बक्सर से ओंकार नाथ मिश्र की रिपोर्ट
Buxar News: कलेक्ट्रेट स्थित पुलिस कार्यालय में मासिक अपराध गोष्ठी का आयोजन किया गया. इस बैठक में अपराधियों पर शिकंजा कसने और थानों में लंबित मामलों को जल्द से जल्द निपटाने की रणनीति तैयार की गई. एसपी शुभम आर्य की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक की शुरुआत लंबित कांडों की समीक्षा से हुई. एसपी ने एक-एक थाने से लंबित केस की फाइल खुलवाई और जांच में देरी की वजह पूछी. उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि गंभीर अपराध, हत्या, लूट और अपहरण के मामले किसी भी हाल में लंबित नहीं रहने चाहिए. अनुसंधान समय पर पूरा हो और पुख्ता सबूत के साथ चार्जशीट अदालत तक पहुंचे.
फरार अपराधियों और शराब माफियाओं पर कसें शिकंजा
बैठक के दौरान एसपी ने वारंट और कुर्की वाले मामलों में भी तेजी लाने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि फरार चल रहे अपराधियों की लिस्ट बनाकर उनके ठिकानों पर दबिश तेज की जाए. मद्य निषेध को लेकर सख्त हिदायत देते हुए एसपी ने कहा कि अवैध शराब बनाने और बेचने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. हर थाना क्षेत्र में नियमित रूप से छापेमारी अभियान चलाया जाए. इसके साथ ही बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए उन्होंने थानों को टेक्निकल सेल की मदद लेकर केस सुलझाने और लोगों को जागरूक करने की जिम्मेदारी सौंपी.
रात में गश्ती बढ़ाने और जनता से बेहतर व्यवहार का निर्देश
कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एसपी ने निर्देश दिया कि रात में पुलिस गश्ती बढ़ाई जाए. बाजार, बस स्टैंड और संवेदनशील इलाकों में पुलिस की मौजूदगी अनिवार्य रूप से दिखनी चाहिए. अपराधियों में खौफ पैदा करने के लिए नियमित वाहन जांच अभियान चलाया जाए. थानाध्यक्षों को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि थाने में आने वाला हर फरियादी थक-हार कर आता है. उसकी शिकायत को गंभीरता से सुनें और त्वरित कार्रवाई करें, क्योंकि पुलिस और जनता के बीच भरोसा बढ़ाना सबसे जरूरी है.
बेहतर काम करने वाले पुलिसकर्मी हुए सम्मानित
अपराध गोष्ठी के अंत में एसपी शुभम आर्य ने उन पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया जिन्होंने पिछले दिनों सराहनीय कार्य किया था. ड्यूटी के प्रति निष्ठा और अपराध नियंत्रण में उनके योगदान के लिए उन्हें प्रशस्ति-पत्र दिया गया. इस महत्वपूर्ण बैठक में सदर एसडीपीओ गौरव पांडेय, डुमरांव एसडीपीओ पोलस्त कुमार और मुख्यालय डीएसपी पंकज कुमार के अलावा जिले के सभी डीएसपी, पुलिस निरीक्षक और एसएचओ (SHO) शामिल हुए.
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