बक्सर में घोटाले का खुलासा, पंचायतों से 344 नलकूप वापस लेने की तैयारी, मुखियाओं पर गिरेगी गाज

Buxar News: बक्सर में 344 सरकारी नलकूपों को पंचायतों से वापस लेने की तैयारी शुरू हो गई है. 16.33 करोड़ में से 4.28 करोड़ की उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित रहने पर विभाग सख्त कार्रवाई के मूड में है.


BuxarNews: (प्रशांत कुमार राय) बक्सर जिले में सात वर्ष पहले पंचायतों को सौंपे गए सरकारी नलकूपों को अब फिर से लघु सिंचाई विभाग अपने अधीन लेने की तैयारी कर रहा है. विभाग ने उन मुखियाओं के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिन्होंने नलकूपों के रखरखाव और मरम्मत पर खर्च की गई राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) अब तक जमा नहीं किया है. विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि एक सप्ताह के भीतर यूसी जमा नहीं करने पर संबंधित पंचायतों से राशि की वसूली की जाएगी और विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी.

344 नलकूप पंचायतों को सौंपे गए थे

जानकारी के अनुसार वर्ष 2019 में जिले के कुल 344 राजकीय नलकूपों का संचालन एवं रखरखाव पंचायती राज संस्थाओं को सौंपा गया था. उस समय 150 नलकूप चालू स्थिति में थे, जबकि 194 नलकूप तकनीकी खराबी और मरम्मत के अभाव में बंद पड़े थे. बंद नलकूपों को चालू कराने और सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सरकार द्वारा 16 करोड़ 33 लाख रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई थी.

4.28 करोड़ का उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित

विभागीय अभिलेखों के अनुसार अधिकांश पंचायतों ने खर्च की गई राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा कर दिया है, लेकिन अब भी 4 करोड़ 28 लाख रुपये के व्यय का प्रमाण पत्र लंबित है. कई पंचायतों ने वर्षों बीत जाने के बाद भी खर्च का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं कराया है, जिसे विभाग गंभीर वित्तीय अनियमितता मान रहा है.

घटती जा रही है नलकूपों की संख्या

वर्तमान स्थिति की समीक्षा में यह सामने आया है कि जिले में नलकूपों की कार्यक्षमता लगातार घट रही है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 325 नलकूपों में से 166 बंद पड़े हैं, जबकि केवल 159 ही चालू हालत में हैं. इससे किसानों को सिंचाई के लिए निजी संसाधनों पर निर्भर होना पड़ रहा है, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है.

फेजवार खर्च और लंबित यूसी

प्रथम चरण में 8 करोड़ 6 लाख 78 हजार 88 रुपये दिए गए, जिसमें 41 लाख 34 हजार 327 रुपये का उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित है. द्वितीय चरण में 7 करोड़ 21 लाख 85 हजार 254 रुपये में से 3 करोड़ 17 लाख 85 हजार 599 रुपये का यूसी प्राप्त नहीं हुआ है. तृतीय चरण में 1 करोड़ 9 लाख 27 हजार 481 रुपये में से 70 लाख 77 हजार 689 रुपये का प्रमाण पत्र लंबित है.

विभाग ने शुरू की कार्रवाई

लघु सिंचाई विभाग का मानना है कि पंचायत स्तर पर नलकूपों के संचालन की व्यवस्था अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी है. इसी को देखते हुए विभाग ने इन्हें पुनः अपने नियंत्रण में लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. संबंधित पंचायतों और मुखियाओं को नोटिस भेजा जा रहा है.

क्या कहते हैं अधिकारी

कार्यपालक अभियंता रंजीत कुमार ने बताया कि उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं देने वाले मुखियाओं की सूची तैयार कर पंचायत राज पदाधिकारी को पत्र भेजा गया है. एक सप्ताह के भीतर यूसी जमा नहीं करने पर संबंधित मुखियाओं के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी और राशि की वसूली भी सुनिश्चित की जाएगी.

किसानों को राहत देने की पहल

विभाग का मुख्य उद्देश्य नलकूपों को पुनः चालू कर किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि खेती की लागत कम हो और उत्पादन में वृद्धि हो सके.

Also Read: कैमूर में एसडीएम की चेतावनी फेल, रामगढ़ बना अवैध बस अड्डा ,कार्रवाई के बढ़ भी नहीं बदली तस्वीर

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Raginisharma

वर्तमान में मैं, रागिनी शर्मा पटना स्थित प्रभात खबर डिजिटल की टीम के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हूं. यहां मैं बिहार के विभिन्न जिलों से जुड़ी अहम खबरों, राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों और ट्रेंडिंग विषयों पर काम कर रही हूं. मेरा उद्देश्य हर खबर को सरल, सटीक और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक न सिर्फ जानकारी प्राप्त करें बल्कि उससे जुड़ाव भी महसूस करें और डिजिटल पत्रकारिता को और अधिक सार्थक बनाया जा सके.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही मैंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. अपने कॉलेज के समय में हिंदुस्तान के साथ इंटर्नशिप के दौरान मुझे पहली बार वेब पोर्टल पर खबर लिखने और डिजिटल न्यूज राइटिंग का व्यावहारिक अनुभव मिला. इसी दौरान मैंने न्यूज़ लेखन, हेडलाइन स्ट्रक्चर और डिजिटल स्टोरी प्रेजेंटेशन की बुनियादी समझ विकसित की.

इसके बाद वर्ष 2025 में पत्रकारिता में ग्रेजुएशन पूरा करने के साथ ही मैंने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत की. डिजिटल मीडिया में मेरी पहली भूमिका फर्स्ट बिहार झारखंड के साथ रही, जहाँ मैंने एंकरिंग और ग्राउंड रिपोर्टिंग के माध्यम से बिहार के जमीनी मुद्दों को कवर किया. इस दौरान मैंने राज्य की राजनीति, सामाजिक सरोकारों और आम जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग की.

और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >