ब्रह्मपुर में शराबियों की बल्ले-बल्ले
यूपी की नजदीकी सीमा का उठा रहे भरपूर लाभ
ब्रह्मपुर : प्रखंड के शराबियों का हाल इन दिनों जल बगैर मछली की हो गयी है, लेकिन जिन लोगों के दिन की शुरुआत शराब से ही होती हो, उनके ऊपर शराबबंदी की कोई खास असर नहीं देखी जा रही है. कारण की इनके लिए जहां चाह, वहां राहवाली कहावत उत्तरप्रदेश की सीमा के सटे होने है,चरितार्थ हो रही है. बस समझीये की दो कदम चले और शराब मिल जा रही है. शराब पीनेवाले सुबह होते ही जवही दियर का रास्ता पकड़ ले रहे हैं या चोरी छिपे जवही से शराब लाकर पी रहे हैं.
बताते चले कि बिहार-उत्तरप्रदेश के सीमांकन में जवही दियर का आधा से अधिक भाग उत्तरप्रदेश में है, जिसमें सिर्फ एक गली का ही अंतर है. गली के इस तरफ बिहार और उस तरफ यूपी है, जो प्रखंड के गायघाट, बलुआ, सपही, उधुरा, दल्लुपुर, चकनी, चंद्रपुरा, नैनिजोर, महुआर, विसुपुर के गावों से सटा हुआ है़
इन गांव के लोगों का इसका विशेष फायदा मिल रहा है़ प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बिहार से अधिकांश शराबखोर सुबह-सुबह गोकुल जलाशय के रास्ते जवही पहुंच रहे हैं और पौ फटते ही शराब पीकर या लेकर चले आ रहे है़ं चुकी गोकुल जलाशय जगह-जगह सूख गया है, जिससे आने-जाने में कोई परेशानी नहीं है़ इसलिए शराब विक्रेताओं के साथ-साथ इन शराबियों की भी बल्ले-बल्ले है़ दूसरा बिहार और उत्तरप्रदेश के सीमा पर नैनिजोर का बिहार घाट है, जो शराब तस्करी का मुख्य जोन माना जाता है. इस घाट पर भी आजकल शराबियों की चहल-पहल देखी जा रही है़
प्रशासन के लिए चुनौती : इस क्षेत्र के गांवों के लोगों का अधिकांश खेत जवही दियर में है, जहां इनका आना-जाना बराबर लगा रहता है. इसलिए पुलिस के लिए भी चौबीस घंटे निरीक्षण कर पाना संभव नहीं है.
