दिनेश ओझा
ब्रह्मपुर:बिहार में बक्सर जिले के ब्रह्मपुर प्रखंड के नैनीजोर स्वास्थ्य उपकेंद्र का हाल बदहाल है. उत्तरी नैनीजोर एवं दक्षिणी नैनीजोर के दो पंचायतों के बीच बनाया गया यह स्वास्थ्य उप केंद्र अपने उद्देश्यों में असफल साबित हो रहा है, कारण कि यहां पदस्थापित डॉक्टर एवं एएनएम नर्स के आने-जाने का कोई समय निश्चित नहीं है. ग्राम वासियों के अनुसार एएनएम यदा, कदा ही बैठती है. वही डॉक्टर का कोई अता-पता नहीं रहता.
होम्योपैथिक डाॅक्टर के सहारे केंद्र
लोगों ने बताया कि एक होम्योपैथिक डॉक्टर गोपी कांत ओझा के भरोसे यह केंद्र चलता है. जब कि आसपास के लोगों से पता करने पर पता चला कि एक डॉक्टर आते हैं और वही दवा देते हैं.
क्या कहते है चिकित्सक
प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी यूएन त्रिपाठी से बात करने पर पता चला कि इस केंद्र पर एक एमबीबीएस डॉक्टर महेंद्र प्रसाद सिंह और दूसरे होम्योपैथिक डॉ गोपी कांत ओझा के साथ दो एएनएम वैजयंती कुमारी एवं उमा देवी सहित एक फार्मासिस्ट अजय प्रसाद पदास्थापित है. शनिवार को 11:00 बजे तक स्वास्थ्य उपकेंद्र बंद था. एक महिला बच्चे के साथ केंद्र खुलने के इंतजार में बैठी थी.
कहते है ग्रामीण
ग्रामीण नंदलाल चौधरी ने बताया की डॉ के आने का निश्चित समय नही होने से मरीज प्राइवेट अस्पताल में चले जाते है.
स्वतंत्रता सेनानी सुरेश तिवारी ने स्वास्थ्य उपकेंद्र के लिए 32 कट्ठा जमीन दान में दी
नैनीजोर गांव का यह सौभाग्य है की सुरेश तिवारी जैसे महापुरुष इस धरती पर पैदा हुए जो कि 1970 में 32 कट्ठा जमीन अस्पताल बनाने के लिए दान में दे दी. साथ ही ग्राम वासियों के सहयोग से चंदा इकट्ठा कर दो रूम बनाया गया. जिसमें स्वास्थ्य केंद्र चल रहा है. आज रख रखाव के आभाव में इस भवन पर पेड़ जम गया है, जिसके कारण इसकी दीवाल फट रही है और भसने के कगार पर है. यह दुर्भाग्य है कि आज तक सरकार ने मुफ्त में मिली जमीन की घेराबंदी तक नहीं कि जो आज अतिक्रमण का शिकार है.
पूर्व विधायक डॉक्टर स्वामीनाथ तिवारी ने अस्पताल बनाने के लिए 2010 में एक 11 दिनों तक अनशन किया बाद में प्रशासन के आश्वासन पर अनशन तोड़ा गया, लेकिन 7 साल गुजर जाने के बाद भी इस पर कोई करवाई नहीं हुई. लिहाजा स्थिति जस की तस बनी हुई है.
