BiharSharif Government Dental College : बिहारशरीफ के पैठना-भगनबिघा स्थित सरकारी डेंटल कॉलेज एवं अस्पताल दंत चिकित्सा शिक्षा और उपचार का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है. आधुनिक सुविधाओं, अनुभवी चिकित्सकों और सुलभ इलाज के कारण यहां नालंदा समेत आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में मरीज और छात्र पहुंच रहे हैं.
आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है सरकारी डेंटल कॉलेज
जानकारी अनुसार, रहुई प्रखंड के पैठना-भगनबिघा स्थित सरकारी डेंटल कॉलेज बिहारशरीफ से करीब 10 से 12 किलोमीटर की दूरी पर बख्तियारपुर-रांची मार्ग पर स्थित है. यह संस्थान क्षेत्र में दंत चिकित्सा शिक्षा और गुणवत्तापूर्ण इलाज का प्रमुख केंद्र बन चुका है. आधुनिक संसाधनों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की बदौलत कॉलेज आने वाले वर्षों में बिहार के प्रमुख डेंटल संस्थानों में अपनी मजबूत पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
हर साल 100 छात्रों का हो रहा नामांकन
वर्ष 2023-24 से यहां बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (बीडीएस) की पढ़ाई शुरू हो चुकी है. संस्थान में प्रत्येक वर्ष 100 छात्रों के नामांकन की क्षमता है. कॉलेज के प्राचार्य डॉ. विकास वैभव ने बताया कि करीब 20 एकड़ में फैले परिसर में छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग छात्रावास, डॉक्टरों, इंटर्न और नर्सिंग स्टाफ के लिए आवास तथा मेस की सुविधा उपलब्ध है.
स्मार्ट क्लासरूम और आधुनिक लैब में मिल रहा प्रशिक्षण
कॉलेज में सेंट्रली एयर कंडीशंड शैक्षणिक भवन, डिजिटल बोर्ड से लैस स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक ऑडिटोरियम, स्टूडेंट रिक्रिएशन सेंटर, कम्युनिटी ब्लॉक, कैंटीन और हरियाली से युक्त परिसर विकसित किया गया है. प्री-क्लिनिकल प्रयोगशालाओं, आधुनिक कक्षाओं और क्लिनिकल विभागों में छात्रों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है. समय-समय पर सेमिनार और अकादमिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है.
प्रतिदिन 250 से 300 मरीज पहुंच रहे अस्पताल
प्राचार्य डॉ. विकास वैभव के अनुसार अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 250 से 300 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. यहां दांत दर्द, कैविटी, पायरिया, मसूड़ों की बीमारी, टूटे दांत और तंबाकू सेवन से होने वाले मुंह के रोगों का आधुनिक तकनीकों से उपचार किया जाता है. उन्होंने लोगों से दिन में कम से कम दो बार ब्रश करने और दांतों की नियमित देखभाल करने की अपील की.
मुंह से मिलते हैं कई गंभीर बीमारियों के संकेत
पायरिया विभाग के सह प्राध्यापक डॉ. पुरुषोत्तम सिंह ने कहा कि मुंह शरीर का आईना होता है और कई गंभीर बीमारियों के शुरुआती संकेत सबसे पहले मुंह में दिखाई देते हैं. उन्होंने बताया कि कैविटी और पायरिया दांत कमजोर होने के प्रमुख कारण हैं. उन्होंने सुबह-शाम ब्रश करने, हर छह महीने में दंत जांच कराने और मसूड़ों की नियमित देखभाल करने की सलाह दी.
मोबाइल डेंटल वैन गांवों में फैला रही जागरूकता
कॉलेज के ट्यूटर रवि कुमार ने बताया कि संस्थान की मोबाइल डेंटल वैन ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को दांतों की सफाई, दंत रोगों की रोकथाम और समय पर इलाज के प्रति जागरूक कर रही है. इसके माध्यम से गांव-गांव में स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है.
बच्चों की दंत सुरक्षा पर डॉक्टरों की सलाह
शिशु दंत चिकित्सक डॉ. शत्रुघ्न प्रसाद ने अभिभावकों से बच्चों को अधिक चिपचिपी मिठाइयों और चॉकलेट से दूर रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि ऐसी चीजों के अधिक सेवन से दांतों में कीड़े लगने और अन्य दंत समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. बच्चों में बचपन से ही अच्छी दंत स्वच्छता की आदत विकसित करना जरूरी है.
