Nalanda News: (रामविलास की रिपोर्ट) नालंदा विश्वविद्यालय के विश्वमित्रालय सभागार में मंगलवार को तीसरे दीक्षांत समारोह का भव्य आयोजन किया गया. इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा उपस्थित रहे. समारोह में 8 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल प्रदान किए गए, जिनमें एक पुरुष विद्यार्थी भी शामिल है. साथ ही शास्त्रार्थ पुरस्कार भी मुख्य अतिथि द्वारा प्रदान किया गया.
प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक चिंतन का संगम नालंदा विश्वविद्यालय : डॉ पीके मिश्रा
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. पी.के. मिश्रा ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि एक जीवंत सभ्यतागत चेतना का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक वैश्विक चुनौतियों के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में उभर रहा है.
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय तकनीकी परिवर्तन का युग है, जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल नेटवर्क तेजी से दुनिया को बदल रहे हैं, लेकिन इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन, असमानता और वैश्विक संघर्ष जैसी गंभीर चुनौतियाँ भी मौजूद हैं. ऐसे समय में केवल सूचना नहीं, बल्कि नैतिक और जिम्मेदार ज्ञान की आवश्यकता है.
डॉ. मिश्रा ने कहा कि तकनीक तेज उत्तर दे सकती है, लेकिन मानवीय और नैतिक निर्णय का स्थान नहीं ले सकती. उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल उत्तर खोजने तक सीमित न रहें, बल्कि प्रश्नों के पीछे छिपे सामाजिक और मानवीय पहलुओं को भी समझें.
नालंदा से विश्व को मिलेगा ज्ञान, नैतिकता और सतत विकास का नया दर्शन : राज्यपाल
इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक वैश्विक चिंतन के बीच एक सशक्त सेतु बनकर उभर रहा है. उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल अकादमिक क्षेत्र तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह मानव कल्याण और वैश्विक शांति से भी जुड़ी होनी चाहिए.
राज्यपाल ने नालंदा कॉरिडोर, बोधगया, वैशाली, राजगीर और विक्रमशिला का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है और भविष्य में वैश्विक ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है.
नालंदा की ज्ञान परंपरा आज भी जीवंत, दुनिया को दे रही नई वैचारिक दिशा : कुलपति
कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि संस्थान ने अपनी प्राचीन विरासत को बनाए रखते हुए आधुनिक वैश्विक शिक्षा व्यवस्था को अपनाया है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में 14 देशों के 219 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गई हैं. उन्होंने यह भी बताया कि आगामी अगस्त माह से “साइंस, टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी स्टडीज” जैसे नए पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे.
कार्यक्रम में विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षाविद एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे.
गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाले विद्यार्थी
आकांक्षा बसुमातरी, कप्पाला स्वप्ना शालेम, कोठारी खुशी नरेंद्र, जगताप प्रशांत जगन्नाथ, श्राबंती चक्रवर्ती, शैलजा झा, तियासा जेना और अनुष्का पद्मनाभ आंट्रोलिकर को गोल्ड मेडल प्रदान किया गया.
समारोह का समापन विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और भविष्य की वैश्विक भूमिका पर विश्वास व्यक्त करते हुए किया गया.
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