Bihar News:(संतोष कांत) बक्सर जिले के ब्रह्मपुर प्रखंड और रघुनाथपुर नगर पंचायत क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों और अवैध अस्पतालों का समानांतर साम्राज्य तेजी से फैलता जा रहा है. क्षेत्र में बिना वैध मेडिकल डिग्री, बिना प्रशासनिक अनुमति और बिना बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के दो दर्जन से अधिक अस्पताल, नर्सिंग होम और डायग्नोस्टिक सेंटर संचालित किए जा रहे हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि ये कथित अस्पताल मरीजों के इलाज के नाम पर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं. सर्दी-खांसी और सामान्य इलाज तक सीमित रहने वाले झोलाछाप डॉक्टर अब सिजेरियन डिलीवरी, अपेंडिक्स, हर्निया और हाइड्रोसील जैसे जटिल ऑपरेशन भी कर रहे हैं.
कंपाउंडर से बने ‘सर्जन’
सूत्रों के अनुसार, इन अवैध अस्पतालों को चलाने वाले अधिकांश लोग पहले बड़े शहरों या निजी क्लीनिकों में कंपाउंडर, ड्रेसर या वार्ड बॉय के रूप में काम करते थे. वहीं से सामान्य चिकित्सकीय जानकारी लेकर लौटे ये लोग अब खुद को सर्जन और विशेषज्ञ डॉक्टर बताकर इलाज कर रहे हैं. इनके पास न तो नेशनल मेडिकल कमीशन का पंजीकरण है और न ही बिहार क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत कोई वैध लाइसेंस. इसके बावजूद ब्रह्मपुर बाजार, रघुनाथपुर स्टेशन रोड और आसपास के क्षेत्रों में बड़े-बड़े बोर्ड लगाकर अस्पताल संचालित किए जा रहे हैं.
ऑपरेशन थियेटर के नाम पर संक्रमण का खतरा
इन अवैध अस्पतालों में ऑपरेशन थियेटर के नाम पर छोटे कमरों में बिना साफ-सफाई और बिना आधुनिक उपकरणों के ऑपरेशन किए जा रहे हैं. कई केंद्रों पर ऑक्सीजन, वेंटिलेटर और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ तक उपलब्ध नहीं हैं. आरोप है कि झोलाछाप डॉक्टर खुद ही मरीज को बेहोशी का इंजेक्शन देकर ऑपरेशन करते हैं. कई मामलों में हालत बिगड़ने पर मरीजों को बनारस, बक्सर या पटना रेफर कर दिया जाता है, जहां पहुंचने से पहले ही कई मरीज दम तोड़ देते हैं.
दलालों और कमीशन का नेटवर्क सक्रिय
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन अस्पतालों तक मरीज पहुंचाने के लिए दलालों और कुछ आशा कार्यकर्ताओं का नेटवर्क सक्रिय है. गरीब और अशिक्षित परिवारों को कम खर्च में इलाज का झांसा देकर इन केंद्रों तक लाया जाता है. इसके अलावा अस्पतालों से निकलने वाले बायो-मेडिकल वेस्ट को खुले में फेंका जा रहा है, जिससे संक्रमण और महामारी फैलने का खतरा बना हुआ है.
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं. लोगों का आरोप है कि कथित ‘सुविधा शुल्क’ और मिलीभगत के कारण इन अवैध अस्पतालों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है. हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस मामले में अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. स्थानीय लोगों ने अवैध अस्पतालों की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.
