Nalanda News (अमर वर्मा): नालंदा जिले के गिरियक थाना क्षेत्र अंतर्गत चोरसुआ गांव में सोमवार को उस समय चीख-पुकार और मातम मच गया, जब गांव के समीप स्थित प्रसिद्ध धार्मिक व प्राकृतिक स्थल त्रिवेणी धाम नदी में डूबने से एक अधेड़ व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो गई. मृतक की पहचान चोरसुआ गांव निवासी 56 वर्षीय सुरेश पंडित के रूप में की गई है. इस आकस्मिक हादसे के बाद से मृतक के परिजनों में कोहराम मच गया है और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है.
मछली पकड़ने के दौरान पैर फिसलने से हुआ हादसा, ग्रामीणों ने निकाला शव
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुरेश पंडित सोमवार को रोज की तरह त्रिवेणी धाम के समीप बहने वाली नदी में मछली मारने गए थे. मछली पकड़ने के दौरान वे पानी की गहराई का सटीक अंदाजा नहीं लगा सके. पैर फिसलने और अनियंत्रित होने के कारण वे अचानक तेज बहाव वाले गहरे पानी में चले गए. पानी का दबाव और गहराई अधिक होने की वजह से वे खुद को संभाल नहीं पाए और देखते ही देखते नदी में डूब गए.
जैसे ही सुरेश पंडित के डूबने की खबर चोरसुआ गांव पहुंची, पूरे इलाके में सनसनी फैल गई. आनन-फानन में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और परिजन रोते-बिलखते नदी की ओर दौड़े. स्थानीय ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए नदी में छलांग लगाई और काफी मशक्कत व खोजबीन के बाद शव को गहरे पानी से बाहर निकाला.
पावापुरी पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा, मुखिया ने बंधाया ढांढस
घटना की सूचना मिलते ही चोरसुआ पंचायत के मुखिया चंदन कुमार तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे. उन्होंने पीड़ित परिवार से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया और मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल स्थानीय पावापुरी ओपी (आउटपोस्ट) पुलिस को हादसे की जानकारी दी. सूचना मिलते ही पावापुरी थाना पुलिस दलबल के साथ मौके पर पहुंची. पुलिस ने कागजी प्रक्रिया पूरी करते हुए शव को अपने कब्जे में लिया और पंचनामा तैयार करने के बाद पोस्टमार्टम के लिए बिहारशरीफ स्थित सदर (मॉडल) अस्पताल भेज दिया.
सिर से उठा पिता का साया, सरकारी मुआवजे की गुहार
ग्रामीणों ने बताया कि मृतक सुरेश पंडित अपने घर के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे. वे राजमिस्त्री (मकान बनाने का काम) का कार्य कर किसी तरह अपने परिवार की आजीविका चलाते थे. उनकी असमय मौत के बाद पत्नी केशरी देवी का रो-रोकर बुरा हाल है और वे बार-बार बेहोश हो जा रही हैं. सुरेश पंडित अपने पीछे पत्नी के अलावा दो बेटियों और एक बेटे को छोड़ गए हैं.
घर के मुख्य संचालक का साया सिर से उठ जाने के बाद अब इस गरीब परिवार के सामने जीवन-यापन और बच्चों के भविष्य का बड़ा संकट खड़ा हो गया है. स्थानीय मुखिया और ग्रामीणों ने नालंदा जिला प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित परिवार की दयनीय स्थिति को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग के तहत मिलने वाली ₹4 लाख की उचित सरकारी मुआवजा राशि जल्द से जल्द उपलब्ध कराई जाए.
