Buxar Paddy Transplantation : बक्सर जिले के डुमरांव प्रखंड में पिछले दो दिनों से हुई झमाझम बारिश ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है. तेज बारिश के बाद जहां लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली है, वहीं किसानों के चेहरे भी खिल उठे हैं. खेतों में पानी भरने के बाद किसान अब धान रोपनी के काम में तेजी से जुट गए हैं और बेहतर फसल की उम्मीद जगा रहे हैं.
किसान सलाहकार दिलीप कुमार शर्मा के अनुसार, रविवार को 48.4 एमएम बारिश दर्ज की गई, जबकि सोमवार देर रात से हुई बारिश में 54.6 एमएम पानी गिरा. इस तरह दो दिनों में कुल 103 एमएम बारिश हुई है. उन्होंने बताया कि इस बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी आ गई है, जिससे धान की रोपनी के लिए अनुकूल स्थिति बन गई है.
Buxar News : खेतों में लौटी रौनक, रोपनी ने पकड़ी रफ्तार
लगातार बारिश के बाद डुमरांव प्रखंड के विभिन्न गांवों में खेतों की तस्वीर बदल गई है. जो खेत पहले सूखे पड़े थे, अब पानी से भर गए हैं. किसान सुबह से ही खेतों में उतरकर धान की रोपनी में जुटे नजर आ रहे हैं. कई जगहों पर परिवार के सभी सदस्य मिलकर खेती के काम में हाथ बंटा रहे हैं.
किसानों का कहना है कि इस बारिश ने खेती की दिशा बदल दी है. पहले जहां बारिश नहीं होने से रोपनी का काम रुका हुआ था, वहीं अब तेजी से काम शुरू हो गया है. खेतों में पानी भरने से धान की पौध लगाने में आसानी हो रही है.
Rain: किसानों को जगी बेहतर फसल की उम्मीद
स्थानीय किसान बीरेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह और भिखारी सिंह ने बताया कि रविवार देर रात से ही बारिश शुरू हो गई थी, जो सोमवार तक जारी रही. इसके बाद सोमवार रात को फिर से अच्छी बारिश हुई. उन्होंने कहा कि इस बार समय पर बारिश होने से फसल अच्छी होने की उम्मीद बढ़ गई है.
किसानों का कहना है कि अगर इसी तरह समय-समय पर बारिश होती रही, तो धान की पैदावार बेहतर होगी और उन्हें आर्थिक रूप से भी फायदा मिलेगा. पिछले कुछ दिनों से बारिश नहीं होने के कारण चिंता बढ़ गई थी, लेकिन अब स्थिति सुधरती नजर आ रही है.
कृषि विभाग की नजर, आगे की बारिश पर टिकी उम्मीद
कृषि विभाग से जुड़े लोगों का भी कहना है कि यह बारिश धान की खेती के लिए बेहद फायदेमंद है. हालांकि, आगे भी समय-समय पर बारिश होना जरूरी है, तभी फसल अच्छी तरह विकसित हो पाएगी.
फिलहाल डुमरांव प्रखंड में बारिश के बाद खेती-किसानी की गतिविधियां तेज हो गई हैं. किसान पूरे उत्साह के साथ खेतों में काम कर रहे हैं. आने वाले दिनों में मौसम का रुख कैसा रहता है, इस पर ही फसल की गुणवत्ता और उत्पादन निर्भर करेगा.
