राजगीर में जलजमाव से उजड़ रहा महादलित टोला, दरक रहे घर; पलायन को मजबूर परिवार

Nalanda News: राजगीर के चंडी मौ महादलित टोला में जलजमाव से कई घरों में दरारें पड़ गई हैं और कुछ मकान गिर चुके हैं. ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए स्थायी समाधान की मांग की है.

Nalanda News: नालंदा जिले के राजगीर अनुमंडल के चंडी मौ ऐतिहासिक शुंगकालीन पुष्करणी तालाब के किनारे बसे महादलित टोला के लोगों का जीवन जलजमाव की गंभीर समस्या से बदहाल हो गया है. लगातार घरों और आंगनों में भरे पानी के कारण कई पक्के मकानों की दीवारों में गहरी दरारें पड़ गई हैं, जबकि कुछ कच्चे मकान पूरी तरह से जमींदोज हो गये हैं. हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि अनेक गरीब परिवार अपना ही आशियाना छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं. इस महादलित टोला में मुख्य रूप से समाज के मांझी, पासवान, चौधरी और रविदास वर्ग के लोग रहते हैं, जिनकी जिंदगी वर्तमान में जल निकासी ठप होने से घरों के भीतर ही पूरी तरह कैद होकर रह गई है.

प्रशासनिक स्तर पर स्थल निरीक्षण के बाद भी कार्रवाई शून्य

ग्रामीणों का कहना है कि दशकों पहले जल निकासी के लिए बनाए गए नाले की स्थिति अब पूरी तरह खराब हो चुकी है. नाला वर्तमान में सड़क की सतह से करीब तीन से चार फीट नीचे चला गया है, जिससे पानी का प्राकृतिक बहाव पूरी तरह रुक गया है और गंदे पानी का बैकफ्लो बढ़ गया है. परिणामस्वरूप पूरे गांव का दूषित पानी लोगों के घरों और आंगनों में जमा हो रहा है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है. ग्रामीण प्रशांत कुमार का आरोप है कि इस समस्या के समाधान के लिए कई बार अनुमंडल और जिला प्रशासन से गुहार लगाई गई, लिखित आवेदन भी दिए गए और अपर समाहर्ता ने स्वयं स्थल निरीक्षण भी किया है, लेकिन अब तक कार्रवाई बिल्कुल शून्य रही है.

बाल्टी से पानी निकाल कर गुज़ारा कर रहे हैं पीड़ित

गांव के पीड़ित ग्रामीण गोरे मांझी, रामजी मांझी, इंद्रदेव पासवान, प्रकाश चौधरी, दीपक पासवान, कपिल चौधरी, राधे चौधरी, सुवेलाल चौधरी, तरुण चौधरी, लाटो चौधरी और कीरत मांझी ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि वे वर्षों से यहां नारकीय जीवन जीने को विवश हैं. घरों में चौबीसों घंटे पानी घुस रहा है और हर दिन सुबह-शाम बाल्टी से पानी बाहर निकालना पड़ता है, तब जाकर किसी तरह परिवार का गुजारा हो पाता है. इंद्रदेव पासवान और रामजी मांझी ने बताया कि उनके मकानों में इतनी बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं कि वे कभी भी ढह सकते हैं. ग्रामीणों ने इस भयंकर जलजमाव के लिए स्थानीय पेयजल व्यवस्था की बड़ी तकनीकी खामियों को भी मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया है.

पीएचईडी की नल-जल योजना की बर्बादी से बढ़ी आफत

ग्रामीणों का साफ कहना है कि पीएचईडी (PHED) की नल-जल योजना के तहत लगाए गए सार्वजनिक कनेक्शनों और स्टैंडपोस्ट पर टोटियां (नल) नहीं लगी हैं, जिसके कारण दिन-रात बिना वजह पानी बहता रहता है और इस जलभराव की समस्या को और अधिक गंभीर बना देता है. ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि स्टैंडपोस्ट पर टोटियां लगा दी जाएं और जल निकासी के लिए एक नए नाले का निर्माण कर पानी को निकटवर्ती नहर तक पहुंचाने की मुकम्मल व्यवस्था की जाए, तो दर्जनों परिवारों के घर सुरक्षित हो जाएंगे. प्रशांत कुमार एवं अन्य ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अविलंब स्थायी समाधान की मांग करते हुए कड़ी चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए विवश होंगे.

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Published by: Ramvilas prasad

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