बक्सर. जिले के किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने और खेती की लागत को कम करने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा 91 प्रकार के अनुदानित दर पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराने की योजना शुरू की गयी है. इस योजना के अंतर्गत जिले के कुल 2026 किसानों को विभिन्न श्रेणियों के कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जायेंगे. विभाग ने इस योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किया था. विभागीय सूत्रों के अनुसार सोमवार तक खबर लिखे जाने तक कृषि विभाग की वेबसाइट पर कुल 3633 किसानों ने आवेदन किया है. जिला पूरी तरह कृषि प्रधान क्षेत्र है, जहां लगभग 70 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से खेती से जुड़ी है. ऐसे में कृषि यंत्रीकरण योजनाओं का असर सीधे किसानों की उत्पादकता और आय पर पड़ता है. राज्य सरकार की इस योजना के तहत किसानों को 91 प्रकार के कृषि यंत्र जैसे कि ट्रैक्टर, रोटावेटर, हैरो, सीड ड्रिल, पावर टिलर, रीपर, थ्रेशर, मल्टी क्रॉप प्लांटर, इंटर कल्चर टूल्स, पावर वीडर, तथा स्प्रे मशीन आदि पर अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है. उप निदेशक कृषि अभियंत्रण डॉ गरिमा झारिया ने बताया कि कृषि कार्यों में बढ़ती मजदूरी और समय की कमी को देखते हुए मशीनों का उपयोग अब अनिवार्य हो गया है. सरकार का प्रयास है कि जिले के अधिक से अधिक किसानों को अनुदानित दर पर ये यंत्र उपलब्ध कराए जाएं ताकि खेती न सिर्फ आसान हो बल्कि उत्पादन लागत भी घटे. 20 नवंबर से पहले होगी लॉटरी प्रक्रिया जिले में प्राप्त कुल 3633 आवेदनों में से 2026 किसानों का चयन लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जायेगा. यह लॉटरी प्रक्रिया 20 नवम्बर से पहले किसी भी दिन संपन्न कराई जायेगी. चयनित किसानों को विभाग की वेबसाइट के माध्यम से सूचित किया जाएगा, साथ ही पंजीकृत मोबाइल नंबर पर संदेश भी भेजा जायेगा. चयनित किसानों को उनके आवेदन के अनुसार अनुमोदित यंत्र के लिए परमिट निर्गत किया जायेगा. इस परमिट के आधार पर किसान अधिकृत विक्रेताओं से यंत्र की खरीद कर सकेंगे. 28 दिन के भीतर यंत्र खरीदना अनिवार्य विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि किसान को परमिट निर्गत होने के बाद 28 दिनों के भीतर यंत्र की खरीद नहीं की जाती है, तो उसका परमिट स्वतः निरस्त हो जायेगा. इसके साथ ही उस किसान को उसी वित्तीय वर्ष में दोबारा आवेदन या पुनः अवसर नहीं दिया जायेगा. विभाग का कहना है कि यह प्रावधान इसलिए रखा गया है ताकि वास्तविक इच्छुक और तत्पर किसान ही लाभ प्राप्त करें और प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो. विभागीय सूत्रों को माने तो पिछले वर्षों में कई किसानों ने परमिट कटने के बाद यंत्र की खरीद में देर की, जिससे स्टॉक और वितरण दोनों में दिक्कत हुई. इसलिए इस बार समय-सीमा को सख्ती से लागू किया गया है. विभाग पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल पद्धति से काम कर रहा है. क्या कहते हैं अधिकारी जिले के किसानों से अनुरोध है कि इस साल एक नया यंत्र को शामिल किया गया है. उसका नाम इंटर क्लचरल टूल्स को शामिल किया गया. उद्याननिक फसल करने वाले किसानों से अनुरोध है कि इंटर क्लचरल टूल्स के लिए भी आवेदन करें. डॉ गरिमा झारिया, उप निदेशक, कृषि अभियंत्रण
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