बक्सर. बक्सर जिला कालाजार मुक्त होने के कगार पर पहुंच चुका है. जिले में गत दो वर्षों में कालाजार का एक भी मरीज नहीं पाया गया है. 2023 में जिला में कालाजार (वीएल) का एक और पीकेडीएल का एक मरीज मिला था. जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यालय द्वारा सुनिश्चित किया जा रहा है कि ऐसे क्षेत्र जहां कालाजार के मरीज पहले मिले थे, वहां सघन निगरानी की जा रही है. ठीक हो चुके मरीज दोबारा इसकी चपेट में आ सकते हैं : जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ शैलेंद्र कुमार ने बताया कि कालाजार को जड़ से मिटाने के लिए लोगों की सहभागिता अति आवश्यक है. लोगों को इस बीमारी के लक्षणों की पहचान से लेकर इलाज की जानकारी होनी चाहिए. इस बीमारी की खास बात है कि इससे पूरी तरह से ठीक हो चुके मरीज दोबारा से इसकी चपेट में आ सकते हैं. ऐसे में मरीज के शरीर पर त्वचा संबंधी लीश्मेनियेसिस रोग होने की संभावना रहती है. इसे त्वचा का कालाजार (पीकेडीएल) भी कहा जाता है. पीकेडीएल का इलाज पूर्ण रूप से किया जा सकता है. इसके लिए लगातार 12 सप्ताह तक दवा का सेवन करना पड़ता है. पीकेडीएल से बचने के लिए मरीजों को कालाजार के इलाज के दौरान दवाओं का कोर्स पूरा करने की सलाह दी जाती है. एनटीडी रोग में कालाजार भी एक प्रमुख रोग : वीडीसीओ पंकज कुमार ने बताया कि जिला में आईआरएस स्प्रे का दोनों चक्र पूरा कर लिया गया है. प्राप्त निर्देश के अनुसार वैसे गांव जहां 2021 से कालाजार के मरीज मिले हैं वहां सघन निगरानी की जा रही है. आशाकर्मियों को इसके लिए निर्देशित किया गया है. उन्होंने बताया कि जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यालय प्रयासरत है कि जिले में कालाजार की पुनरावृत्ति नहीं हो. इसमें आमजनों का सहयोग भी जरुरी है. पंकज कुमार ने बताया कि 2023 में पड़री में पीकेडीएल का एक और साहोपाड़ा में वीएल का एक मरीज मिला था.
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