प्यास बुझाने के लिए भटकते हैं शिक्षक
डुमरांव : भले नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार पेयजल को लेकर चापाकल लगाने के लिए तत्पर है़ लेकिन, प्रखंड संकुल संसाधन केंद्र परिसर में लगेे चापाकल महीनों से गंदा पानी दे रहा है, जिससे पेयजल की समस्या उत्पन्न होने से बीआरसी में कार्यरत कर्मी, विद्यालय के शिक्षक व प्रधानाध्यापक अपनी प्यास बुझाने को लेकर दर-दर भटकते दिखते है़ं सोमवार को गुरु-गोष्ठी में पहुंचे प्रखंड क्षेत्र के सैकड़ों प्राथमिक व मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक उपस्थित रहे.
तपती धूप व उमस भरी गरमी के बीच उपस्थित प्रधानाध्यापकों को प्यास लगी, तो प्यास बुझाने को लेकर उपस्थित गुरुजन दर-दर भटकते दिखे. बीआरसी परिसर बाहर आसपास कोई दुकान भी नहीं है़ सीधे प्रखंड मुख्यालय या फिर दूकान पर रवाना होना पड़ता है, जिससे उनकों काफी कठिनाइओं का सामना करना पडता है़
प्रधानाध्यापक इंद्रेश मिश्रा, संजय सिंह, शैलेंद्र पांडेय, श्रीकांत सिंह, कमलेश सिंह, भस्माकर दूबे कहते हैं कि प्रखंड संकुल संसाधन केंद्र विद्यालयों में पेयजल की समस्या से निजात को लेकर चापाकल लगाने का निर्देश देता है, लेकिन बीआरसी में पेयजल की समस्या आश्चर्यजनक बात है़ प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी विजय कुमार ने कहा कि सच्चाई है कि पेयजल समस्या संकुल संसाधन केंद्र में है, लेकिन इस तरह की कोई योजना नहीं है कि चापाकल लगाया जाये. संकुल संसाधन परिसर में उपस्थित डॉ प्रमोद कुमार सिंह, कर्मी दिनेश कुमार कहते हैं कि पेयजल को लेकर बाहर से पानी लेकर रखा जाता है, जिससे उपस्थित अधिकारी व कर्मी की अपनी प्यास बुझाते हैं.
छलावा साबित हुई नलकूप जलापूर्ति योजना : ब्रह्मपुर. प्रखंड के दक्षिणी छोर पर स्थित एकरासी पंचायत के दो गांव घनश्यामपुर एवं शुक्लपुरा में तीन साल पहले लाखों रुपये की लागत से नलकूप योजना के तहत पानी सप्लाइ की योजना बनी थी,लेकिन इस योजना के द्वारा एक बूंद भी पानी ग्रामवासियों को नसीब नहीं हुआ़ कारण की जिस बोरिंस से पानी सप्लाइ की जानी थी, उसका ट्रांसफॉर्मर वर्षों से जला पड़ा है़ दूसरे नलकूप का मोटर खराब है, जो आज तक नहीं बन पाया़ ग्रामीणों ने बताया कि इसको ठीक करने के लिए कई बार अधिकारियों से गुहार लगायी गयी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई़ पानी का लेवल नीचे चले जाने से गांव के अधिकांश चापाकल बंद हो गये है़ं
