buxar news : भभुअर में चूड़ा-दही का प्रसाद ग्रहण कर श्रद्धालुओं ने भार्गव ऋषि को किया याद

buxar news : पंचकोसी परिक्रमा. श्रद्धालुओं ने की भार्गव सरोवर की परिक्रमा, जय श्रीराम के लगाये जयकारे

बक्सर. पंचकोसी परिक्रमा की तीसरी रात सदर प्रखंड के भभुअर में गुजरी. नदांव में रात्रि विश्राम के बाद पंचकोसी का कारवां मंगलवार की सुबह सदर प्रखंड का भभुअर गांव पहुंचा और भार्गव सरोवर के तट पर डेरा डालने के बाद श्रद्धालु नित्य क्रिया से निवृत्त हुए और स्नान के बाद भार्गवेश्वर मंदिर में दर्शन-पूजन किये.

पूजन-अर्चन के पश्चात श्रद्धालु दान-पुण्य किये और चूड़ा-दही का प्रसाद चखने के साथ महर्षि भृगु को याद करते हुए रात गुजारे. पंचकोसी का दूसरा पड़ाव सदर प्रखंड के नदांव स्थित नारद आश्रम में था. वहां रात्रि विश्राम के पश्चात पंचकोसी यात्री सूर्योदय से पूर्व भार्गव आश्रम के लिए रवाना हुए.

जयघोष के बीच हुई सरोवर की परिक्रमा

सिद्धाश्रम व्याघ्रसर (बक्सर) पंचकोसी परिक्रमा समिति के अध्यक्ष व वसांव पीठाधीश्वर श्री अच्युत प्रपन्नाचार्य जी महाराज की अगुवाई में श्रद्धालुओं ने भार्गव सरोवर की परिक्रमा की. इस दौरान परिक्रमा में शामिल श्रद्धालु भार्गव मुनि व भगवान श्रीराम के जयघोष कर रहे थे, जिससे माहौल भक्तिमय हो गया था. इस मौके पर शहर के नयी बाजार स्थित सीताराम विवाह महोत्सव आश्रम के महंत श्री राजाराम शरण जी महाराज, गंगा पुत्र श्री लक्ष्मी नारायण त्रिदंडी स्वामी जी महाराज, समिति के संयुक्त सचिव व वरिष्ठ अधिवक्ता सुबेदार पांडेय एवं डॉ रामनाथ ओझा के अलावा अन्य साधु-संत उपस्थित रहे.

भृगु ऋषि ने प्रभु श्रीराम को खिलायी थी चूड़ा-दही

धर्माचार्यों ने कथा-प्रवचन के माध्यम से भार्गव आश्रम के महत्व तथा पंचकोसी यात्रा के उद्देश्य को बताया. बसांव मठिया के सुदर्शनाचार्य उर्फ भोला बाबा ने पौराणिक आख्यानों का उल्लेख करते हुए कहा कि त्रेतायुग में भगवान श्रीराम अपने अनुज लक्ष्मण के साथ भभुअर पहुंचे थे. खुद के आश्रम में आगमन पर महर्षि भृगु ने चूड़ा-दही खिलाकर दोनों भाइयों की खातिरदारी की थी. उसी उपलक्ष्य में वहां चूड़ा-दही का प्रसाद खाकर रात्रि विश्राम का विधान है. क्योंकि प्रभु श्रीराम ने अपनी पंचकोसी परिक्रमा के दौरान वहां रात गुजारी थी.

भार्गव आश्रम में मिलती है चित्त को शांति

पंचकोसी परिक्रमा के तीसरे पड़ाव भभुअर स्थित भार्गव आश्रम की परिक्रमा से मन को शांति मिलती है. पंचकोसी के तीसरे विश्राम स्थल भार्गव आश्रम के इस रहस्य का उल्लेख करते हुए आचार्य श्रीकृष्णानंद जी पौराणिक ने बताया कि एक बार देवगणों एवं ऋषियों के बीच त्रिदेवों की श्रेष्ठता को लेकर भ्रम हो गया. त्रिदेवों की परीक्षा के लिए महर्षि भृगु को जिम्मेदारी सौंपी गयी. उन्होंने ब्रह्मा एवं शंकर की परीक्षा ली. परीक्षा में दोनों देवता असफल हो गये. आखिर में वे भगवान विष्णु के पास पहुंचे. उन्होंने श्रेष्ठता सिद्ध करने हेतु भगवान विष्णु के वक्षस्थल पर अपने पैरों से प्रहार किया, जिससे श्री हरि को चोट लगी, बावजूद भगवान विष्णु ने नेत्रों में आंसू भरकर ऋषि भृगु के पैरों को सहलाते हुए कहा कि हे ब्राह्माण असुरों के अस्त्र-शस्त्रों के घात से मेरा शरीर अत्यंत कठोर हो गया है, लिहाजा प्रहार से आपके पैरों को पीड़ा हुई होगी, जिसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूं. भगवान के इस शब्द को सुन भृगु मुनि का चित्त अशांत हो गया. आचार्य ने बताया कि तब श्रीहरि के कहने पर सिद्धाश्रम क्षेत्र के भभुअर में उन्होंने देवाधिदेव महादेव की तपस्या की थी, जिससे उनका चित्त शांत हुआ था. ऐसे में यहां विधि-विधान के साथ परिक्रमा करने से श्रद्धालुओं के चित्त को शांति मिलती है.

भार्गव सरोवर के शिल्पी हैं लक्ष्मण जी

भगवान श्रीराम के छोटे भाई लक्ष्मण जी को भभुअर स्थित भार्गव सरोवर का शिल्पकार माना जाता है. मान्यता के अनुसार त्रेतायुग में महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ को संपन्न कराने के बाद ऋषियों से आशीर्वाद लेने को जब श्रीराम के साथ पंचकोसी परिक्रमा करते लक्ष्मण वहां पहुंचे, तो उन्हें जल की कमी महसूस हुई. लिहाजा, उन्होंने अपने तीर से पृथ्वी पर वार किया. इससे पाताल से पानी का सोता फूटकर जलधारा निकलने लगी. इसका वर्णन करते हुए समिति के संयुक्त सचिव सुबेदार पांडेय ने बताया कि पंचकोसी के दौरान उक्त सरोवर में स्नान करने से स्नानार्थी पाप से रहित होकर बैकुंठ लोक में निवास करते हैं.

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Published by: Shailesh kumar

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