Buxar News: रात में इमरजेंसी वार्ड में नहीं पहुंचे डॉक्टर, तो सीएस करने लगे इलाज

सदर अस्पताल में डॉक्टरों की मनमानी को ले मरीजों को परेशानी का सामना इलाज के लिए करना पड़ रहा है. इस क्रम में सदर अस्पताल का इमरजेंसी भी घंटो खाली रहता है.

बक्सर. सदर अस्पताल में डॉक्टरों की मनमानी को ले मरीजों को परेशानी का सामना इलाज के लिए करना पड़ रहा है. इस क्रम में सदर अस्पताल का इमरजेंसी भी घंटो खाली रहता है. इस क्रम में शुक्रवार की रात्रि ऐसा ही मामला सामने आया है. जिसके बाद मरीजों में परेशानी को लेकर आक्रोस कायम हो गया है. मरीजों ने सदर अस्पताल के इमरजेंसी में डॉक्टर के नहीं होने की सूचना सिविल सर्जन को दी. जिसके बाद सिविल सर्जन सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में रात्रि 10 बजे पहुंच मरीजों की इलाज में खुद ही जुट गये. इस दौरान करीब 15 से 20 मरीजों का इलाज सिविल सर्जन ने किया. उन्होंने प्रशासक की बजाय पहले अपने डॉक्टर का फर्ज अदा करते हुए मरीजों की इलाज किया. जिसके बाद मरीजों का आक्रोस शांत हो गया. सिविल सर्जन शिव कुमार प्रसाद चक्रवर्ती ने इस दौरान रात्रि में करीब 2 घंटे तक सदर अस्पताल के इमरजेंसी में खुद ही सेवा दी. सिविल सर्जन के सदर अस्पताल पहुंचने पर कर्मियों में अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया. हमेशा इलाज में सुस्ती बरतने वाले कर्मी काफी सक्रिय दिखी. इसके साथ ही एसएनसीयू में सेवा दे रहे शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ डीएन सिंह को इमरजेंसी में तत्काल तैनात किया गया. जिन्होंने इमरजेंसी में आने वाले मरीजों का इलाज किया. इसके बाद स्थिति सामान्य हो गया.वही देर रात्रि में डॉ नौशाद की इमरजेंसी में सेवा के लिए ड्यूटी पर तैनात किया गया. जिन्होंने अपनी सेवा पूरी रात सदर अस्पताल में दिया. ज्ञात हो कि रोस्टर के अनुसार ड्यूटी पर तैनात डॉ.संजय पासवान बिना सूचना के गायब थे. जिसके कारण सदर अस्पताल के इमरजेंसी में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा. इमरजेंसी को नहीं रखना है खाली किसी भी अस्पताल के इमरजेंसी की सेवा 24 घंटे बहाल रहती है. जिससे इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को तत्काल इलाज की सुविधा मिल सके. इमरजेंसी में शिफ्टिंग के दौरान पूर्व से तैनात डॉक्टर तभी अपनी निर्धारित समय से ड्यूटी छोड सकते है जब अगले शिफ्ट के डाॅक्टर अपनी ड्यूटी पर पहुंच जाएंगे. इमरजेंसी में मरीजों के लिए कोई समय निर्धारित नहीं होता है. बल्कि अति आवश्यक मरीज ही पहुंचते है. जिनको तुरंत इलाज की आवश्यकता होती है. इमरजेंसी में मरीजों के लिए कोई समय निर्धारित नहीं होता है. बल्कि अति आवश्यक मरीज ही पहुंचते है. जिनको तुरंत इलाज की आवश्यकता होती है. डॉक्टरों के नहीं रहने से मरीज की जान जा सकती है. इस क्रम में गुरूवार को इमरजेंसी को दो घंटे से ज्यादा समय तक खाली रहना काफी गंभीर मामला है. वहीं पूर्व के डॉक्टर द्धारा निर्धारित समय से दूसरे शिफ्ट के डॉक्टर के नहीं पहुचने के पूर्व ही अपनी ड्यूटी छोड़कर चला जाना भी काफी गंभीर मामला है. सदर अस्पताल में इमरजेंसी में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को जब दो घंटे तक इलाज नहीं मिला तथा डॉक्टर नहीं पहुंचे तो मरीजों ने सिविल सर्जन को ही मोबाइल से सूचना दिया. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सीएम ने शीघ्र सदर अस्पताल में पहुंच कमान संभाल लिया. उन्होंने ही स्वयं मरीजों का इलाज शुरू कर दिया. जिसके बाद एसएनसीयू में तैनात शिशु विभाग के डॉक्टर डीएन सिंह भी पहुंच गये. जिन्होंने इमरजेंसी के मरीजों के इलाज में अपनी सहभागिता निभायी.

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