गंगा खतरे के निशान के पार, बक्सर में हाई अलर्ट; चार अंचलों के आठ गांवों में घुसा बाढ़ का पानी

बक्सर में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर जाने के बाद जिला प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी किया है। डीएम ने आपात बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की।

Buxar News : जिले में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार करने के बाद बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है. गुरुवार को समाहरणालय सभागार में जिलाधिकारी साहिला ने अधिकारियों के साथ आपात बैठक कर बाढ़ से निबटने की तैयारियों की समीक्षा की. उन्होंने सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड में रहने और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने का निर्देश दिया.

चार अंचलों के आठ गांव बाढ़ की चपेट में

बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि जिले के चार अंचलों के आठ गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है. बक्सर अंचल के छोटका नुआंव पंचायत के गोविंदपुर, चौसा अंचल के बनारपुर, ब्रह्मपुर अंचल के उत्तरी नैनीजोर पंचायत के ढाबी और गजाधर डेरा तथा सिमरी अंचल के गंगौली एवं राजपुर परसनपाह पंचायत के श्रीकांत राय, रामदास राय और तवकल राय के डेरा गांव प्रभावित हुए हैं.

बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों के आवागमन और जरूरत के सामान पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से कुल 19 नावों का परिचालन कराया जा रहा है. वहीं, चौसा क्षेत्र में अब तक 80 पॉलीथीन शीट का वितरण किया जा चुका है. प्रशासन ने प्रभावित परिवारों की जरूरत के अनुसार राहत सामग्री उपलब्ध कराने की तैयारी भी रखी है.

बक्सर-कोइलवर तटबंध पर 24 घंटे नजर

गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तटबंधों की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है. जिलाधिकारी ने बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता कन्हैया लाल सिंह को बक्सर-कोइलवर तटबंध की 24 घंटे निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है.

डीएम ने अधिकारियों से कहा कि तटबंध पर कहीं भी कटाव या क्षति की स्थिति उत्पन्न होने पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए. कटाव निरोधक कार्य के लिए आवश्यक संसाधन और तैयारी पहले से रखने का निर्देश दिया गया है, ताकि आपात स्थिति में बिना समय गंवाये काम शुरू किया जा सके.

घाटों पर बैरिकेडिंग, लाल झंडा लगाने का निर्देश

बाढ़ के दौरान हादसों की आशंका को देखते हुए बक्सर नगर क्षेत्र के सभी घाटों का निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया है. डीएम ने घाटों पर आवश्यकतानुसार बैरिकेडिंग कराने और खतरे वाले स्थानों पर लाल झंडा लगाने को कहा है.

प्रशासन ने लोगों से भी नदी के बढ़े जलस्तर को देखते हुए घाटों और नदी किनारे जाने से बचने की अपील की है. खासकर बच्चों को नदी से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है.

ओवरलोडिंग और अवैध नाव परिचालन पर रोक

बाढ़ प्रभावित इलाकों में नावों की आवाजाही बढ़ने के कारण प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर भी सख्ती बरतने का निर्णय लिया है. अनुमंडल पदाधिकारियों को ओवरलोडिंग पर रोक लगाने और अवैध रूप से नावों के परिचालन को तत्काल बंद कराने का निर्देश दिया गया है.

अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि बाढ़ प्रभावित लोगों के आवागमन के दौरान नावों पर सुरक्षा मानकों का पालन हो. किसी भी स्थिति में क्षमता से अधिक लोगों को नाव पर नहीं बैठाया जाये.

अस्पतालों में दवा और डॉक्टरों की उपलब्धता रहे सुनिश्चित

बाढ़ के दौरान स्वास्थ्य संबंधी समस्या उत्पन्न होने की आशंका को देखते हुए जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन को सभी अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में दवाओं और डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है.

सिमरी और ब्रह्मपुर क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित लोगों तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने के लिए बोट एम्बुलेंस चलाने की व्यवस्था करने को कहा गया है. इससे पानी से घिरे इलाकों में किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने या आपात स्थिति उत्पन्न होने पर उसे समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जा सकेगी.

बिजली के ढीले तारों की होगी जांच

बाढ़ के दौरान जलजमाव वाले क्षेत्रों में बिजली से होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए बिजली विभाग को भी विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया है. विभाग को क्षेत्र में ढीले तारों और बिजली के खंभों की स्थिति की जांच करने को कहा गया है.

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जलजमाव वाले इलाकों में बिजली व्यवस्था से जुड़ी किसी भी समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की जाये, ताकि करंट लगने जैसी घटनाओं को रोका जा सके.

शुद्ध पेयजल और पशु चारे की व्यवस्था का निर्देश

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल संकट नहीं हो, इसके लिए पीएचईडी को शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है. लोगों को दूषित पानी के इस्तेमाल से बचाने और आवश्यकतानुसार वैकल्पिक पेयजल उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है.

वहीं, पशुपालन विभाग को प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था करने और मोबाइल वेटरिनरी यूनिट को तैयार रखने का निर्देश दिया गया है. बाढ़ के कारण पशुओं को भी परेशानी नहीं हो, इसके लिए विभाग को संवेदनशील गांवों पर विशेष नजर रखने को कहा गया है.

जरूरत पड़ने पर शुरू होंगे आश्रय स्थल और सामुदायिक रसोई

जिला प्रशासन ने कहा है कि गंगा नदी के जलस्तर और बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. परिस्थितियां बिगड़ने पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए आश्रय स्थल शुरू किये जायेंगे. साथ ही जरूरत के अनुसार सामुदायिक रसोई केंद्र भी संचालित किये जायेंगे.

डीएम ने सभी अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. प्रशासन का फोकस फिलहाल प्रभावित गांवों में लोगों की सुरक्षा, आवागमन, स्वास्थ्य, पेयजल और राहत व्यवस्था को सुचारु रखने पर है.

1.समीक्षा करती जिलाधिकारी सहिला 2.जायजा लेते अधिकारी | Prabhat Khabar Network

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By ओंकार नाथ मिश्रा

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >