Buxar News : बिहार के वित्त रहित महाविद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतनमान देने की मांग एक बार फिर तेज हो गयी है. पटना में बिहार वित्त रहित महाविद्यालयों की सेंट्रल कोर कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक में कॉलेजों से जुड़ी समस्याओं और शिक्षकों-कर्मचारियों के वेतनमान के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गयी. बैठक में मुख्यमंत्री से वित्त रहित महाविद्यालयों की समस्याओं के समाधान के लिए गठित उच्चस्तरीय कमेटी की बैठक जल्द बुलाने का आग्रह किया गया.
उच्चस्तरीय कमेटी की बैठक जल्द कराने की मांग
बैठक में प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि बिहार सरकार द्वारा वित्त रहित महाविद्यालयों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रधान सचिव की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय कमेटी की बैठक जल्द आयोजित करायी जाए. प्रतिनिधियों का कहना था कि कमेटी में ठोस निर्णय लेकर शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतनमान देने की दिशा में प्रभावी कदम उठाया जाना चाहिए.
वर्षों से वेतनमान की आस में शिक्षक और कर्मचारी
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि राज्य के वित्त रहित महाविद्यालयों में शिक्षक और कर्मचारी लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें नियमित वेतनमान का लाभ नहीं मिल पा रहा है. इसके कारण शिक्षकों और कर्मचारियों के सामने आर्थिक समस्याएं बनी हुई हैं. प्रतिनिधियों ने सरकार से इस व्यवस्था का स्थायी समाधान निकालने की मांग की.
वित्त रहित व्यवस्था खत्म करने की मांग
दंडी स्वामी सहजानंद संत विनोबा डिग्री महाविद्यालय, सिमरी, बक्सर के प्रोफेसर विनोद कुमार ओझा ने कहा कि वित्त रहित महाविद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों की मांग लंबे समय से लंबित है. सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय कमेटी की बैठक जल्द कराकर ठोस निर्णय लिया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि वित्त रहित व्यवस्था को समाप्त कर शिक्षकों और कर्मचारियों को सम्मानजनक वेतनमान उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार को पहल करनी चाहिए. इससे लंबे समय से चली आ रही समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा.
सेंट्रल कोर कमेटी की बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा
पटना में आयोजित बैठक की अध्यक्षता बिहार सेंट्रल कोर कमेटी के अध्यक्ष रौशन कुमार और प्रोफेसर विनोद कुमार ओझा ने संयुक्त रूप से की. बैठक में राज्य के विभिन्न वित्त रहित महाविद्यालयों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अपनी समस्याओं को प्रमुखता से रखा. प्रतिनिधियों ने सरकार से शिक्षकों और कर्मचारियों के हित में जल्द निर्णय लेने की मांग की.
