डुमरांव : डुमरांव के तंग गली में शुमार बंधन पटवा रोड बसे पटवा बिरादरी के परिवार के लोगों द्वारा लग्न को देखते हुए मउर का निर्माण किया जाता है. वर्षों से मउर का निर्माण इनके द्वारा किया जाता है. क्षेत्र के नावानगर, केसठ, चौगाईं, ब्रह्मपुर, चक्की सहित विभिन्न क्षेत्र के दुकानदार मउर बिक्री के लिए यहां से खरीदारी कर ले जाते हैं. मउर निर्माण में लगे अशोक पटवा व ओम प्रकाश पटवा का पूरा परिवार मउर निर्माण में लग्न के दो-तीन माह से लग जाते हैं. लग्न के पहले ही मउर निर्माण की तैयारी जोर-शोर से जारी है.
डुमरांव में बने मउर की बंगाल यूपी और झारखंड में मांग
डुमरांव : डुमरांव के तंग गली में शुमार बंधन पटवा रोड बसे पटवा बिरादरी के परिवार के लोगों द्वारा लग्न को देखते हुए मउर का निर्माण किया जाता है. वर्षों से मउर का निर्माण इनके द्वारा किया जाता है. क्षेत्र के नावानगर, केसठ, चौगाईं, ब्रह्मपुर, चक्की सहित विभिन्न क्षेत्र के दुकानदार मउर बिक्री के लिए […]

मउर में लगनेवाली सामग्री : मउर का निर्माण में एक दर्जन से ऊपर सामग्री का प्रयोग कर एक मउर का निर्माण किया जाता है. एक मउर बनाने में लगभग एक से दो घंटे का समय लगता है. आर्डरवाले मउर में समय और मीना का कोई आंकलन नहीं होता है. मउर बनाने में कूट, सादा व रंगीन कागज, तार, पगड़ी माला, मोती, सितरा, लकड़ी, मउर, पंख सहित अन्य सामान का प्रयोग होता है.
थोक में 150-500 रुपये तक होती है बिक्री : मउर का सबसे कम दाम 150 रुपये से शुरू होता है, जो 500 रुपये तक बिकता है. मउर निर्माणकर्ता बिहारी, मदन, ललिता देवी, गौरी पटवा, बिहारी लाल, अंतु कहते हैं कि आॅर्डर पर कीमती मउर का भी निर्माण किया जाता है. ग्राहक कई अतिरिक्त सामान जोड़ कर मउर बनाने को कहते हैं, जिसकी कीमत 1500-2000 रुपये तक होती है. हालांकि ऐसे ग्राहकों की कमी है.
मउर का महत्व : मउर का महत्व शादी के समय होता है. मउर का उपयोग लड़कीवाले के यहां द्वार पूजा के समय होता है. इसके अलावे माड़ो में लावा मिलाने के बाद सिंदूरदान के समय होता है. डुमरांव निर्मित मउर झारखंड के अलावे बंगाल तक पहुंचता है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां आसपास के लोग झारखंड व बंगाल के अलावे असम में रहते हैं. शादी- विवाह के समय किसी तरह डुमरांव में निर्मित मउर मंगाते हैं या स्थानीय बाजार में डुमरांव मंडी से मंगा बिक्री करता है.