भूगर्भीय जल स्तर पांच से 10 मीटर गिरा नीचे

गरमी आते ही भूगर्भ जलस्तर के नीचे चले जाने से जिले में गंभीर जल संकट पैदा हो गया है. पांच से 10 मीटर तक पानी का लेयर नीचे चला गया है, जिसके कारण सैकड़ों चापाकल सूख गये हैं. चापाकल गाड़ने में भी विभाग ने कुछ गड़बड़ी की है. निर्धारित गहराई तक चापाकल को नहीं गाड़ा […]

गरमी आते ही भूगर्भ जलस्तर के नीचे चले जाने से जिले में गंभीर जल संकट पैदा हो गया है. पांच से 10 मीटर तक पानी का लेयर नीचे चला गया है, जिसके कारण सैकड़ों चापाकल सूख गये हैं.

चापाकल गाड़ने में भी विभाग ने कुछ गड़बड़ी की है. निर्धारित गहराई तक चापाकल को नहीं गाड़ा गया, जिससे भी चापाकल ने पानी देना बंद कर दिया. बक्सर जिले के लगभग सभी प्रखंडों में पानी का लेयर नीचे चला गया है.

बक्सर : अप्रैल माह में ही जेठ का एहसास करा रहे मौसम के मिजाज से इस साल ज्यादा गरमी पड़ने की आशंका बलवती होती जा रही है. वन और पर्यावरण को पहुुंचाई जा रही क्षति के चलते ग्लोबल वार्मिंग की स्थिति उत्पन्न होने तथा अंधाधुंध जल के दोहन के कारण भूगर्भ जलस्तर में तेजी से गिरावट आ रहा है.
बक्सर जिले के लगभग सभी प्रखंड इस समय जल संकट से गुजर रहे हैं. आलम यह है कि अभी से ही तालाब और पोखरे सूखने लगे हैं. जिले से होकर बहनेवाली प्रमुख नदी गंगा के जल स्तर में भी तेजी से गिरावट आ रही है. कर्मनाशा व ठोरा आदि नदियां भी सूखने के कगार पर पहुंच गये हैं.
सूख रहे तालाब-पोखरों के कारण वन्य जीव अब पानी की तलाश में बस्तियों की ओर रूख करने लगे हैं. वैसे जिला क्षेत्र काले हिरनों के लिए संरक्षित और सुरक्षित क्षेत्र माना जाता है, किंतु पानी की तलाश में भटकते हिरनों के बस्तियों की ओर आने से शिकार का खतरा मंडराने लगा है. गिर रहे जलस्तर के चलते अब हैंड पंप भी जवाब देने लगे हैं, जिसके कारण आम जन जल संकट से जूझने लगे हैं.
जिले के प्रखंडों में भी पेयजल की समस्या हुई गंभीर
राजपुर प्रखंड : भूमिगत जलस्तर नीचे चले जाने से क्षेत्र में इन दिनों पेयजल की समस्या काफी गंभीर हो गयी है. सूखे की समस्या झेल रहे लोगों को अब पेयजल संकट की समस्या से जूझना पड़ रहा है. समस्या इतनी गंभीर हो गयी है कि लगाये गये सादा चापाकल तो बिल्कुल ही पानी देना बंद कर दिया है,
जबकि सरकारी स्तर पर लगाये गये चापाकल में कुछ ही चापाकल चल रहे हैं. इसमें से पानी थोड़ा-थोड़ा करके आ रहा है, वह भी गंदगीयुक्त है. कुओं की स्थिति बिल्कुल शून्य के बराबर है. शायद ही कोई कुआं होगा, जो अपने अस्तित्व में बचा होगा. पेयजल की समस्या से क्षेत्र के नागपुर, रामपुर, गैधरा, हंकारपुर, खीरी, तियरा, अकबरपुर, बारूपुर, उतमपुर, हेंठुआ ,मंगरॉव, संगरॉव सहित अन्य सभी गांवों में जल संकट गहरा गया है.
लोग अपने घर के नजदीक किसी दूसरे मुहल्ले में जाकर पानी भर रहे हैं. इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी अजय कुमार सिंह ने बताया कि खराब पड़े सरकारी चापाकलों की मरम्मत के लिए कोई योजना नहीं है. नये चापाकल गाड़ने का प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अभी तक कोई सूचना प्राप्त नहीं हुआ है़
धनसोई : स्थानीय थाने क्षेत्र में गरमी बढ़ने के साथ ही पानी का जल स्तर धीरे-धीरे नीचे जा रहा है. कई चापाकल तो पूरी तरह से सूख गये हैं. धनसोई समेत कई गांवों में दिन-प्रतिदिन जल संकट गहराता जा रहा है. वहीं, जिस मुहल्ले में समरसेबल है, वहां के टूल्लू पंपों ने जवाब दे दिया है. लोगाें के अनुसार अभी गरमी की शुरुआत में स्थिति ऐसी है,
तो मई-जून में हालत क्या होगी. इस क्षेत्र के बहुतेरे लोगाें का मानना है कि मेथा की खेती के कारण धरती से पानी का अधिक उत्सर्जन होने से क्षेत्र में जल स्तर तेजी से नीचे की ओर जा रहा है. चापाकल मिस्त्री लल्लू साह ने बताया कि पहले क्षेत्र में 40 से 50 फुट के बाद पानी निकल आता था, मगर अब 60 से 80 फुट नीचे जाने पर भी गरमी के दिनों में परेशानी होने लगती है.
चौसा प्रखंड : बारिश कम होने से भूमि का जल स्तर घटने लगा है. इससे प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में पेयजल के लिए लगे दर्जनों सरकारी चापाकल जवाब देने लगे हैं. वैसे भी क्षेत्र के अधिकतर इलाकों में जलस्तर काफी नीचे रहता है. ऐसे में बारिश कम होने से आनेवाले दिनों में पेयजल संकट गहराने का अनुमान है. वहीं, पीएचइडी विभाग द्वारा खराब पड़े चापाकलों को ठीक करने की दिशा में कोई पहल अब तक नहीं किये जाने से परेशानी बढ़ सकती है.
इटाढ़ी प्रखंड : पेयजल को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में हाहाकार मचा है. प्रखंड के हकीमपुर, कुकुढ़ा, परासी, लोहंदी, विझौरा आदि गांवों में इन दिनों चापाकल ने पानी देना बंद कर दिया है, जिससे पीने के पानी के लिए लोगों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है. ग्रामीण राजेश कुमार, मनोज सिंह ने बताया कि गांव में मात्र दो-तीन चापाकल ही पानी दे रहा है, जहां पानी के लिए सुबह-शाम लाइन लगानी पड़ रही है.
केसठ प्रखंड : सरकारी चापाकल सूखने लगे हैं, जिससे जल संकट उत्पन्न हो गया है. प्रखंड के विभिन्न गांवों में जल का स्तर तीन से आठ फुट तक नीचे चला गया है. वहीं, दसियांव स्थित मिनी नलकूप भी तकनीकी खराबी के कारण दो साल से बंद पड़ा है, मगर विभाग सूचना देने के बाद भी उदासीन बना हुआ है.
केसठ के कई वार्डों के घरों के चापाकल बंद होने से नलकूप ही एकमात्र सहारा बना है. नलकूप को समयानुसार दिन में तीन बार चलाया जाता है. इसके कारण नल से पानी लेने को लेकर ग्रामीणों की भीड़ जुट जाती है. विदित हो कि 2 अप्रैल को यहां पानी लेने के लिए महिलाओं के बीच मारपीट तक हो गयी थी, जो बीचबचाव के बाद मामला शांत हुआ.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >