ब्लड बैंक में 100 यूनिट ब्लड खराब

कुव्यवस्था. बचायी जा सकती थी 50 लोगों की जान, नहीं दिया ध्यान कई महीने से खाली है मेडिकल अफसर का पद बक्सर. एक तरफ कहीं वक्त पर खून न मिलने से मरीज दम तोड़ देते हैं, कहीं निजी ब्लड बैंक से खून खरीदने के लिये महिलाएं अपने जेवर बेच देती हैं, तो कहीं डोनर की […]

कुव्यवस्था. बचायी जा सकती थी 50 लोगों की जान, नहीं दिया ध्यान

कई महीने से खाली है मेडिकल अफसर का पद
बक्सर. एक तरफ कहीं वक्त पर खून न मिलने से मरीज दम तोड़ देते हैं, कहीं निजी ब्लड बैंक से खून खरीदने के लिये महिलाएं अपने जेवर बेच देती हैं, तो कहीं डोनर की तलाश में रिश्तेदारों के सामने गिड़गड़ाना पड़ता है. रक्तदान महादान कहा गया है, लेकिन अगर आपको पता चले कि आपका दान किया गया रक्त ही खराब हो गया है, तो आप क्या कहेंगे? जो सच्चाई सामने आयी है वह आपको सोचने पर मजबूर कर देगी कि क्या ब्लड बैंक रक्त आपूर्ति के मामले में संवेदनशून्य बने हुए हैं. बक्सर के पुराने सदर अस्पताल में संचालित रेडक्रॉस के ब्लड बैंक में पिछले छह माह में करीब सौ बोतल खून एक्सपायर हो गया. उसे किसी इनसान के जिस्म में चढ़ाया नहीं जा सकता.
सुविधाओं के अभाव में 35 यूनिट बरबाद : नियमों के मुताबिक खून को 35 दिनों के भीतर इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके बाद यह एक्सपायर हो जाता है. इसका मुख्य कारण खून के रख-रखाव के लिए सुविधाओं का अभाव होना है. इसके अलावा रक्तदान से पहले रक्तदाताओं की जांच न होने से भी 35 यूनिट खून बरबाद हुआ. वर्तमान में खून लेने के बाद इसकी जांच की व्यवस्था है. अगर खून में एचआइवी, एचसीवी, वीडीआरएल, एचबीएजी या मलेरिया में कुछ भी पॉजिटिव पाया गया, तो खून बेकार हो जाता है.
एक्पायरी का कारण अस्पतालों के बीच संवाद का अभाव
ब्लड एक्सपायरी के पीछे के कारणों में एक ब्लड बैंक से दूसरे ब्लड बैंक के बीच संवाद की कमी भी है. कई बार ऐसा होता है, जब एक हॉस्पिटल में ब्लड की कमी होती है. उसी समय दूसरे हॉस्पिटल में ब्लड रहता है. लेकिन हॉस्पिटल के बीच उचित संवाद न होने के कारण कई बार ब्लड रखे-रखे एक्सपायर हो जाता है. एक्सपर्ट के अनुसार किसी भी हॉस्पिटल में जब जमा किये गये ब्लड की अवधि 25 दिन से अधिक होने लगे, तो हॉस्पिटल को दूसरे हॉस्पिटल से संपर्क कर उसे भेज देना चाहिए.
जरूरतमंदों को बिचौलियों का सहारा : हम रेडक्रॉस के ब्लड बैंक को अकेले दोषी नहीं ठहरा सकते. यह दोष व्यवस्था का है. स्वास्थ्य महकमा, रेडक्राॅस सोसाइटी और नागरिक सुरक्षा कोर की मदद से समय-समय पर रक्तदान शिविर आयोजित तो करते हैं, लेकिन इन कैंपों में संग्रह किया गया खून सरकारी ब्लड बैंकों में डंप कर दिया जाता है. पहले भी ऐसे आरोप लगते रहे हैं कि सरकारी ब्लड बैंकों से खून लेने के लिए जरूरतमंद तीमारदारों को दलालों और बिचौलियों की सेवाएं लेनी पड़ती हैं या फिर ऊंची कीमत पर निजी ब्लड बैंकों से खून खरीदना पड़ता है. अब यह पता चला है कि सरकारी ब्लड बैंकों में खून की खपत गिरने के कारण उसे फेंकना तक पड़ रहा है. आंकड़ों पर गौर करें तो मार्च, अप्रैल व मई महीने में करीब 30 यूनिट रक्त बरबाद हो गया.
35 नहीं 12 यूनिट हुए बरबाद : अजय
ब्लडबैंक में 35 यूनिट से ज्यादा रक्त तीन महीने में बरबाद हो गया. लेकिन, टेक्निशियन अजय कुमार यह मानने को तैयार नहीं हैं. उनका कहना है कि रक्तदान शिविर के माध्यम से एकत्रित किया गया ब्लड रेडक्रॉस के ब्लड बैंक में रखा जाता है. ब्लड लेने के बाद उसके जांच में कोई बीमारी होने या कोई खराबी होने की स्थिति में उसे खराब पड़े फ्रिज में रख दिया जाता है. पिछले तीन महीने में 12 यूनिट ब्लड खराब हुआ है.
एक्सपायर होने से पूर्व भेजा जाता है पटना : रेडक्रॉस के सचिव श्रवण तिवारी की मानें तो निगेटिव ब्लड रखना जरूरी होता है. लेकिन, इसकी जरूरत कम पड़ती है. समय रहते पीएमसीएच या रेडक्रॉस को भेजने की व्यवस्था है. हाल ही में 36 यूनिट ब्लड पटना भेजा गया था. पिछले कई महीने से मेडिकल अफसर का पद रिक्त होने के कारण एक्सपायर ब्लड को बरबाद नहीं किया जा सका है.

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