एफआरएस सिस्टम से पोषाहार वितरण के खिलाफ दिया धरना

विभिन्न मांगों को लेकर प्रखंड भर के आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका के द्वारा एकदिवसीय धरना दिया गया.

बरबीघा. विभिन्न मांगों को लेकर प्रखंड भर के आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका के द्वारा एकदिवसीय धरना दिया गया. प्रखंड कार्यालय स्थित बाल विकास परियोजना पदाधिकारी कार्यालय के समक्ष एकत्रित होकर आंगनबाड़ी सेविका सहायिका ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी किया.धरना का नेतृत्व कर रही आंगनबाड़ी सेविका कमला कुमारी ने बताया कि एफआरएस सिस्टम के तहत पोषाहार वितरण करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.दरअसल आंगनबाड़ी केंद्रों पर एफआरएस (फेस रिकग्निशन सिस्टम) एक ऐसी प्रणाली है जो पोषण कार्यक्रम में पारदर्शिता और सटीकता लाने के लिए, लाभार्थियों की पहचान चेहरे के माध्यम से करती है.जिससे उन्हें सही समय पर पोषाहार मिल सके.इसके तहत लाभार्थी जिनमें गर्भवती, धात्री और 0-3 वर्ष के बच्चे शामिल है.उनकी ई-केवाईसी और फोटो ली जाती है.पोषाहार वितरण से पहले, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ऐप पर लाभार्थी का चेहरा कैप्चर करते हैं.चेहरे के मिलान पर लाभार्थी के मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आता है.ओटीपी आने के बाद ही लाभार्थी को टेक होम राशन यानि टीएचआर दिया जाता है. कमला कुमारी ने बताया कि सभी ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाने के बाद साइबर ठगी के डर से लोग ओटीपी देना नहीं चाहते हैं. ओटीपी दिए बगैर लोग जबरन पोषाहार का मांग करते हैं.इस कारण अक्सर आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका और आम लोगों के बीच कहा सुनी की स्थिति पैदा हो जाती है.मुख्य रूप से इसी सिस्टम के खिलाफ धरना दिया जा रहा था.आंगनबाड़ी सेविकाओं ने एफआरएस सिस्टम को निरस्त कर ऑफलाइन प्रक्रिया बहाल करने की मांग करने के साथ-साथ फाइव जी मोबाइल देने, रिचार्ज हेतु राशि आवंटित करने, महंगाई के देखते हुए पोषाहार खरीदने के लिए मिलने वाली राशि में वृद्धि करने, सर्वोच्च न्यायालय के आदेश अनुसार ग्रेच्युटी लागू करने सहित अन्य मांगों को लेकर धरना दिया गया. इसके अलावा आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका को मासिक वेतन देने तथा रिटायरमेंट के बाद एक निश्चित राशि देने की मांग भी रखी गई. कमला कुमारी ने बताया कि गुरुवार को आंशिक धरना दिया गया है. अगर सरकार हमारी बातों पर अमल नहीं करेगी तो अनिश्चितकालीन धरना भी शुरू किया जाएगा.धरना में रेणु कुमारी, मुन्नी कुमारी, गीता कुमारी, अनिता कुमारी आदि लोग उपस्थित रहे.

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By Santosh kumar singh

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