राजगीर में नगर परिषद कर्मियों की हड़ताल से शहर बेहाल, सड़कों पर कचरे का अंबार; पेयजल समेत कई सेवाएं प्रभावित

राजगीर नगर परिषद में कर्मचारियों की बेमियादी हड़ताल ने व्यवस्था पूरी तरह चरमरा दी है. सफाई, जलापूर्ति और अन्य नागरिक सेवाएं ठप होने से शहर में कचरे का अंबार लग गया है, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों को भारी परेशानी हो रही है. कर्मचारी अपनी मांगों पर ठोस निर्णय न होने तक आंदोलन जारी रखने पर अड़े हैं.

Rajgir Municipal Workers Strike : अस्थायी, दैनिक, संविदा, आउटसोर्सिंग तथा ठेका कर्मचारियों की बेमियादी हड़ताल से राजगीर नगर परिषद की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. शनिवार को हड़ताल तीसरे दिन भी जारी रही.

कर्मचारियों ने अपनी तीन सूत्री मांगों के समर्थन में नगर परिषद कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन करते हुए सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.

सफाई व्यवस्था ठप और कचरे का अंबार

हड़ताल का सबसे अधिक असर शहर की साफ-सफाई व्यवस्था पर पड़ा है. डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन का काम तीन दिनों से बंद है. सफाई कर्मियों के काम पर नहीं आने से शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, बाजारों, मुख्य सड़कों और मोहल्लों की गलियों में कूड़े-कचरे का अंबार लग गया है. कई स्थानों पर कचरे से दुर्गंध फैलने लगी है.

इससे स्थानीय लोगों और बाहर से आने वाले पर्यटकों एवं कांवरियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. लोगों ने जल्द सफाई व्यवस्था बहाल करने की मांग नगर परिषद से की है.

ठप पड़ी नागरिक सेवाएं और लोगों की परेशानी

वार्ड पार्षद डॉ. अनिल कुमार, महेंद्र यादव, अनिता सिन्हा, पूर्व प्रमुख सुधीर कुमार पटेल, डॉ. कौलेश कुमार एवं अन्य बताते हैं कि सिर्फ सफाई व्यवस्था ही नहीं, बल्कि जलापूर्ति, कार्यालयी कार्य, कर वसूली, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, होल्डिंग टैक्स से जुड़े कार्य तथा अन्य नागरिक सेवाएं भी प्रभावित हो गई हैं.

नगर परिषद कार्यालय में आम लोगों के जरूरी कार्य लंबित पड़े हैं. इससे नागरिकों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है.

कई लोग आवश्यक कार्यों के लिए कार्यालय पहुंचे, लेकिन कर्मचारियों की हड़ताल के कारण उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा.

हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से वे अपनी समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है. उनका आरोप है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद मांगों का समाधान नहीं हुआ, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है.

हड़ताल से विकट हुई स्थिति और श्रावणी मेला पर असर

इधर, शहरवासियों ने आशंका जताई है कि यदि हड़ताल जल्द समाप्त नहीं हुई, तो सफाई व्यवस्था और पेयजल आपूर्ति की समस्या और गंभीर हो सकती है. श्रावणी मेला पर हड़ताल का प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है.

नागरिकों ने प्रशासन से कर्मचारियों के साथ शीघ्र वार्ता कर समाधान निकालने की मांग की है, ताकि नगर परिषद की आवश्यक सेवाएं जल्द से जल्द सामान्य हो सकें और आम लोगों को राहत मिल सके.

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By Ramvilas prasad

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