बक्सर/चौसा : अनंत चतुर्दशी को लेकर गुरुवार को महिलाओं ने व्रत रखा. भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की मंगलकामना की. स्त्रियां सुबह स्नान कर दायें हाथ और पुरुष बायें हाथ में अनंत सूत्र धारण की. मान्यता है कि अनंत सूत्र पहनने से सभी दुख और परेशानियां दूर हो जाती है.
अनंत चतुर्दशी को ले महिलाओं ने रखा व्रत
बक्सर/चौसा : अनंत चतुर्दशी को लेकर गुरुवार को महिलाओं ने व्रत रखा. भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की मंगलकामना की. स्त्रियां सुबह स्नान कर दायें हाथ और पुरुष बायें हाथ में अनंत सूत्र धारण की. मान्यता है कि अनंत सूत्र पहनने से सभी दुख और परेशानियां दूर हो जाती है. […]

इस मौके पर गंगा के विभिन्न घाटों पर गणेश विसर्जन भी किया गया. भक्त धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ गणेश की मूर्ति का विसर्जन किया. बता दें कि प्रत्येक साल भादों माह के शुक्ल पक्ष की चौदस यानी 14वें दिन अनंत चतुर्दशी मनायी जाती है.
हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का विशेष महत्व है. इस दिन भगवान विष्णु की उपासना के बाद अनंत सूत्र बांधा जाता है. यह त्योहार भक्ति एकता एवं सौहार्द का प्रतीक है. इस दिन लोग अपने घरों में विष्णु भगवान की तस्वीर रखकर पूजा पाठ करते हैं और पकवान बनाते हैं. चौसा प्रतिनिधि के अनुसार, प्रखंड के विभिन्न भागों में भाद्रपक्ष चतुर्दशी गुरूवार को आस्था के साथ अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया गया.
अनंत फल की कामना को ले मनाये जाने वाले उक्त पर्व के दिन लोग दोपहर तक निर्जला व्रत रहे और अनंत भगवान का कथा श्रवण करने के पश्चात अनंत फलदायी के धागे को अपनी बांहों में बांधा. उक्त पर्व को लेकर क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों में काफी चहल-पहल दिखाई दी. डुमरांव के बांके बिहारी मंदिर, राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी भगवती मंदिर, लंगटू महादेव मंदिर, ठठेरी बाजार और निमेज टोला भगवती मंदिर में अनंत कथा सुनने को लेकर व्रतियों की भीड़ लगी रही.
भाद्रपद माह के शुक्लपक्ष चतुर्दशी को भगवान गणेश की विदाई की जाती है. इसी दिन अनंत चतुर्दशी का व्रत भी मनाया जाता है. श्रद्धालु अनंत भगवान के पूजा-अर्चना के बाद कथा सुना. उसके बाद अनंत सूत्र अपने-अपने बाहों में बांध पकवान (पूड़ी व सेवई), मिष्ठान का भोजन ग्रहण किया. अनंत सूत्र की पूरी विधि से पूजा करने बाद अनंत सूत्र को पुरुष अपने दाहिने हाथ और स्त्री बाएं हाथ में बांध प्रसाद ग्रहण किया.
पहली बार कब हुई थी अनंतपूजा
पंडित ज्योतिषाचार्य राहुल मिश्र और मुकुल मिश्र ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार जब महाभारत में पांडव अपना सारा राजपाट जुआ में हारकर वनवास के दौरान में कष्टदायक जीवन व्यतीत कर रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को अनंत चतुर्दशी का व्रत करने को कहा था.
तब धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने सभी भाइयों एवं द्रौपदी के साथ पूरे विधि-विधान के साथ अनंत चतुर्दशी का व्रत किया. कहा जाता है कि इस अनंत चतुर्दशी का व्रत करने का बाद पांडव पुत्र एवं द्रौपदी सभी संकटों से मुक्त हो गये.
सबकी रक्षा करने वाला अनंतसूत्र भी बांधा जाता
एक समय की बात है कि कौण्डिन्य मुनि की दृष्टि अपनी पत्नी के बायें हाथ में बंधे अनंत सूत्र पर पड़ी, हाथ में बंधे अनंत सूत्र को देखकर वह आश्चर्यचकित हो गये और उन्होंने अपनी पत्नी से पूछा-क्या तुमने मुझे अपने वश में करने के लिए यह सूत्र बांधा है.
उनकी पत्नी ने विनम्रतापूर्वक कौण्डिन्य मुनि को उत्तर दिया जी नहीं, यह भगवन अनंत का पवित्र ऐसे करें अनंत चतुर्दशी का व्रत, दूर होंगे सारे कष्ट. ऐसी मान्यता है कि अनंत भगवान की पूजा करने के बाद संकटों से सबकी रक्षा करने वाला अनंतसूत्र भी बांधा जाता है, इससे सभी कष्टों का निवारण होता है.