नालंदा में 13 माह में आत्महत्या और संदिग्ध मौत के कई मामले, विशेषज्ञ बोले- लंबे तनाव के बाद उठाया जाता है ऐसा कदम

नालंदा जिले में पिछले 13 महीनों में आत्महत्या और संदिग्ध मौतों के कई मामले सामने आए हैं, जिससे किशोरों और युवाओं में बढ़ते मानसिक तनाव पर चिंता जताई जा रही है. विशेषज्ञों के अनुसार, कोरोना काल के बाद की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियां इस तनाव को बढ़ा रही हैं. समय पर संवाद और मदद से गंभीर स्थिति को रोका जा सकता है.

Nalanda Suicide Prevention: नालंदा जिले में पिछले 13 माह के दौरान आत्महत्या और संदिग्ध आत्महत्या से जुड़े कई मामले सामने आए हैं. इन घटनाओं में पुलिस जांच के दौरान अलग-अलग परिस्थितियां सामने आयी हैं. लगातार सामने आ रहे मामलों ने किशोरों, युवाओं और आम लोगों में बढ़ते मानसिक तनाव को लेकर चिंता बढ़ा दी है.

22 जुलाई 2025 को हरनौत थाना परिसर में एएसआई रामपुकार यादव ने सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली थी. इलाज के दौरान उनकी मौत हो गयी. 26 सितंबर 2025 को नालंदा इंजीनियरिंग कॉलेज की छात्रा सोनम कुमारी की छात्रावास की छत से गिरने से मौत हो गयी. इस घटना में मौत का कारण स्पष्ट नहीं होने की बात सामने आयी थी.

जुलाई 2026 में चंडी थाना क्षेत्र के विशुनपुर गांव में पारिवारिक विवाद के बाद एक ही परिवार में आत्महत्या और जहर सेवन की कई घटनाएं सामने आयीं. अगस्त 2026 में एक निजी विश्वविद्यालय की छात्रा के आत्महत्या करने का मामला भी सामने आया.

इन घटनाओं के बीच विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक तनाव को समय रहते पहचानना और व्यक्ति से संवाद करना बेहद जरूरी है. कोरोना काल के बाद बेरोजगारी, महंगाई, आर्थिक दबाव, पारिवारिक कलह, एकल परिवार और सामाजिक दूरी जैसी परिस्थितियों ने भी लोगों के तनाव को प्रभावित किया है.

गांव-देहात में आत्महत्या से जुड़े कई मामलों के पुलिस तक नहीं पहुंचने की बात भी सामने आती है. सामाजिक बदनामी और कानूनी प्रक्रिया के डर से परिवार कई बार घटना को दबा देते हैं. इससे जिले में आत्महत्या की वास्तविक तस्वीर सामने आना मुश्किल हो जाता है.

आत्महत्या का फैसला अचानक नहीं होता : डॉ. अमरदीप

विम्स कॉलेज व अस्पताल के मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. अमरदीप के अनुसार आत्महत्या का कदम अक्सर अचानक नहीं होता. लंबे समय से तनावग्रस्त व्यक्ति किसी बड़ी परेशानी या घटना के बाद इस स्थिति तक पहुंच सकता है.

उन्होंने कहा कि कोरोना के बाद रोजगार, महंगाई और बेरोजगारी से पारिवारिक तनाव बढ़ा है. एकल परिवार और बदलते सामाजिक ताने-बाने ने भी लोगों का भावनात्मक सहारा कम किया है. पहले लोग परिवार और समाज के बीच अपनी परेशानियां साझा करते थे, जिससे मानसिक दबाव कम होता था. अब मोबाइल और टीवी के बढ़ते इस्तेमाल से आपसी संवाद और सामाजिक जुड़ाव कम हुआ है.

उन्होंने सलाह दी कि यदि कोई व्यक्ति लगातार उदास, निराश या तनाव में दिखाई दे तो परिवार के लोग उससे खुलकर बातचीत करें, उसकी परेशानी सुनें और जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लें. समय पर सलाह और उपचार से स्थिति को गंभीर होने से रोका जा सकता है.

केस-01 : हरनौत थाना परिसर में एएसआई ने की आत्महत्या

22 जुलाई 2025 को हरनौत थाना परिसर में एएसआई रामपुकार यादव ने सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली. इलाज के दौरान उनकी मौत हो गयी.

केस-02 : नालंदा इंजीनियरिंग कॉलेज की छात्रा की मौत

26 सितंबर 2025 को नालंदा इंजीनियरिंग कॉलेज की छात्रा सोनम कुमारी की छात्रावास की छत से गिरने से मौत हो गयी. मौत का कारण स्पष्ट नहीं होने की बात सामने आयी थी और मामले की जांच की जानकारी दी गयी थी.

