बक्सर: उनवांस में गूंजा आचार्य शिवपूजन सहाय का साहित्य, स्मृति पर्व में याद किया गया हिंदी नवजागरण में योगदान

बक्सर के उनवांस में आचार्य शिवपूजन सहाय स्मृति पर्व मनाया गया। वक्ताओं ने हिंदी साहित्य और नवजागरण में उनके अमूल्य योगदान को याद किया।

Buxar News : हिंदी साहित्य और साहित्यिक पत्रकारिता के महान हस्ताक्षर आचार्य शिवपूजन सहाय की स्मृति रविवार को उनके पैतृक गांव उनवांस में साहित्यिक माहौल के बीच जीवंत हो उठी. यहां ‘आचार्य शिवपूजन सहाय स्मृति पर्व’ का आयोजन किया गया. समारोह का आयोजन श्री विमल कुमार, ‘स्त्री दर्पण’, नई दिल्ली की ओर से किया गया. कार्यक्रम में आचार्य के साहित्य, हिंदी नवजागरण और साहित्यिक पत्रकारिता में उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा हुई.

प्रतिमा पर पुष्पांजलि के बाद हुआ दीप प्रज्ज्वलन

समारोह का शुभारंभ आचार्य शिवपूजन सहाय की प्रतिमा पर पुष्पांजलि और माल्यार्पण से हुआ. इसके बाद दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गयी. बच्चों ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिनंदन किया. कार्यक्रम में अतिथियों को अंगवस्त्र और बुके देकर सम्मानित किया गया.

‘युगपुरुष थे आचार्य शिवपूजन सहाय’

मुख्य अतिथि महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय, बक्सर के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) कृष्णा कान्त सिंह ने कहा कि आचार्य शिवपूजन सहाय युगपुरुष थे. उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से हिंदी भाषा को समृद्ध किया और हिंदी नवजागरण को नई दिशा दी. उनका साहित्य भारतीय समाज और लोकजीवन से गहराई से जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि आचार्य की साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समाज की जिम्मेदारी है.

साहित्यिक पत्रकारिता में योगदान को किया याद

मुख्य वक्ता डॉ. पंकज कुमार चौधरी, विभागाध्यक्ष, स्नातकोत्तर हिंदी विभाग ने आचार्य शिवपूजन सहाय के जीवन और साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डाला. उन्होंने हिंदी भाषा के विकास, साहित्यिक पत्रकारिता और हिंदी नवजागरण में आचार्य की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया.

साहित्यिक विरासत को बचाने की पहल

विशिष्ट अतिथि डॉ. वैरागी प्रभाष कुमार चतुर्वेदी और उनवांस के मुखिया सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी, शिक्षाविद, ग्रामीण और छात्र-छात्राएं समारोह में मौजूद रहे. वक्ताओं ने कहा कि आचार्य के पैतृक गांव में स्मृति पर्व का आयोजन उनकी साहित्यिक विरासत को जीवंत रखने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है. ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को हिंदी साहित्य के महान रचनाकारों के जीवन और योगदान से परिचित कराने में मदद मिलेगी.

कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय के इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. नवीन शंकर पाठक ने किया.


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By मृत्युंजय सिंह

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