Nalanda News : (अमर वर्मा) पटना के जगदंबा स्थान से राजगीर तक बन रही निर्माणाधीन टूरिस्ट वे परियोजना को लेकर नालंदा जिले के नूरसराय प्रखंड के जगदीशपुर तियारी गांव में ग्रामीणों और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है. सड़क निर्माण के विरोध में उतरे करीब एक दर्जन ग्रामीण परिवारों ने अपने घर बचाने की मांग को लेकर प्रशासन से गुहार लगाई है.
20 फीट दूर खेतों से निकले सड़क
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क को गांव से करीब 20 फीट दूर खेतों की ओर मोड़ दिया जाए, तो दर्जनों गरीब परिवारों के घर टूटने से बच सकते हैं. प्रभावित ग्रामीणों में डब्लू जमादार, पूना जमादार, नागेंद्र जमादार, रामप्रीत जमादार, राजनीति पासवान, रामानंद पासवान और नागेंद्र पासवान समेत कई लोगों ने आरोप लगाया कि पहले सड़क की पैमाइश दूसरी दिशा से की गई थी, लेकिन बाद में एलाइनमेंट बदलकर उनके घरों के बीच से सड़क निकाली जा रही है.
प्रधानमंत्री आवास ही आखिरी सहारा- ग्रामीण
ग्रामीणों ने बताया कि वे भूमिहीन हैं और सरकार की इंदिरा आवास योजना के तहत बने मकान ही उनके रहने का एकमात्र सहारा हैं. उनका कहना है कि सड़क निर्माण के लिए खेतों का इस्तेमाल किया जाए, ताकि गरीब परिवार बेघर होने से बच सकें.
प्रशासन ने आरोपों को बताया गलत
वहीं नूरसराय के अंचल अधिकारी दीपक कुमार ने ग्रामीणों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सड़क निर्माण स्थल में कोई बदलाव नहीं किया गया है. उन्होंने बताया कि सड़क पहले से तय नक्शे और एलाइनमेंट के अनुसार ही बनाई जा रही है.
दोबारा कराई गई मुआवजा प्रक्रिया भी शुरू
अंचल अधिकारी के अनुसार ग्रामीणों के भ्रम को दूर करने के लिए हाल ही में आरसीडी अधिकारियों के साथ फिर से पैमाइश कराई गई है. साथ ही कैंप लगाकर मुआवजे की प्रक्रिया भी चलाई जा रही है. जिन लोगों की रैयती जमीन प्रभावित हो रही है, उन्हें मुआवजा दिया जा रहा है और कई लोग राशि प्राप्त भी कर चुके हैं.
अब एलाइनमेंट बदलना संभव नहीं-प्रशासन
प्रशासन का कहना है कि सड़क निर्माण का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है और केवल यही हिस्सा बाकी बचा है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि एक बार एलाइनमेंट फाइनल हो जाने के बाद उसमें बदलाव संभव नहीं है. ऐसे में निर्धारित नक्शे के अनुसार ही सड़क निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा.
घर टूटने की आशंका से ग्रामीणों में नाराजगी
सड़क निर्माण को लेकर प्रशासन के सख्त रुख के बाद प्रभावित परिवारों में चिंता और मायूसी बढ़ गई है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हुई तो कई परिवार बेघर हो जाएंगे. इलाके में फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है.
