Buxar News: (विनोद कुमार सिंह) बक्सर में रोहिणी नक्षत्र के शुरू हुए एक सप्ताह बीत जाने के बावजूद चौसा सीवीसी कैनाल में सोन नहर का पानी नहीं छोड़ा गया है. धान की बिचड़ा बुवाई का यह सबसे उपयुक्त समय माना जाता है, लेकिन नहर सूखी होने के कारण किसान छटपटा रहे हैं. क्षेत्र के सभी आहर, तालाब और नाले ज्येष्ठ माह में पूरी तरह सूख चुके हैं. इस समय सोन नहर ही किसान का एकमात्र सिंचाई स्रोत है. पानी की कमी से खेत तैयार होने के बावजूद धान की नर्सरी डालना असंभव हो गया है.
किसानों की समस्याएँ और शिकायतें
किसान लड्डू यादव, उपेन्द्र सिंह, श्रीराम सिंह, मीर हमजा खां, निर्मल कुशवाहा और शहाबु नट ने बताया कि रोहिणी नक्षत्र में बिचड़ा डालने से फसल अच्छी होती है. लेकिन नहर में पानी नहीं आने से खेतों में दरारें पड़ गई हैं और बुवाई का समय गंवाने का डर है. रामपुर, डिहरी, पलियां, जलीलपुर, सिकरौल, सरेंजा, चुन्नी, पवनी सहित दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसान प्रभावित हैं. खेत तैयार हैं, पर पानी के बिना बिचड़ा डालना संभव नहीं है.
सिंचाई विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग
किसानों ने सिंचाई विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द चौसा सीवीसी कैनाल में सोन नहर का पानी छोड़ा जाए. उनका कहना है कि यदि अगले दो-चार दिनों में पानी नहीं आया, तो धान की खेती प्रभावित होगी और उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ेगा. अभी किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं, ताकि बारिश या नहर में पानी आने से फसल बचाई जा सके. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर पानी जल्द नहीं आया, तो बुवाई के उपयुक्त समय का लाभ गंवाया जा सकता है और फसल नुकसान झेल सकती है.
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