Buxar Girls Marriage Scheme : बक्सर के केसठ प्रखंड के केसठ गांव स्थित मां काली मंदिर परिसर में आयोजित एक बैठक में ग्रामीणों ने समाजसेवा की दिशा में एक बड़ा और सराहनीय फैसला लिया. बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि क्षेत्र के गरीब, असहाय और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों की शादी मंदिर परिसर में कराई जाएगी और इसका पूरा खर्च समाजसेवी राजू दुबे के नेतृत्व में उठाया जाएगा.
बैठक की अध्यक्षता समाजसेवी राजू दुबे ने की, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय लोग मौजूद रहे. इस दौरान मंदिर परिसर में एक प्रेस वार्ता भी आयोजित की गई, जिसमें राजू दुबे ने इस पहल की विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी गरीब परिवार की बेटी की शादी पैसे के अभाव में नहीं रुकेगी और हर संभव सामाजिक सहयोग के जरिए ऐसे परिवारों की मदद की जाएगी.
Buxar News : समाज के सहयोग से आगे बढ़ेगी पहल
राजू दुबे ने कहा कि इस पहल को सफल बनाने के लिए समाज के हर सक्षम व्यक्ति को आगे आना होगा. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे जरूरतमंद परिवारों की मदद के लिए आगे आएं, ताकि अधिक से अधिक बेटियों की शादी सम्मानपूर्वक कराई जा सके. उनका कहना था कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है.
इस योजना के तहत शादी से जुड़े सभी जरूरी खर्च जैसे वस्त्र, भोजन और अन्य व्यवस्थाएं सामाजिक सहयोग से पूरी की जाएंगी. इससे उन परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी, जो आर्थिक तंगी के कारण अपनी बेटियों की शादी को लेकर चिंतित रहते हैं.
Girls Marriage Scheme : मंदिर बनेगा सामाजिक सेवा का केंद्र
बैठक में मौजूद लोगों ने इस पहल का जोरदार समर्थन किया. ग्रामीणों का कहना था कि मां काली मंदिर अब केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं रहेगा, बल्कि यह सामाजिक सेवा और जनकल्याण का केंद्र भी बनेगा. इस पहल से समाज में एकता और सहयोग की भावना को बढ़ावा मिलेगा. मौके पर मौजूद गोपाल उपाध्याय, राजेश पाल, ओमनाथ उपाध्याय, नरेंद्र पाल, अंटू उपाध्याय, वरुण पाल, सुधीर सिंह और रविंद्र पासवान सहित अन्य ग्रामीणों ने इस निर्णय की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए एक प्रेरणादायक कदम बताया.
गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत
ग्रामीणों का मानना है कि इस पहल से उन परिवारों को बड़ी मदद मिलेगी, जो आर्थिक तंगी के कारण अपनी बेटियों की शादी नहीं कर पा रहे हैं. यह कदम न सिर्फ जरूरतमंदों के लिए सहारा बनेगा, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव भी लाएगा.
केसठ गांव की यह पहल मानव सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी का एक बेहतरीन उदाहरण बनकर सामने आई है. अब लोगों की नजर इस बात पर है कि इस मुहिम को कितनी व्यापकता मिलती है और कितने जरूरतमंद परिवारों को इसका लाभ मिल पाता है.
