बक्सर: चुरामनपुर की मुख्य सड़क बनी ‘तालाब’, 5 हजार आबादी परेशान; ग्रामीण बोले- अब यहीं करेंगे धान की रोपनी

बक्सर के चुरामनपुर गांव में जलजमाव से मुख्य सड़क तालाब में बदली। गंदे पानी और कीचड़ से 5000 की आबादी प्रभावित, प्रशासन से निकासी की मांग।

Buxar News : चुरामनपुर गांव के प्रवेश द्वार पर जलजमाव ने 5 हजार से अधिक आबादी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. नालियों के गंदे पानी की निकासी नहीं होने के कारण गांव की मुख्य सड़क करीब 200 मीटर तक तालाब में तब्दील हो गयी है. कीचड़ और सड़ांध के बीच ग्रामीणों को रोजाना इसी रास्ते से गुजरना पड़ रहा है. स्थिति इतनी खराब है कि एक वाहन के आने पर दूसरे वाहन को पानी में रास्ता बनाने के लिए इंतजार करना पड़ता है.

एनएच-922 से गांव पहुंचते ही शुरू हो जाता है ‘सड़क रूपी तालाब’

ग्रामीणों के अनुसार, बक्सर-पटना एनएच-922 से गांव की ओर मुड़ते ही करीब 200 मीटर तक जलजमाव का सामना करना पड़ता है. लंबे समय से बनी इस समस्या का अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है. गांव के घरों से निकलने वाला नाली का पानी सीधे मुख्य सड़क पर गिर रहा है. लगातार पानी जमा रहने से सड़क कई जगह क्षतिग्रस्त हो चुकी है और कीचड़ व सड़ांध के कारण राहगीरों की परेशानी बढ़ गयी है.

बच्चों से बुजुर्गों तक की राह मुश्किल, फिसलने का बना खतरा

जलजमाव के कारण पैदल चलना तो दूर, दोपहिया वाहन निकालना भी मुश्किल हो गया है. बारिश के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है. स्कूल आने-जाने वाले बच्चों के कपड़े गंदे हो जाते हैं और कई बार फिसलकर गिरने की स्थिति भी बनती है. बुजुर्गों के लिए भी यह रास्ता जोखिम भरा हो गया है. यही सड़क दरहपुर और अर्जुनपुर आने-जाने का प्रमुख मार्ग भी है.

सड़क बन गयी, लेकिन 200 से 300 गज का हिस्सा रह गया अधूरा

ग्रामीणों ने बताया कि कुछ समय पहले ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से शिव मंदिर से गांव के अंदर तक सड़क निर्माण कराया गया था. इससे ग्रामीणों को राहत मिली थी. लेकिन शिव मंदिर से बक्सर-पटना फोरलेन तक करीब 200 से 300 गज का हिस्सा अब भी बदहाल है. यही हिस्सा गांव का मुख्य प्रवेश द्वार है और सबसे अधिक जलजमाव भी इसी जगह होता है.

नाली नहीं बनी तो सड़क पर ही मछली पालन और धान की रोपनी करेंगे ग्रामीण

समस्या का समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में अब आक्रोश बढ़ने लगा है. ग्रामीणों ने कहा कि यदि प्रशासन ने जल्द नाली और पानी निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं की, तो वे सड़क पर बने तालाबनुमा गड्ढे में मछली पालन और धान की रोपनी करेंगे. उनका कहना है कि इस अनोखे विरोध के जरिए सोए हुए प्रशासन का ध्यान समस्या की ओर आकर्षित किया जाएगा.

स्थायी जल निकासी और सड़क मरम्मत की मांग

ग्रामीण राम नारायण सिंह, बिहारी सिंह, विनोद सिंह, दीपू पांडेय, रविकांत पांडेय और मनोज वर्मा ने जिला प्रशासन से अविलंब जल निकासी की स्थायी व्यवस्था कराने की मांग की है. ग्रामीणों ने क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत कराने की भी मांग की, ताकि गांव की हजारों की आबादी को रोजाना की परेशानी से राहत मिल सके.


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By आशुतोष सिंह

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