टेंडर के पांच महीने बाद भी नहीं शुरू हुआ बक्सर-कोईलवर बांध सड़क का काम

शिलान्यास का बोर्ड भी लगा दिया गया है. लेकिन आज तक नहीं हुआ शुरू.

बक्सर. मुख्यमंत्री फरवरी में जब प्रगति यात्रा के दौरान जिले में आये थे, तो बक्सर कोईलवर तटबंध पर 51.72 किलोमीटर को काली करण के लिए 181.26 करोड़ की स्वीकृति दिया था. बाध को काली करण करने के लिए पांच माह पूर्व ही निविदा कि प्रक्रिया पूरा कर लिया गया था. लेकिन निविदा की प्रक्रिया पूरा करने के बाद छह सितंबर को मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शिलान्यास किया था. शिलान्यास का बोर्ड भी लगा दिया गया है. लेकिन आज तक नहीं हुआ शुरू. लेकिन जब प्रभात खबर की टीम देखा तो पाया गया कि तटबंध पर से न तो अस्थायी अतिक्रमण हटाया गया है. वही विभागीय जानकारी के अनुसार अस्थाई अतिक्रमण हटवाने के संबंधित सिओ सिमरी, बक्सर, चककी, ब्रहमपुर के थाना प्रभारी को पंत्राक 918 दिनांक 06 अगस्त 2025 को भेजा गया है उससे पहले भी भेजा गया है. साथ ही साथ विद्युत विभाग को पोल हटाने के लिए पत्रांक 1180 दिनांक 06 अगस्त 2025 को भेजा गया है. जबकि इससे पहले भी विद्युत विभाग को पत्र लिखा गया था. लेकिन न सीओ रुचि ले रहे न ही विद्युत विभाग रुचि दिखा रहा है. इसे में बाढ़ विभाग को काम करना मुश्किल बन रहा है. शिलान्यास के समय एक शिलापट्ट बोर्ड लगाया गया था, जिसे बांध पर देखा भी गया है. लेकिन आज तक न तो कार्य शुरू हुआ है, न अतिक्रमण हटाये गये हैं, न विद्युत विभाग के पोल हटा पाये गये हैं, और न ही उचित तैयारी हुई है. जब प्रभात खबर की टीम ने हाल में तटबंध का दौरा किया तो पाया कि आज तक अस्थाई अतिक्रमण तटबंध के किनारे आज भी अनेक स्थायी व अस्थायी अतिक्रमण मौजूद हैं.वनस्पति, झाड़ी-बरगद आदि पौधों की वृद्धि हुई है, जिन पर नियंत्रण नहीं किया गया. शिलापट्ट बोर्ड शिलान्यास के समय लगाया गया बोर्ड आज भी खड़ा है, पर चारों ओर कार्य की कोई तैयारी नहीं दिखती. भू-गड्ढे एवं जल जमाव बांध की सतह पर गड्ढे बने हुए हैं और जल जमाव नजर आता है. यदि भारी वर्षा हो, तो ये गड्ढे और कटाव को और भड़का सकते हैं. विद्युत पोल कार्य स्थल पर विद्युत विभाग के पोल खड़े हैं, जिससे काम की बाधा बन रही है अभी तक इन्हें हटाया नहीं गया. वह बांध की सतह पर जंगली झाड़ियों का उगना इस बात की ओर इशारा करता है कि वहां महीनों से प्रवर्तन नहीं हुआ है. इससे यह स्पष्ट है कि काम शुरू करने की तैयारी भी नहीं हुई है न अतिक्रमण हटाया गया, न स्थल को समतल या साफ किया गया. विभागीय कार्रवाई व बाधाएं : अतिक्रमण हटाने के पत्र बाढ़ नियंत्रण विभाग ने संबंधित सीओ सिमरी, बक्सर, चककी, ब्रहमपुर व थाना प्रभारी को 06 अगस्त 2025 को अंकित पं 918 के तहत पत्र भेजा था. विभाग का दावा है कि इससे पहले भी ऐसे पत्र भेजे गये हैं. साथ ही साथ विद्युत विभाग को पत्र पोल हटाने के लिए 06 अक्तूबर 2025 को पत्रांक 1180 के तहत पत्र भेजा गया. इसके पहले भी पत्र भेजे गए थे, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. विभागीय सूत्र बताते हैं कि न तो सीओ स्तर पर रुचि दिखायी जा रही है, न ही विद्युत विभाग सक्रिय है. अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई न होने और पोल न हटने की स्थिति में, बाढ़ नियंत्रण विभाग के इंजीनियरों के लिए कार्य करना बहुत कठिन है. बाढ़ विभाग के कार्यशैली पर उठे सवाल : निविदा प्रक्रिया पूरी होने के पांच माह बाद भी नहीं शुरू हुआ काम ऐसे आम जनता विभाग के कार्यशैली पर सवाल खड़ा हो रहा है. सदर प्रखंड प्रमुख प्रतिनिधि उपेंद्र राय ने कहां कि अतिक्रमण एवं पोल नहीं हटने की जिम्मेदारी किसकी है. सावधानी और पूर्व तैयारी क्यों नहीं यदि जमीन जांच, समतलीकरण, अतिक्रमण हटाना आदि प्रारंभिक कदम न लिए गये हों, तो पूरी परियोजना संकट में है. 181 करोड़ की इस बड़ी परियोजना को लेकर सरकार ने स्वीकृति दी, निविदा प्रक्रिया पूरी की और मुख्यमंत्री ने शिलान्यास किया सबकुछ प्रतीत होता है कि योजनाबद्ध तरीके से काम आगे बढ़ेगा. लेकिन पांच माह गुजर जाने के बावजूद काम शून्य हो जाना और हालत यह कि मूलभूत तैयारी ही नहीं हुई यह बड़ी विडंबना है. यदि प्रशासन अतिक्रमण हटाने, पोल हटाने, स्थल समेटने जैसे प्रारंभिक कदम न उठाए, तो परियोजना की देरी और बढ़ सकती है. बाढ़ का मौसम आते ही तटबंध कमजोर हो सकता है और गांव व लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है. बोलो अधिकारी बारिश और बाढ़ आने के कारण मिट्टी का काम नहीं किया जा सकता है. इसलिए काम आज तक काम नहीं शुरू किया गया है. नवंबर माह में काम शुरू कर दिया जायेगा. अस्थायी अतिक्रमण हटाने के संबंधित सभी सीओ और थाना प्रभारी को दे दिया गया है. वहीं विद्युत विभाग को पत्र लिखा गया है. कन्हैया कुमार, कार्यपालक अभियंता, बाढ़ विभाग

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Published by: Amlesh prasad

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