डुमरांव. गुरुवार को प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में बहनों ने अपने भाईयों की सलामती के लिए उपवास रखा और गोधन पूजा की. कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को मनाये जाने वाले भैया दूज पर्व को आमतौर पर ग्रामीण इलाकों में गोधन पूजा के नाम से भी जाना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि इस गोधन पूजा से भाइयों को आकाल मृत्यु का डर नहीं होता. इस मौके पर बहनें विशेष पौधा रेंगनी के कांट को अपने जीभ पर गड़ाकर भाईयों को खूब श्रापित कर गोधन पूजा करतीं हैं. गोधन पूजा करने वाली महिलाएं सभी उम्र की होती हैं. पूजा को लेकर इलाके के अरियांव, नंदन, कोरानसराय, अमसारी सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों के गली-मुहल्लों की बहनें व महिलाओं ने घर के बाहर सामूहिक रूप से गोबर से चैकोर आकृति बनाया था, जिसमें गोधन की गोबर से प्रतिमा बनायी गयी थी. इस दौरान उपस्थित बहनों ने अपने भाई की सलामती के लिए कई तरह के गीत कुटी ना भैया के दुश्मन चारों पहर दिन रात जिअस हो मोरे भैया, जिअस लाखों बारिश..आदि पारंपरिक गा रहीं थीं. पूजा के दौरान महिला और युवतियों ने घर से थाली को सजाकर मिठाई, पान, सुपारी विशेष रुप से पूजा में मान्यता के अनुसार चना चढ़ाकर गोधन की पूजा की. जहां बहनों ने पूजा करने के बाद अपने भाइयों को तिलक चंदन लगाकर प्रसाद को खिलाया और भाइयों की सलामती की प्रार्थना की.
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