Buxar News (बक्सर से मनीष मिश्रा की रिपोर्ट) :
जिला कलेक्ट्रेट परिसर में शनिवार को आयोजित जिला परिषद की सामान्य बैठक के दौरान उस समय अचानक अफरा-तफरी और सनसनी फैल गई, जब नवानगर क्षेत्र के जिला परिषद सदस्य राजीव यादव आत्मदाह के उद्देश्य से बैठक स्थल पर पहुंच गए. उनके हाथ में आत्मघाती कदम उठाने से जुड़ी सामग्री देख वहां मौजूद अधिकारियों और कर्मियों के हाथ-पांव फूल गए. हालांकि, समाहरणालय में सुरक्षा को लेकर तैनात नगर थाना पुलिस ने बेहद मुस्तैदी और त्वरित कार्रवाई करते हुए जिला परिषद सदस्य को मौके पर ही दबोच लिया और उन्हें हिरासत में लेकर तुरंत थाने भेज दिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया.
मांगों की अनदेखी और कार्यपालक पदाधिकारी पर उपेक्षा का आरोप
मिली जानकारी के अनुसार, बक्सर जिला परिषद के सदस्य विभिन्न विकासात्मक मांगों और प्रशासनिक रवैये को लेकर पिछले कई महीनों से लगातार धरना-प्रदर्शन और आंदोलन कर रहे थे. हिरासत में लिए गए जिला परिषद सदस्य राजीव यादव का आरोप है कि इतने लंबे समय तक शांतिपूर्ण आंदोलन करने के बावजूद कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा उनकी जायज समस्याओं और मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया. उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जनता के चुने हुए जनप्रतिनिधियों की लगातार घोर उपेक्षा की जा रही है. इसी उपेक्षा से क्षुब्ध और आक्रोशित होकर उन्होंने शनिवार को सामान्य बैठक के दौरान आत्मदाह जैसा आत्मघाती कदम उठाने का कड़ा निर्णय लिया था.
राजीव यादव की गिरफ्तारी पर भड़के अन्य सदस्य, प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन
जैसे ही राजीव यादव को पुलिस द्वारा हिरासत में लेकर थाने ले जाने की सूचना बैठक हॉल तक पहुंची, बैठक में मौजूद अन्य जिला परिषद सदस्य पूरी तरह भड़क गए. सदस्यों ने बैठक की कार्यवाही को बीच में ही रोक दिया और प्रशासन के तानाशाही रवैये के खिलाफ एकजुट होकर परिसर में ही जमकर विरोध-प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू कर दी. गुस्साए सदस्यों ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन द्वारा उनकी जनहित से जुड़ी बातों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है और क्षेत्र के विकास कार्यों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर कोई भी ठोस पहल नहीं की जा रही है, जो लोकतंत्र का अपमान है.
अधिकारियों की सक्रियता से संभली स्थिति, कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के चलते कुछ समय के लिए समाहरणालय परिसर में भारी तनावपूर्ण स्थिति बनी रही. हंगामे को बढ़ता देख जिले के कई वरीय पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने मोर्चा संभाला और प्रदर्शनकारी सदस्यों को समझा-बुझाकर व सुरक्षा का भरोसा देकर स्थिति को पूरी तरह नियंत्रित किया. इस हाई वोल्टेज ड्रामे और घटनाक्रम के बाद जिला परिषद की कार्यप्रणाली, विकास योजनाओं की सुस्त रफ्तार और जनप्रतिनिधियों की मांगों के प्रति स्थानीय प्रशासन के उदासीन रवैये को लेकर शहर से लेकर देहात तक कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
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