उमरपुर और मझरिया के बीच चल रहा है कटाव निरोधक कार्य
बक्सर : जिले के गंगा किनारे बसने वाले गांवों में बाढ़ के कारण होने वाले कटाव को रोकने के लिए कराये जा रहे कटाव निरोधी कार्य में गड़बड़ी का मामला तूल पकड़ने लगा है. प्रभात खबर में प्रमुखता से खबर छपने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने प्रतिक्रियाएं दी. क्षेत्र के गंगा किनारे बसने वाले खुटहा पंचायत के विभिन्न गांवों अर्जुनपुर, केशवपुर, राजपुर, मझरियां व उमरपुर के अलावा अन्य गांवों के लोगों ने शनिवार को मुखर होकर अपनी बातें रखीं. लोगों का कहना है कि प्रत्येक वर्ष बाढ़ से इस क्षेत्र की जनता तंगो-तबाह होती है.
लेकिन, इस पर कभी भी राज्य सरकार या केंद्र सरकार ध्यान नहीं देती. स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इस मामले में शिथिलता बरतते हैं. जिससे यह समस्या निदान होने के बजाय बढ़ती जा रही है. लोगों ने कहा कि बरसात आने के दो तीन माह पहले से ही पलायन की तैयारियां शुरू करनी पड़ती है. पूरी बरसात के तीन चार महीने तक बाढ़ की भयावहता से दो-चार होने वाले ग्रामीण बताते हैं कि
हर बार उनकी जानमाल की हानि होती है. लेकिन, सिर्फ आश्वासनों की घुट्टी पिलाई जाती है. हर बार बाढ़ से हुए कटाव के बाद सरकार की तंद्रा टूटती है. तब, बाढ़ निरोधी कार्य की योजना बनायी जाती है. कार्य के नाम पर खानापूरी कर हर वर्ष करोडो रुपये का वारा-न्यारा कर लिया जाता है. लेकिन, कटाव से बचने के जो कोरा उपाय किये जाते हैं वो नाकाफी साबित होते हैं.
सर्वप्रथम अटल बिहारी बाजपेयी ने की थी घोषणा : जानकारों की मानें तो बाढ़ से इस इलाके के लोग वर्षों से प्रभावित हैं. तत्कालीन सांसद लालमुनि चौबे का ग्रामीणों ने विरोध किया था. तब चुनाव प्रचार के लिए आये तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी बक्सर आये थे. सर्वप्रथम उन्होंने ही गंगा के कटाव से बचाने के लिए बांध बनाने व कटाव निरोधी कार्य कराने की घोषणा की थी. तब कार्य भी कराया गया. लेकिन, हर साल अब कटाव निरोधी कार्य में बंदरबाट होता रहा है.
निगरानी से करायेंगे जांच, करेंगे जनांदोलन
प्रभात खबर में शनिवार को ‘कटाव निरोधी कार्य में भारी गड़बड़ी’ शीर्षक से खबर छपने के बाद बिहार प्रदेश कांग्रेस के पूर्व संगठन सचिव टीएन चौबे ने प्रेस बयान जारी किया. उन्होंने बताया कि मझरियां व उमरपुर के बीच गरिमा कंस्ट्रक्शन द्वारा कार्य कराया जा रहा है. जिसकी कुल प्राक्कलन राशि 5 करोड़ रुपये है. अभियंताओं द्वारा प्राक्कलन की अनदेखी कर कार्य कराया जा रहा है. बाढ़ का समय आने पर अभियंताओं को जेब भरने की चिंता सताने लगती है.
कार्य में लापरवाही की शिकायत अभियंता प्रमुख से जब की गयी. तो उनके जांच में भी बड़े पैमाने पर गाबड़ी सामने आयी थी. लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं की गयी. अभियंताओं ने पैसे व पैरवी के बल पर अनियमितता होने के बावजूद अधिकारियों की मिलीभगत से खुद को बचा लिया. इस मामले को लेकर उन्होंने कहा कि निगरानी से इसकी जांच करायी जायेगी. ताकि हर साल आने वाली बाढ़ से प्रभावित इलाके में कटाव निरोधी कार्य में लूट-खसोट पर रोक लगायी जा सके. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर इसके लिए जन आंदोलन किया जायेगा.
क्या कहते हैं लोग
पहले बालू के बोरे व पत्थर बांध कर कटाव रोकने का कार्य किया गया था. लेकिन, हाल में किये जा रहे कार्यों में गुणवत्ता का ख्याल नहीं रखा जा रहा है.
सुशील राय, उमरपुर
बाढ़ के समय लोगों की जान सांसत में पड़ जाती है. पिछले साल भी मझरियां और उमरपुर के बीच कटाव रोकने का काम हुआ था. जिसमें लूट-खसोट मचा था. लेकिन, शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं कि जाती है.
विवेक सिंह , मझरियां निवासी
समुचित उपाय नहीं होने से जान-माल का खतरा बना हुआ है. गंगा के तटवर्तीय इलाके में बाढ़ का खतरा अभी से ही मंडराने लगा है. लेकिन राज्य सरकार के अनदेखी से अभियंता मनमानी कर रहे हैं.
राहुल आनंद, समाजसेवी
जितनी तत्परता ओडीएफ को लेकर प्रशासन ने दिखाई और मॉनीटरिंग किया है. ऐसे संवेदनशील मामलों में प्रशासनिक तत्परता की जरूरत है. ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न रहे.
सतीश चंद्र त्रिपाठी
