(नालंदा से कंचन कुमार की रिपोर्ट)
Nalanda News : नालंदा जिले में तंबाकू का सेवन अब केवल एक आदत नहीं, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य और सामाजिक संकट का रूप ले चुका है। पिछले 20 वर्षों में जिले में तंबाकू उत्पादों का कारोबार 3200 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि कैंसर, फेफड़ों और हृदय रोगों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे आने वाले समय की बड़ी चुनौती मान रहे हैं.
चार लाख से ज्यादा लोग तंबाकू की गिरफ्त में
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस), ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे (जीएटीएस) और स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार नालंदा जिले में करीब 4.1 लाख वयस्क किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संख्या जिले के सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे का संकेत है.
बिहार में कमी, लेकिन पुरुषों में बरकरार है लत
हालांकि राज्य स्तर पर तंबाकू सेवन में कमी दर्ज की गई है, लेकिन नालंदा में पुरुषों के बीच इसकी खपत अब भी चिंताजनक बनी हुई है। खासकर ग्रामीण इलाकों में खैनी और सिगरेट का चलन व्यापक रूप से जारी है.
20 साल में 3200 करोड़ का कारोबार
वर्ष 2005 से 2025 के बीच जिले में तंबाकू उत्पादों का कुल कारोबार लगभग 3200 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। उपभोक्ताओं की संख्या घटने के बावजूद तंबाकू बाजार का आकार लगातार बढ़ा है, जिसका प्रमुख कारण उत्पादों की बढ़ती कीमतें और ब्रांडेड उत्पादों की मांग मानी जा रही है.
उपभोक्ता घटे, कारोबार बढ़ता गया
वर्ष 2005 में जिले में करीब 6.2 लाख तंबाकू उपभोक्ता थे, जो 2025 में घटकर 4.1 लाख रह गए। इसके बावजूद वार्षिक कारोबार 98 करोड़ रुपये से बढ़कर 220 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो बाजार की बढ़ती आर्थिक ताकत को दर्शाता है.
ग्रामीण इलाकों में खैनी का सबसे बड़ा जाल
हरनौत, राहुई, बेन, बिंद और थरथरी जैसे क्षेत्रों में खैनी सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली तंबाकू सामग्री है। जिले के लगभग 45 प्रतिशत उपभोक्ता खैनी का सेवन करते हैं। डॉक्टरों के अनुसार यह मुंह के कैंसर और कई अन्य गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण है.
सिगरेट का धुआं भी बन रहा मौत का कारण
नगरनौसा, परवलपुर, गिरियक और कतरीसराय क्षेत्रों में सिगरेट का चलन तेजी से बना हुआ है। जिले के करीब 28 प्रतिशत तंबाकू उपभोक्ता सिगरेट का सेवन करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि फेफड़ों और हृदय रोगों में बढ़ोतरी का यह एक प्रमुख कारण है.
शहरों में गुटखा-पान मसाला का बढ़ता खतरा
बिहारशरीफ, राजगीर और हिलसा जैसे शहरी क्षेत्रों में गुटखा और पान मसाला तेजी से युवाओं के बीच लोकप्रिय हो रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे आने वाले वर्षों में बड़े स्वास्थ्य संकट की चेतावनी मान रहे हैं.
कैंसर मरीजों की संख्या में चिंताजनक बढ़ोतरी
वर्ष 2005 में जिले में मुंह और गले के कैंसर के लगभग 480 मरीज दर्ज किए गए थे। वर्ष 2025 तक यह संख्या बढ़कर करीब 900 तक पहुंच गई। चिकित्सकों का मानना है कि तंबाकू सेवन इस वृद्धि का प्रमुख कारण है.
फेफड़ों और हृदय रोगियों की संख्या हुई दोगुनी
सीओपीडी जैसी गंभीर फेफड़ों की बीमारी के मरीजों की संख्या 1200 से बढ़कर 2220 हो गई है। वहीं तंबाकू जनित हृदय रोगों के मामलों में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई है, जो स्वास्थ्य तंत्र के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है.
20 साल में मौतों का आंकड़ा भी दोगुना
तंबाकू जनित बीमारियों से वर्ष 2005 में जहां लगभग 210 लोगों की मौत होती थी, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 410 सालाना तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक आंकड़े इससे कहीं अधिक हो सकते हैं.
इलाज में टूट रही परिवारों की कमर
कैंसर, हृदय रोग और फेफड़ों की बीमारियों के इलाज पर लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं। इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और कई परिवार गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं.
विशेषज्ञों ने दी चेतावनी, अब जमीनी अभियान जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि केवल तंबाकू पैकेटों पर चेतावनी लिख देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। पंचायत स्तर तक जागरूकता अभियान, स्कूलों में विशेष कार्यक्रम और अवैध बिक्री पर सख्त कार्रवाई समय की जरूरत है.
हरनौत से बिहारशरीफ तक चलाना होगा जनआंदोलन
विशेषज्ञों का मानना है कि खैनी, सिगरेट और गुटखा के खिलाफ जिलेव्यापी अभियान चलाना बेहद जरूरी है। यदि अभी प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में कैंसर, हृदय रोग और असमय मौतों का ग्राफ और तेजी से बढ़ सकता है.
स्वास्थ्य के साथ अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा असर
तंबाकू अब केवल स्वास्थ्य समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक संकट का भी बड़ा कारण बन चुका है। नालंदा में बढ़ता तंबाकू कारोबार और उससे जुड़ी बीमारियां प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और समाज सभी के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं.
