सतर्कता. संवेदनशील रहा है बक्सर का न्यायालय, पहले भी हुई हैं कई घटनाएं
चार जवानों के भरोसे कोर्ट की सुरक्षा बक्सर व्यवहार न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद नहीं माना जा सकता है. यहां जब भी अपराधियों ने चाहा घटनाओं को अंजाम दिया. न्यायालय में सुरक्षा को लेकर पूर्व में लगाये गये मेटल डिक्टेक्टर से युक्त दरवाजे को अब हटा लिया गया है. ऐसे में दिन भर लोग […]
चार जवानों के भरोसे कोर्ट की सुरक्षा
बक्सर व्यवहार न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद नहीं माना जा सकता है. यहां जब भी अपराधियों ने चाहा घटनाओं को अंजाम दिया. न्यायालय में सुरक्षा को लेकर पूर्व में लगाये गये मेटल डिक्टेक्टर से युक्त दरवाजे को अब हटा लिया गया है. ऐसे में दिन भर लोग न्यायालय परिसर में आते व जाते रहते हैं.
हालांकि सुरक्षा के लिहाज से व्यक्तिगत वाहनों को दरवाजे पर ही रोक दिया जाता है. लेकिन परिसर में दूर दराज से आने वाले सैकड़ों लोग बिना किसी रोकटोक के प्रवेश कर जाते हैं. ऐसे में बिना मेटल डिक्टेक्टर के अगर कोई अपराधी प्रवृत्ति का व्यक्ति न्यायालय परिसर में घुस जाय तो कोई आश्चर्य नहीं.
मुख्य द्वार पर बने हाजत से न्यायालय तक वैसे तो अभियुक्तों को हथकडि़यों में लाया जाता है, लेकिन यह भी देखा जाता है कि रास्ते में उनसे परिचित लोग बात करते हुए आगे बढ़ते रहते हैं. अपराध की घटनाओं को चिह्नित करने के लिए न्यायालय में 8 सीसी टीवी कैमरे लगाये गये थे, जिसे बंदरों ने तोड़ दिया है. यह भी देखने को मिलता है कि अपराधियों के वाहन जब परिसर में आते हैं तो उनके परिचित आसपास मंडराने लगते हैं. अगर किसी षड्यंत्र को अंजाम दिया जाय तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी.
कई कुख्यात पेशी के लिए आते हैं न्यायालय में
हवलदार को गोली मार फरार हुआ था शेरू
बक्सर, कोर्ट : 104 वर्ष पुराने बक्सर के व्यवहार न्यायालय में प्रतिदिन लगभग 100 कैदियों की पेशी होती है. इसमें लगभग 25 कैदी खतरनाक किस्म के हैं. पर सुरक्षा के नाम पर यहां किसी प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं है. इन कैदियों पर कई हत्याएं, रंगदारी, लूट एवं फिरौती के लिए अपहरण जैसे संगीन मामले दर्ज हैं. पूर्व में सुरक्षा के कारणों से बक्सर सेंट्रल जेल में बंद कुख्यात कैदी शेरू सिंह को भागलपुर जेल में शिफ्ट किया गया था.
फिलवक्त न्यायिक प्रक्रिया के चलते उसे बक्सर जेल में रखा गया है. न्यायालय ने पिछले दो-तीन वर्षों के भीतर कई बड़ी घटनाएं हुईं, जिसके बाद सुरक्षा अत्यंत कड़ी कर दी गयी. लेकिन समय के साथ धीरे-धीरे फिर सुरक्षा व्यवस्था सामान्य कर दी गयी, जो चिंता का विषय है. जैसे ही बिहार में न्यायालय संबंधित कोई घटनाएं होती हैं सुरक्षा व्यवस्था मुस्तैदी पर दिखती है.
हवलदार को गोली मारकर कोर्ट से फरार हुआ था शेरू : कुख्यात अपराधी शेरू सिंह ने दिसंबर 2013 में फिल्मी अंदाज में सुरक्षा कर्मी को गोली मार कर फरार हो गया था. उस समय कड़ाके की ठंड पड़ रही थी. पहली मंजिल पर बने न्यायालय में हाजिरी देकर शेरू जब नीचे उतरा तो पुलिस कर्मियों से पेशाब खाने तक ले जाने को कहा.
उसको भगाने के लिए अपराधियों ने पूरी तैयारी कर रखी थी तथा इसकी भनक किसी को नहीं लगी थी. इससे पूर्व लोडेड हथियार एवं मिर्च-पाउडर रखा हुआ था, जिसका इस्तेमाल करते हुए पहले सुरक्षा कर्मियों की आंखों में मिर्च पाउडर झोंक कर भागने का प्रयास किया. उसे रोक रहे सुरक्षा कर्मी को गोली मार चहारदीवारी फांद कर भाग निकला था. इस घटना से सुरक्षा की कितनी बड़ी कमजोरी मानी जाय क्योंकि जहां से दीवार को फांदना था वहां पूर्व में ईंट को रख कर सीढ़ियों का रूप दिया गया था, ताकि गोली मारने के बाद अभियुक्त आसानी से दीवार फांद सके. लेकिन इतने बड़े षड्यंत्र की भनक किसी को नहीं लगी थी.
नहीं है पहचान पत्र, ड्रेस कोड की भी है कमी : न्यायालय परिसर के ठीक बगल में बने समाहरणालय में आने व जाने वाले सभी कर्मचारी एवं अधिकारी पहचान पत्र लगाये रहते हैं. यहां तक कि जिलाधिकारी भी बिना पहचान पत्र के किसी दिन नहीं दिखते हैं. वहीं न्यायालय में कार्यरत कर्मचारियों को पहचान पत्र की व्यवस्था नहीं होने के कारण कर्मचारी के नाम पर किसी भी व्यक्ति को प्रवेश पाने की संभावना बनी रहती है.
यहां तक कि कुछ अधिवक्ता भी ड्रेस कोड का इस्तेमाल नहीं करते हैं, जिसके कारण न्यायालय के मुख्य द्वार पर खड़े सुरक्षा कर्मियों के साथ प्रतिदिन तू-तू-मैं-मैं होती रहती है.