Rajgir Malmas Mela (रामविलास): ऐतिहासिक और आध्यात्मिक नगरी राजगीर में चल रहे पावन पुरुषोत्तम मलमास मेला के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है. इस पावन मौके पर जापानी मंदिर रोड स्थित संत कबीर मठ परिसर में एक विशेष धार्मिक सभा का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में अखिल भारतीय हिंदी महासभा (नई दिल्ली) तथा नव संस्कार सृजन परिवार के राष्ट्रीय धर्म जागरण प्रमुख डॉ. सुखनारायण भैया ने बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित किया. उन्होंने सनातन धर्म की महत्ता, उसकी वैज्ञानिकता और मानवता के कल्याण पर विस्तृत प्रकाश डाला.
सनातन का कोई एक संस्थापक नहीं, यह सृष्टि के आरंभ से विद्यमान व्यवस्था है
डॉ. सुखनारायण भैया ने अपने प्रवचन में कहा कि सनातन धर्म केवल एक पूजा-पद्धति या किसी संप्रदाय विशेष का दायरा नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन और समस्त सृष्टि को संतुलित रखने वाली एक शाश्वत जीवन पद्धति है. उन्होंने समझाया कि सनातन का वास्तविक अर्थ वह व्यवस्था है, जो समाज, प्रकृति और ब्रह्मांड के बीच समरसता स्थापित करती है. इसका कोई एक संस्थापक नहीं है और न ही यह किसी काल विशेष में पैदा हुआ है, बल्कि यह सृष्टि के आरंभ से ही विद्यमान है. उन्होंने विज्ञान से जोड़ते हुए कहा कि आज आधुनिक विज्ञान जिस ‘लॉ ऑफ नेचर’ (प्रकृति के नियम) की चर्चा करता है, वही वास्तव में सनातन के सिद्धांतों का आधुनिक स्वरूप है. सूर्य का समय पर उदय और अस्त होना, जल और वायु का निरंतर प्रवाह तथा जन्म-मृत्यु का चक्र, ये सभी सनातन व्यवस्था की ही सुंदर अभिव्यक्तियां हैं.
पेड़-पौधों और पशु-पक्षियों की सुरक्षा भी सनातन का हिस्सा, कर्म प्रधान है जीवन
डॉ. सुखनारायण भैया ने कहा कि सनातन धर्म की व्यापकता केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों, जल, वायु और अग्नि सहित समस्त प्रकृति को यह अपने दायरे में समेटे हुए है. सत्य, अहिंसा, करुणा, दया, प्रेम और निस्वार्थ सेवा इसके मुख्य आधार स्तंभ हैं. धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष रूपी चार पुरुषार्थ मानव जीवन को संतुलित और सार्थक बनाते हैं.
उन्होंने कर्म सिद्धांत का उल्लेख करते हुए सचेत किया कि प्रत्येक प्राणी को अपने कर्मों का फल भुगतना ही पड़ता है. “वसुधैव कुटुंबकम्” (पूरी पृथ्वी ही हमारा परिवार है) की भावना ही सनातन की आत्मा है, जो पूरे विश्व को एक सूत्र में बांधती है. पर्यावरण का संरक्षण करना और सभी जीवों के प्रति संवेदनशीलता रखना ही इसका मूल संदेश है.
सत्य का मार्ग दिखाए गुरु, तो उसे ग्रहण करना शिष्य का कर्तव्य: महंत मुन्ना साहेब
इस आध्यात्मिक अवसर पर कबीर मठ के महंत मुन्ना साहेब ने भी श्रद्धालुओं को संबोधित किया. उन्होंने गुरु और शिष्य के पवित्र रिश्ते को रेखांकित करते हुए कहा, “गुरु का परम कर्तव्य समाज को सत्य का उपदेश देना है. गुरु यदि सत्य को छिपाए तो दोष गुरु का माना जाएगा, किंतु जब गुरु सत्य का मार्ग दिखाता है और शिष्य उसे अपने जीवन में ग्रहण नहीं करता, तब दोष शिष्य का होता है.” उन्होंने मेले में आए सभी श्रद्धालुओं से अपील की कि वे गुरु के इन अनमोल उपदेशों को केवल सुनें नहीं, बल्कि अपने व्यावहारिक जीवन में भी उतारें.
इस धार्मिक समागम के दौरान राजगीर पहुंचे देश-दुनिया के सैकड़ों श्रद्धालु, स्थानीय प्रबुद्ध नागरिक और कबीर मठ से जुड़े सेवादार मुख्य रूप से उपस्थित रहे. पूरा परिसर भक्तिमय माहौल और जयकारों से गूंजता रहा.
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