नालंदा: पुरुषोत्तम मास में धरती का बैकुंठ बनता है राजगीर, उमड़ता है देश-दुनिया का आस्था सागर

Nalanda News: पुरुषोत्तम मास के दौरान राजगीर आध्यात्मिक आस्था का वैश्विक केंद्र बन जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस अवधि में 33 कोटि देवी-देवताओं का यहां प्रवास होता है, जिसके कारण देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु धर्म लाभ के लिए पहुंचते हैं.

Nalanda News (रामविलास की रिपोर्ट): प्राचीन ऋषियों, मुनियों और तपस्वियों की साधना स्थली राजगीर केवल एक ऐतिहासिक पर्यटन नगरी ही नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का जीवंत केंद्र भी है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दुनिया का एकमात्र ऐसा आध्यात्मिक नगर राजगीर है, जहां प्रत्येक तीन वर्ष पर पड़ने वाले पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) के दौरान एक माह तक विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण का सृजन होता है.

पुरुषोत्तम मास में बन जाता है आस्था का महाकुंभ

इस पावन अवसर पर आयोजित होने वाला पुरुषोत्तम मास मेला, जिसे अधिक मास और मलमास मेला के नाम से भी जाना जाता है, श्रद्धा, आस्था, तप और भक्ति का अद्वितीय संगम बन जाता है. सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को समर्पित होता है. धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि इस अवधि में किए गए जप, तप, दान, स्नान और पूजा-अर्चना का फल कई गुना बढ़ जाता है.

33 कोटि देवी-देवताओं के आगमन की मान्यता

मान्यता है कि इस एक माह के दौरान ब्रह्मांड के 33 कोटि देवी-देवता राजगीर में निवास करते हैं. यही कारण है कि पुरुषोत्तम मास के समय राजगीर को धरती का बैकुंठ कहा जाता है. चारों ओर भक्ति, साधना और आध्यात्मिक चेतना का वातावरण निर्मित होता है, जो श्रद्धालुओं को अलौकिक अनुभूति प्रदान करता है.

देश-दुनिया से पहुंचते हैं लाखों श्रद्धालु

मेला अवधि में देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु राजगीर पहुंचते हैं. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, महाराष्ट्र तथा दक्षिण भारत के अनेक प्रांतों से आने वाले श्रद्धालु यहां कल्पवास करते हैं. इसके अतिरिक्त नेपाल, मॉरीशस सहित कई अन्य देशों के सनातन धर्मावलंबी भी बड़ी संख्या में राजगीर पहुंचकर धर्म लाभ प्राप्त करते हैं. विदेशी श्रद्धालुओं की उपस्थिति इस मेले की अंतरराष्ट्रीय पहचान को और अधिक सुदृढ़ बनाती है.

स्नान, साधना और धार्मिक अनुष्ठानों का केंद्र

पुरुषोत्तम मास के दौरान श्रद्धालु ब्रह्मकुंड, सप्तधारा और अन्य पवित्र जलस्रोतों में स्नान कर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं. मेला क्षेत्र में प्रतिदिन हवन, यज्ञ, श्रीमद्भागवत कथा, रामकथा, भजन-कीर्तन, संकीर्तन, जप, तप और सत्संग का आयोजन होता है. साधु-संतों और विद्वानों के प्रवचन श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक जीवन के प्रति प्रेरित करते हैं.

पिंडदान और तर्पण का भी विशेष महत्व

राजगीर का महत्व केवल स्नान और पूजा तक सीमित नहीं है. धार्मिक मान्यता के अनुसार पुरुषोत्तम मास में यहां पिंडदान और तर्पण करने से पितरों को विशेष तृप्ति प्राप्त होती है. यही कारण है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु वैतरणी नदी तट पर विधिवत पिंडदान एवं श्राद्ध कर्म संपन्न कर अपने पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.

राष्ट्रीय मेले का दर्जा देने की उठ रही मांग

इतनी व्यापक धार्मिक, सांस्कृतिक और अंतरराष्ट्रीय पहचान होने के बावजूद यह मेला अभी तक राजकीय मेले के दायरे में ही सीमित है. श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इस मेले को राष्ट्रीय स्तर की मान्यता मिले तो इसकी भव्यता, व्यवस्थाओं और वैश्विक पहचान में और अधिक वृद्धि हो सकती है.

भारतीय आध्यात्मिक विरासत का जीवंत उत्सव

आस्था, अध्यात्म, तप और सनातन संस्कृति के अद्भुत संगम के रूप में स्थापित राजगीर का पुरुषोत्तम मास मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक विरासत का जीवंत उत्सव है. यह मेला मानव को आत्मशुद्धि, ईश्वर भक्ति और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करता है तथा राजगीर को विश्व आध्यात्मिक मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान प्रदान करता है.

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Published by: Vikash Jha

विकाश झा एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और कंटेंट प्रोफेशनल हैं, जिन्हें मीडिया, डिजिटल कंटेंट और सोशल मीडिया कम्युनिकेशन के क्षेत्र में छह वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह प्रभात खबर में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन में स्नातक और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 2020 में भोपाल से हुई, जिसके बाद उन्होंने ETV Bharat, Bharat Express और News24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में विभिन्न जिम्मेदार भूमिकाओं का निर्वहन किया। News24 से आगे बढ़ते हुए उन्होंने Adglobal360 India Pvt. Ltd. के माध्यम से बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) में कंटेंट राइटर के रूप में कार्य किया। स्पोर्ट्स, हाइपरलोकल और पॉलिटिकल पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता के क्षेत्र हैं। क्रिकेट के प्रति उनका गहरा लगाव है और वे क्रिकेट को सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि अपनी लेखनी का महत्वपूर्ण विषय मानते हैं। उन्हें यात्रा करना, नए लोगों और स्थानों को जानना तथा समाज और राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले विकाश डिजिटल मीडिया की तेज रफ्तार दुनिया में तथ्यों पर आधारित, प्रभावशाली और पाठक-केंद्रित कंटेंट तैयार करने के लिए जाने जाते हैं।

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