केस-03 : चंडी के विशुनपुर में एक परिवार में कई घटनाएं

जुलाई 2026 में चंडी थाना क्षेत्र के विशुनपुर गांव में पारिवारिक विवाद के बाद एक ही परिवार में आत्महत्या और जहर सेवन की कई घटनाएं सामने आयीं. पुरुषोत्तम तांती ने फांसी लगाने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें बचा लिया गया. वहीं रंजीत तांती और गोरी देवी की जहर सेवन से तथा दिलेन्द्र तांती की फांसी से मौत की बात सामने आयी.

केस-04 : दो बच्चों के साथ महिला की मौत

नूरसराय थाना क्षेत्र के अहियापुर गांव निवासी पवन चौहान की 24 वर्षीया पत्नी प्रियंका कुमारी ने दो बच्चों के साथ जहर खा लिया. घटना में आठ माह के पुत्र संस्कार कुमार और दो वर्ष की पुत्री करिश्मा कुमारी समेत तीनों की मौत हो गयी.

परिजनों ने पारिवारिक विवाद को घटना से जोड़ते हुए बताया कि घटना से एक दिन पहले पवन चौहान ने अपनी मां को आइसक्रीम खाने के लिए पांच रुपये दिये थे. रुपये देने को लेकर प्रियंका और पवन के बीच विवाद होने की बात कही गयी. परिजनों के अनुसार अगले दिन महिला ने पूजा-पाठ करने के बाद खुद जहर खाया और दोनों बच्चों को भी खिला दिया. हालांकि पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत का कारण स्पष्ट होगा.

केस-05 : बीएड छात्र का शव कमरे में मिला

हरनौत थाना क्षेत्र के गोकुलपुर गांव निवासी रामबालक सिंह के 26 वर्षीय पुत्र मनीष कुमार पटना के कंकड़बाग में अपने भाई के साथ रहकर बीएड की पढ़ाई कर रहे थे. एक सुबह भाई के क्लास के लिए जाने के बाद लौटने पर मनीष का शव कमरे में मिला.

केस-06 : पटेल नगर में युवक की मौत

शहर के पीर पहाड़ी वार्ड स्थित पटेल नगर निवासी 23 वर्षीय मुन्ना कुमार की खुदकुशी का मामला सामने आया. वह एक पेट्रोल पंप पर कर्मी था और छह बहनों का इकलौता भाई था. दो साल पहले उसकी दूसरी शादी हुई थी. स्थानीय लोगों के अनुसार दूसरी पत्नी और परिवार के बीच संबंध अच्छे नहीं थे और वह अक्सर तनाव में रहता था. यह मामला पुलिस तक नहीं पहुंचने की बात भी सामने आयी.

केस-07 : रेलवे क्वार्टर में युवक की संदिग्ध मौत

नगर थाना क्षेत्र के रेलवे क्वार्टर में भतहर गांव निवासी 30 वर्षीय सूर्य प्रकाश पासवान की मौत हो गयी. उनकी पत्नी नीलम सिंह बिहारशरीफ में रेलवे में टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत हैं.

घटना के बाद मौत को लेकर अलग-अलग चर्चाएं सामने आयीं. कुछ लोगों ने जहर सेवन की आशंका जतायी, जबकि कुछ इसे संदिग्ध बता रहे थे. घटना की पुलिस जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी.

केस-08 : पारिवारिक कलह के बाद युवक की मौत

नालंदा थाना क्षेत्र के मोहनपुर गांव निवासी 35 वर्षीय रंजीत कुमार की जहर खाने से मौत हो गयी. घटना का कारण पारिवारिक कलह बताया गया. मृतक के ससुराल पक्ष ने आरोप लगाया कि संपत्ति हड़प लिये जाने के कारण युवक तनाव में था और इसी वजह से उसने आत्महत्या की. हालांकि घटना के कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी.

समय रहते पहचानना जरूरी है मानसिक तनाव

लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक तनाव को केवल व्यक्तिगत समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. परिवार और समाज के स्तर पर संवाद बढ़ाना, तनावग्रस्त व्यक्ति की बात सुनना और जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना महत्वपूर्ण है.

आत्महत्या या संदिग्ध मौत की प्रत्येक घटना की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं. इसलिए किसी एक कारण को सभी मामलों पर लागू करना उचित नहीं है. पुलिस जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और संबंधित परिवारों से प्राप्त जानकारी के आधार पर ही प्रत्येक मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है.

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लेखक के बारे में

By कंचन कुमार

कंचन कुमार वर्ष 2009 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उत्तराखंड से शुरुआत करने के बाद दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पटना, नवादा और बिहारशरीफ में विभिन्न मीडिया संस्थानों के साथ कार्य किया. पिछले 12 वर्षों से प्रभात खबर बिहारशरीफ कार्यालय में नालंदा जिला रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं. जिला प्रशासन, खोजी एवं विशेष रिपोर्ट, जमीनी पड़ताल, विकास, जनसरोकार के मुद्दों तथा लोकसभा और विधानसभा चुनावों के गहन विश्लेषण के लिए उनकी विशेष पहचान है.

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