बिहारशरीफ. छह नवंबर को होने वाले मतदान से ठीक पहले मंगलवार शाम जिले के सातों विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी प्रचार की गूंज थम गई. रैलियों और सभाओं का दौर खत्म होते ही अब बूथ जीतने की जंग शुरू हो गयी है. उम्मीदवार अब मैदान से उतरकर बूथ प्रबंधन में जुट गये हैं. आचार संहिता लागू होने तक जिले में 77 चुनावी कार्यक्रम आयोजित किए गये, जिनमें केंद्रीय मंत्री, गृहमंत्री, मुख्यमंत्री और दिल्ली के मुख्यमंत्री समेत कई दिग्गज नेता शामिल हुए. अब बड़े नेता चले जाने के बाद असली मुकाबला गांव-गली के बूथों पर शुरू हो गया है. जिले की सातों सीटों पर 68 उम्मीदवार अब जीत सुनिश्चित करने के लिए बूथ-बूथ रणनीति पर काम कर रहे हैं. छोटे-बड़े कार्यकर्ताओं को मनाना और भरोसेमंद बूथ प्रबंधक तैनात करना उनकी प्राथमिकता बन गयी है. इस वजह से बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं की मांग चरम पर पहुंच गई है. इस चुनाव में महिला मतदाता निर्णायक भूमिका निभायेंगी. उम्मीदवार उन्हें लुभाने के लिए लोक-लुभावन वादे और स्थानीय मुद्दों पर जोर दे रहे हैं. फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्ट्राग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर पार्टियों के प्रचार अभियान ने जोर पकड़ा था, जो अब नियमों के अनुसार बंद हो चुके हैं. अब जिले की राजनीतिक रणभूमि में सिर्फ एक ही आवाज़ गूज रही है कि जीत के लिए बूथ चाहिए और बूथ के लिए कार्यकर्ता. सबसे अधिक उम्मीदवार इस्लामपुर में और सबसे कम अस्थावां व राजगीर में बिहारशरीफ. जिले की सातों विधानसभा सीटों पर कुल 68 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं. सीटवार आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक उम्मीदवार इस्लामपुर विधानसभा क्षेत्र में हैं, जहां 13 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि सबसे कम उम्मीदवार अस्थावां में हैं, जहां केवल 7 प्रत्याशी मैदान में हैं. अन्य विधानसभा क्षेत्रों में बिहारशरीफ और हिलसा में 10-10, राजगीर में 7, नालंदा में 10 और हरनौत में 11 उम्मीदवार हैं. चुनावी लड़ाई हर सीट पर खास रणनीतियों और कार्यकर्ताओं की भागीदारी के साथ जोर पकड़ रही है. नालंदा विधानसभा क्षेत्र से एक भी निर्दलीय उम्मीदवार नहीं बिहारशरीफ. जिले की सातों विधानसभा सीटों पर कुल 68 उम्मीदवार मैदान में हैं. इनमें सबसे बड़ी चर्चा निर्दलीय उम्मीदवारों की है. सीटवार स्थिति की बात करें तो अस्थावां (7 उम्मीदवार) में 1 निर्दलीय (शबनम लता), बिहारशरीफ (10 उम्मीदवार) में 4 निर्दलीय (मोहित कुमार, मनोज कुमार तांती, सरस्वती कुमारी, राकेश पासवान), राजगीर (7 उम्मीदवार) में 3 निर्दलीय (अंजली रॉय, उग्रसेन पासवान, विजय पासवान), इस्लामपुर (13 उम्मीदवार) में 6 निर्दलीय (सीताराम सिंह, अजय कुमार सिन्हा, रणजीत कुमार, मितु कुमारी, मनोज जमादार), हिलसा (10 उम्मीदवार) में 2 निर्दलीय (शुकेश कुमार, सच्चिदानंद सिंह) और नालंदा (10 उम्मीदवार) में एक भी निर्दलीय उम्मीदवार चुनावी मैदान में नहीं है. हरनौत (11 उम्मीदवार) में 3 निर्दलीय (अनिरुद्ध कुमार, पिंटू पासवान, विनय भूषण कुमार) है. इस्लामपुर विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 6 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में हैं. जबकि नालंदा विधानसभा में कोई निर्दलीय उम्मीदवार नहीं हैं. निर्दलीय उम्मीदवारों की इस बढ़ती संख्या ने इस बार के चुनाव को और अधिक रोमांचक और अप्रत्याशित बना दिया है. यह चुनाव केवल बड़े दलों तक सीमित नहीं रह गया है. अब छोटे उम्मीदवार और निर्दलीय भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं. महिला उम्मीदवारों की बढ़ती भागीदारी बन रही निर्णायक : हिलसा और हरनौत में एक भी महिला उम्मीदवार चुनावी रणभूमि में नहीं बिहारशरीफ. जिले की सातों विधानसभा सीटों पर कुल 68 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं. जिनमें इस बार आठ महिला उम्मीदवारों की बढ़ती भागीदारी चुनाव को और अधिक प्रतिस्पर्धी और रोमांचक बना रही है. हरनौत और हिलसा विधानसभा क्षेत्र में एक भी महिला उम्मीदवार चुनावी रणभूमि में नहीं है. वहीं सबसे अधिक अस्थावां और इस्लामपुर में दो-दो महिला प्रत्याशी जीत का दांवा कर रहे हैं. अस्थावां (7 उम्मीदवार) में महिला 2 है, लता सिंह (जन सुराज पार्टी) और शबनम लता (निर्दलीय), बिहारशरीफ (10 उम्मीदवार) में महिला सिर्फ सरस्वती कुमारी (निर्दलीय), राजगीर (7 उम्मीदवार) में महिला सिर्फ अंजली रॉय (निर्दलीय), इस्लामपुर (13 उम्मीदवार) में महिला 2 है, तनुजा कुमारी (जन सुराज पार्टी) और मितु कुमारी (निर्दलीय), हिलसा (10 उम्मीदवार) महिला उम्मीदवार एक भी नहीं है. नालंदा (10 उम्मीदवार) में सिर्फ एक महिला उम्मीदवार कुमारी पूनम सिन्हा (जन सुराज पार्टी) और हरनौत (11 उम्मीदवार) में एक भी महिला उम्मीदवार नहीं है. महिला उम्मीदवारों की सक्रिय भागीदारी ने चुनाव में नई रणनीति और सघन मुकाबले को जन्म दिया है.
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