बिहार : बड़े काम के गदहे, स्वरोजगार के साथ सेना में भी मददगार

मेले में गदहे का भाव आसमान पर, खच्चर के दाम 40 हजार के पार बगेनगोला : ब्रह्मपुर फाल्गुनी मेले में पालतू मवेशियों के साथ-साथ इस बार गदहे व खच्चर भी बिकने के लिए आये हैं. गदहा व खच्चर की खरीद बिक्री से बाजार में रौनक बढ़ गयी है. करीब साढ़े तीन सौ गदहे व खच्चर […]

मेले में गदहे का भाव आसमान पर, खच्चर के दाम 40 हजार के पार

बगेनगोला : ब्रह्मपुर फाल्गुनी मेले में पालतू मवेशियों के साथ-साथ इस बार गदहे व खच्चर भी बिकने के लिए आये हैं. गदहा व खच्चर की खरीद बिक्री से बाजार में रौनक बढ़ गयी है. करीब साढ़े तीन सौ गदहे व खच्चर अब तक मेले में खरीद बिक्री के लिये आ चुके हैं. अभी और आने बाकी हैं. पशुपालन के नजरिये से देखा जाये तो गदहा और खच्चर स्वरोजगार के आज भी एक अच्छा जरिये हैं. मेले में आसपास के जिलों से कई गदहा व्यवसायी आये हैं .
12 से 40 हजार तक है कीमत : जिसमें एक गदहे की कीमत 12, हजार से 15, हजार तक है, तथा एक खच्चर की कीमत 35, हजार से लेकर 40, हजार तक कीमत बतायी जा रही है.
गदहा व खच्चर की उपयोगिता : गदहा और खच्चर दोनों दो नस्ल के होते हैं. खच्चर 30 से 40 में बिक रहा है. खच्चर बहुत ताकतवर होता है. इस जानवर को आर्मी में भी रखा जाता है. ऊंचे पर्वतों पर बने आर्मी के बेस कैंपों पर राशन-पानी के साथ-साथ अन्य सामान भी इन्हीं के द्वारा पहुंचाया जाता है. जितना मजबूत खच्चर होगा उतनी ही बड़ी उसका ओहदा होगी.
एक मजबूर खच्चर अपनी पीठ पर दो से ढाई क्विंटल का वजन लेकर पहाड़ की चोटियों पर चढ़ जाता है. वहीं गदहा से ईंट-भट्ठा चिमनी पर काम लिया जाता है.यहीं नहीं गांव व शहर की गली व संकीर्ण रास्तों में मकान बनानेवाले लोगों को सामान ले जाने में इन गदहों की ही मदद लेनी पड़ती है.
ईंट भट्ठे पर लिया जाता है काम : मेले में भोजपुर जिला से आये कल्लू रजक, गोरा रजक ने कहा कि गदहा और खच्चर ये दोनों जानवर ग्रामीण क्षेत्रों में सामान ढोने के काम में आते हैं. ज्यादातर ईंट भट्ठे पर इनसे काम लिया जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ये जानवर स्वरोजगार के जरिया हैं. दिमंगल बैठा, नागेश बैठा मेले में अपने आठ गदहों को लेकर पहुंचे हैं. इन लोगों ने कहा कि बटाइदारी पर खेत लेकर खेती-बाड़ी करते हैं.

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