जिले में निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना की रफ्तार धीमी

बेरोजगार युवाओं को आर्थिक मदद देने के मकसद से शुरू की गई मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा में ही लापरवाही और सुस्ती की शिकार होती दिख रही है.

बिहारशरीफ. बेरोजगार युवाओं को आर्थिक मदद देने के मकसद से शुरू की गई मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा में ही लापरवाही और सुस्ती की शिकार होती दिख रही है. 2 अक्टूबर 2016 को शुरू हुई इस योजना के तहत 20 से 25 वर्ष तक के 12वीं पास बेरोजगार युवाओं को प्रति माह 1000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. लेकिन वर्ष 2025-26 में तय लक्ष्य के मुकाबले अब तक मात्र 21.59 प्रतिशत आवेदन ही स्वीकृत हो पाए हैं. वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1,77,648 युवाओं को योजना से लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक सिर्फ 33,967 आवेदनों को ही स्वीकृति मिली है. यहीं नहीं, जून माह में 6,655 आवेदन स्वीकृत होने थे, लेकिन मंजूरी सिर्फ 226 आवेदनों को ही मिली, जो लक्ष्य का मात्र 3.41 प्रतिशत है. ये आंकड़े साफ बताते हैं कि योजना की जमीनी हकीकत चिंताजनक है. इस योजना का उद्देश्य बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार या प्रशिक्षण की ओर बढ़ावा देना है. योजना में अधिकतम दो वर्ष तक 1000 रुपये मासिक सहायता दी जाती है. इसके अंतर्गत युवाओं को भाषा और कंप्यूटर प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से लेना होता है, जो डीआरसीसी (जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र) और श्रम संसाधन विभाग द्वारा नि:शुल्क प्रदान किया जाता है. इस योजना के क्रियान्वयन में चार प्रमुख विभाग शामिल हैं. डीआरसीसी, योजना एवं विकास विभाग, शिक्षा विभाग, श्रम संसाधन विभाग, युवाओं से ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन लिए जाते हैं, जिनकी जांच तीनों विभागों द्वारा की जाती है, फिर फाइनल स्वीकृति राज्य मुख्यालय भेजी जाती है. स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता विवेक कुमार का कहना है कि अगर यही स्थिति रही तो हज़ारों बेरोजगार युवा इस योजना से वंचित रह जाएंगे। यह विडंबना है कि मुख्यमंत्री की प्रिय योजना उनके ही जिले में सबसे ज्यादा पिछड़ रही है. युवा संगठनों का भी मानना है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो यह मुद्दा चुनावी समय में राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन सकता है. खासकर जब बेरोजगारी पहले से ही एक गंभीर मुद्दा है.

– कहां हो रही है चूक

-प्रशिक्षण की जानकारी और सुविधा में कमी

-युवाओं को प्रशिक्षण की पूरी जानकारी नहीं मिल रही है

-कहीं-कहीं पर प्रशिक्षण केंद्र सक्रिय नहीं हैं या फिर सही निगरानी नहीं हो रही है.

– -योजना की रफ्तार बताती है कि प्रशासनिक स्तर पर समन्वय की भारी कमी है

– बड़ी संख्या में युवाओं को योजना की जानकारी ही नहीं है, जिससे वे आवेदन तक नहीं कर पा रहे

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Published by: Santosh kumar singh

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