Buxar Court News : बक्सर औद्योगिक थाना कांड संख्या 51/2011 और सेशन ट्रायल 21/2012 में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय की अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाया है. माननीय न्यायालय ने जानलेवा हमले के मामले में नामजद आरोपी वीरेंद्र कुमार चौबे, हरेंद्र कुमार चौबे एवं राजेंद्र कुमार चौबे को दोषी पाते हुए IPC की विभिन्न धाराओं के तहत कड़ी सजा सुनाई है.
विभिन्न धाराओं में सजा
इस आशय की आधिकारिक जानकारी देते हुए अपर लोक अभियोजक (APP) विनोद कुमार सिंह ने बताया कि अदालत ने तीनों अभियुक्तों को धारा 307 के तहत 8-8 वर्षों के सश्रम कारावास और 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है. इसके साथ ही धारा 324 के तहत 2-2 वर्षों का कारावास और 10-10 रुपये का जुर्माना तथा धारा 323 के तहत 6-6 माह का कारावास एवं 500-500 रुपये जुर्माने की सजा मुकर्रर की गई है. सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी.
जमीन विवाद में बक्सर कोर्ट से लौटने के दौरान किया था जानलेवा हमला
घटना की पृष्ठभूमि की जानकारी देते हुए अपर लोक अभियोजक ने बताया कि यह पूरा मामला 6 जून 2011 का है. उस दिन सूचक प्रदुमन चौबे बक्सर न्यायालय से अपना कार्य निपटाकर अपने घर अहिरौली वापस लौट रहे थे. इसी दौरान रास्ते में सारिमपुर सोनार बगीचा के पास पहले से घात लगाए बैठे तीनों अभियुक्तों ने उन पर अचानक जानलेवा हमला कर दिया था.
मरा समझ छोड़ दिया था
इस बर्बर हमले में प्रदुमन चौबे गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे. हमलावर अभियुक्त उन्हें मृत समझकर मौके पर ही फेंककर फरार हो गए थे. घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तुरंत सदर अस्पताल बक्सर में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था, लेकिन उनकी अत्यंत गंभीर चिंताजनक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए बनारस (वाराणसी) रेफर कर दिया था, जहां वे महीनों तक जिंदगी और मौत के बीच जूझते हुए इलाजरत रहे थे. इस घटना का मुख्य कारण पुराना जमीन विवाद बताया गया था.
कोर्ट के फैसले के बाद बोले पीड़ित अधिवक्ता प्रदुमन चौबे- ‘आज न्याय की जीत हुई है’
माननीय न्यायालय द्वारा गुरुवार को सजा के बिंदु पर यह अंतिम फैसला सुनाया गया. बताते चलें कि पिछले दिनों ही सुनवाई पूरी होने के बाद तीनों अभियुक्तों को कोर्ट ने दोषी करार दे दिया था, जिसके तुरंत बाद उन्हें हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया था. दोषी ठहराए जाने के बाद सजा की अवधि पर फैसला सुरक्षित रख लिया गया था, जिसे गुरुवार को अदालत ने सुनाया. इस ऐतिहासिक फैसले के बाद पीड़ित सूचक अधिवक्ता प्रदुमन चौबे ने बताया कि न्याय की जीत हुई है.
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