दो चिकित्सकों के सहारे चल रहा चक्की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

सूबे की सरकार लाख दावा कर रही है कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतर बदलाव हुआ है. लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है.

चक्की. सूबे की सरकार लाख दावा कर रही है कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतर बदलाव हुआ है. लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. चक्की प्रखंड मुख्यालय से थोड़ा दूर पर बने 30 बेड के नये अस्पताल आधुनिक तरीके से बनाया गया. अस्पताल आधुनिक उपकरण से लैस भी है, लेकिन उपकरण रह कर ही क्या करेगा जब उसको संचालित करने वाला ही नहीं रहेगा. यहीं स्थिति है चक्की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का यहां पर करोड़ों की लागत से अस्पताल का भवन बनाया गया ताकि इस क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य संबंधी इलाज के लिए दूर-दराज न जाना पड़े लेकिन चिकित्सक की कमी के कारण लोगों के लिए आज भी स्वास्थ्य सेवाएं पाना सपनों के जैसा है. इस अस्पताल में फिलहाल दो चिकत्सक, तीन एएनम, एक फार्मासिस्ट तथा पांच डाटा आपरेटर नियुक्त हैं.

करीब छह करोड़ की लागत से बनाए गए अस्पताल : पिछले साल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से इस अस्पताल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तब्दील किया गया. उसके बाद नये भवन निर्माण के लिए 6 करोड़ 59 लाख 67 हजार 750 रुपये के राशि से अस्पताल बनाया गया. ताकि गांव कस्बों के लोगो को स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं का समुचित लाभ मिल सके लेकिन क्षेत्र के लोगों का इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है.

दो चिकत्सकों के सहारे 30 बेड का अस्पताल : यहां पर आधुनिक तरीके से 30 बेड का अस्पताल बना दिया गया है. लेकिन अस्पताल में चिकित्सक की संख्या नहीं बढ़ाई गयी, बल्कि चिकित्सक की संख्या और कम कर दी गयी चिकित्सा प्रभारी अंजनी कुमार ने बताया कि पहले यहां पर तीन चिकित्सक की नियुक्ति थी. फिलहाल अभी दो ही चिकित्सक नियुक्त हैं. एक चिकित्सक को यहां से हटाकर बक्सर कर दिया गया. ऐसे में जाहिर है की 24×7 घंटे की ड्यूटी दो चिकित्सकों के सहारे करना बहुत मुश्किल का काम है. इसमें भी एक चिकत्सा प्रभारी हैं उनका कहना है कि हमको तो लगभग प्रतिदिन जिला में मीटिंग या अन्य कार्यों से जाना पड़ता है. इस स्थिति में एक ही चिकित्सक अस्पताल में रह जाते हैं.

दशकों से महिला चिकित्सक की कमी : इस अस्पताल में दशकों से महिला चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हुई है. जिससे प्रखंड के महिलाओं को इलाज कराने के लिए इधर उधर जाना पड़ता है. सबसे बड़ी बात यह है कि यहां पर प्रसव का काम एएनएम के द्वारा किया जाता है. क्योंकि इस अस्पताल में महिला चिकत्सक है ही नही अगर प्रसव के दौरान पेसेंट को कोई गंभीर समस्या होती है तो क्या होगा? प्रभारी ने बताया कि उस स्थिति में यहां से मरीज को बक्सर रेफर कर दिया जाता है.

ड्रेसर का भी काम डॉक्टर के जिम्मे : इस समय अस्पताल में ड्रेसर तक नहीं है. ड्रेसर का भी काम डॉक्टर को ही करना पड़ता है. यहां वर्तमान में दो डॉक्टर और एक फार्मासिस्ट व तीन एएनएम है. चिकित्सा प्रभारी ने बताया कि जब 30 बेड का नया अस्पताल बनाया गया उसके बाद कई बार इस समस्या से विभाग को पत्र और मौखिक रूप से अवगत कराया गया लेकिन इसपर विभाग का ध्यान ही नहीं पड़ता है. उन्होंने कहा कि मैन पावर बढ़ाना पड़ेगा इतने कर्मियों व डॉक्टर से काम नहीं चलेगा डॉक्टर और कर्मियों की संख्या बढ़ानी पड़ेगी. बताते चले कि अस्पताल में संसाधन होते हुए भी स्टाफ की कमी से मरीज इलाज से वंचित रह जाते हैं.

झोलाछाप डॉक्टरों की कट रही चांदी : मालूम हो कि स्वास्थ्य व्यवस्था का लाभ सही नहीं मिलने के कारण झोलाछाप डॉक्टरों के चंगुल में फंसकर लोग दोहन हो रहें हैं. सूत्रों के अनुसार इस समय झोलाछाप डॉक्टरों की चांदी कट रही है इसका मुख्य वजह है कि अस्पताल में सही ढ़ग से इलाज नहीं हो पाता है. प्रखंड निवासी कुंवर सिंह ने बताया कि इन दिनों प्रखंड में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार हो गयी है और मरीजों को दोहन किया जा रहा है. सबसे बड़ी बात यह है कि गंभीर से गंभीर रोगों का भी इलाज करने से इ लोग पीछे नहीं हटते हैं. ऐसे में कई बार देखा गया है कि मरीज की जान भी चली जाती है.

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Published by: Amlesh prasad

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