Buxar Liquor Smuggling : बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून को लागू हुए बरसों बीत गए, लेकिन उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे बक्सर जिले के ब्रह्मपुर थाना क्षेत्र में इस कानून की धज्जियां रोजाना उड़ाई जा रही हैं. सरकार की सख्ती और पुलिसिया दावों को ठेंगा दिखाते हुए शराब तस्करों ने अब एक ऐसा ''सेफ कॉरिडोर'' (सुरक्षित रास्ता) तैयार कर लिया है, जहां कानून का पहरा पूरी तरह पंगु नजर आता है.
लाखों रुपए की देशी और विदेशी शराब की खेप पहुंच रही है बिहार
सूत्रों से मिली बेहद चौंकाने वाली जानकारियों के अनुसार, उत्तर प्रदेश से चक्की होते हुए ब्रह्मपुर थाना क्षेत्र के गायघाट के रास्ते रोजाना लाखों रुपये की विदेशी और देसी शराब की बड़ी खेप बिहार की सीमा में प्रवेश कर रही है. हैरानी की बात यह है कि इस पूरे सिंडिकेट को स्थानीय स्तर पर ''मैनेजिंग संस्कृति'' का ऐसा संरक्षण प्राप्त है कि शाम होते ही इस रूट पर शराब तस्करों का बकायदा काफिला गुजरने लगता है, लेकिन स्थानीय पुलिस के हाथ इन बड़े मगरमच्छों तक पहुंचने में हमेशा नाकाम साबित होते हैं.
शाम ढलते ही बदल जाती है गायघाट की तस्वीर
स्थानीय ग्रामीणों और सीमावर्ती इलाकों के सूत्रों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दिन के उजाले में इस रूट पर भले ही सामान्य आवाजाही दिखती हो, लेकिन जैसे ही सूरज ढलता है, गायघाट का यह पूरा इलाका शराब तस्करों की लाइफलाइन में तब्दील हो जाता है. यूपी के बलिया और आसपास के जिलों से शराब की खेप चक्की के रास्ते बिहार की सीमा में प्रवेश करती है. चक्की थाना क्षेत्र होते हुए इसके बाद ब्रह्मपुर थाना क्षेत्र के गायघाट के रास्ते को मुख्य ट्रांजिट पॉइंट बनाकर शराब को बक्सर, भोजपुर (आरा), पटना और सारण जिलों के गुप्त ठिकानों तक पहुंचाया जा रहा है.
Buxar Liquor Smuggling : साठगांठ का बड़ा खेल: बड़ी खेप पर पुलिस की ''नो एंट्री''
विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि इस रूट पर तस्करी का धंधा बिना किसी डर के इसलिए चल रहा है क्योंकि इसके पीछे एक मजबूत आर्थिक साठगांठ यानी ''मैनेजिंग का खेल'' काम कर रहा है. सच्चाई यह है कि पिछले लंबे समय से ब्रह्मपुर थाना पुलिस ने इस मार्ग पर शराब की कोई भी बड़ी खेप या अंतरप्रांतीय तस्कर गिरोह का भंडाफोड़ नहीं किया है. कागजी खानापूर्ति और वरीय अधिकारियों की डांट से बचने के लिए पुलिस कभी-कभार कुछ लीटर देसी शराब या दो-चार पियक्कड़ों को पकड़कर जेल भेज देती है और अपनी पीठ थपथपा लेती है. लेकिन सवाल यह उठता है कि जब शाम होते ही गाड़ियों का काफिला इस क्षेत्र से गुजरता है, तो गश्त करने वाली पुलिस की नजरें इन पर क्यों नहीं पड़तीं.
चौकीदार से लेकर ''खाकी'' तक सब मौन
इलाके के एक बुजुर्ग नागरिक ने दबी जुबान में कहा, "साहब जब गांव के बच्चे-बच्चे को पता है कि किस रास्ते से और किस समय शराब की गाड़ियां पार हो रही हैं, तो क्या पुलिस इतनी नादान है कि उसे कुछ पता ही नहीं? सब कुछ पहले से तय होता है. शाम होते ही इस रूट पर पुलिस की मुस्तैदी गायब हो जाती है.
Buxar News: आखिर क्यों सुरक्षित है यह रूट?
चक्की और गायघाट का इलाका उत्तर प्रदेश की सीमा और गंगा नदी के मैदानी रूट से जुड़ा हुआ है. तस्कर भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर आसानी से पुलिस को चकमा देकर निकल जाते हैं.
लाइनमैन का तगड़ा नेटवर्क
तस्करों ने स्थानीय स्तर पर बेरोजगार युवकों को मोटी रकम देकर ''लाइनमैन'' (रेकी करने वाले) के रूप में काम पर रखा है. पुलिस की गाड़ी जैसे ही थाने से निकलती है, तस्करों को पल-पल की लोकेशन मिल जाती है. स्थानीय स्तर पर बड़ी कार्रवाई न होना तस्करों के मनोबल को सातवें आसमान पर पहुंचा रहा है.
एसपी से कार्रवाई की उम्मीद, जागेंगे स्थानीय अफसर
इस पूरे मामले में स्थानीय पुलिस की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है. शराबबंदी कानून को सफल बनाने की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है, अगर वहीं ''मैनेजिंग संस्कृति'' हावी हो जाए, तो कानून का मखौल उड़ना लाजिमी है. अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद जिले के पुलिस कप्तान (एसपी) इस मामले को संज्ञान में लेकर ब्रह्मपुर पुलिस को क्या कड़े निर्देश देते हैं और गायघाट के इस ''शराब रूट'' पर कब पूर्णविराम लगता है.
अधिकारी का पक्ष
डुमरांव एसडीपीओ पोलस्त कुमार ने कहा कि, सारे मुखबिरों को सक्रिय कर दिया गया है शराब तस्करों के नेटवर्क को नेस्तनाबूद कर दिया जायेगा इसमें अगर पुलिस की संलिप्तता पाई जाती है तो उन पर भी कार्रवाई होना तय है.
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