करने वालों पर कार्रवाई होती, तो विवाद को बढ़ने से रोका जा सकता था. अब मीडिया में मामला सामने आने के बाद शुरू हुई कार्रवाई की गंभीरता पर भी नजर रहेगी.

बीईओ का पद भी प्रभार में

ब्रह्मपुर प्रखंड में शिक्षा विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर एक और सवाल सामने आ रहा है. प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी का पद विभागीय सचिव के निर्देश के बावजूद अभी प्रभार में चलने की बात कही जा रही है. ऐसे में सवाल है कि जब प्रखंड स्तर पर शिक्षा विभाग का महत्वपूर्ण पद ही स्थायी रूप से भरा नहीं है, तो विद्यालयों की निगरानी और विभागीय आदेशों के प्रभावी अनुपालन की जिम्मेदारी कितनी प्रभावी तरीके से निभायी जा रही है.

बहरहाल, अब देखना होगा कि 16 विद्यालयों में कनीय शिक्षकों के प्रभार से जुड़े मामले में जिला स्तर के अधिकारी कितनी गंभीरता से कार्रवाई करते हैं और कितने विद्यालयों में वास्तव में वरीय शिक्षकों को नियम के अनुसार प्रभार सौंपा जाता है.

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By संतोष कांत

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