Female Gendercide Awareness Workshop in Nalanda : (कंचन कुमार) नालंदा जिला मुख्यालय स्थित समाहरणालय के हरदेव भवन में बुधवार को ‘फीमेल जेंडरसाइड’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में भ्रूण हत्या, बाल विवाह, मानव तस्करी, नवजात बच्चियों की हत्या, दुर्व्यवहार, उपेक्षा तथा केवल लड़की होने के कारण होने वाले भेदभाव और हिंसा जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई. वक्ताओं ने कहा कि बेटियों के अस्तित्व और सम्मान की रक्षा केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज, प्रशासन और कानून लागू करने वाली सभी एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा.
कार्यशाला का संचालन समाज कल्याण विभाग की ओर से जनजागरण संस्था के योगेंद्र कुमार गौतम एवं आदित्य गौतम ने किया. उन्होंने बताया कि फीमेल जेंडरसाइड केवल कन्या भ्रूण हत्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन सभी परिस्थितियों को दर्शाता है, जिनमें केवल लड़की होने के कारण किसी बच्ची या महिला के साथ भेदभाव, हिंसा, उपेक्षा या उसके जीवन के अधिकार का हनन किया जाता है.
सिर्फ कानून नहीं, सामाजिक जागरूकता भी जरूरी
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि बाल विवाह, भ्रूण हत्या, मानव तस्करी और बच्चियों के खिलाफ बढ़ते अपराधों को केवल कानूनी कार्रवाई के बल पर समाप्त नहीं किया जा सकता. इसके लिए समाज में व्यापक जनजागरूकता लानी होगी. परिवारों को बेटियों के प्रति अपनी सोच बदलनी होगी तथा शिक्षा और सामाजिक भागीदारी को बढ़ावा देना होगा. विशेषज्ञों ने कहा कि यदि समाज समय रहते इन कुरीतियों के खिलाफ एकजुट नहीं हुआ तो इसका दुष्प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ेगा. पंचायत स्तर से लेकर जिला स्तर तक सभी विभागों को समन्वित रूप से अभियान चलाने की जरूरत है.
Nalanda News: बिहार में लिंगानुपात अब भी चिंता का विषय
कार्यशाला में बताया गया कि बिहार में कन्या भ्रूण हत्या की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है. विशेषज्ञों के अनुसार जन्म के समय लिंगानुपात (Sex Ratio at Birth) इस समस्या का महत्वपूर्ण संकेतक है. चर्चा के दौरान बताया गया कि स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (HMIS) के अनुसार वर्ष 2023-24 में बिहार का जन्म के समय लिंगानुपात घटकर लगभग 882 लड़कियां प्रति 1000 लड़कों तक पहुंच गया था. वहीं राज्य सरकार के नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार यह अनुपात 908 है. विशेषज्ञों ने कहा कि पुत्र प्राथमिकता की मानसिकता और अवैध लिंग जांच जैसी प्रवृत्तियां अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं.
पुत्र मोह और दहेज जैसी कुरीतियां बनी बड़ी वजह
वक्ताओं ने कहा कि बेटियों के प्रति भेदभाव के पीछे सबसे बड़ी वजह पुत्र को प्राथमिकता देने की मानसिकता, दहेज प्रथा, छोटे परिवार का चलन और अवैध लिंग जांच जैसी सामाजिक कुरीतियां हैं. कई मामलों में बच्चियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण की भी अनदेखी की जाती है, जो फीमेल जेंडरसाइड का ही एक रूप है. उन्होंने बताया कि सरकार पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत अवैध लिंग जांच रोकने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है. अल्ट्रासाउंड केंद्रों की निगरानी बढ़ाई गई है तथा ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ और मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से सकारात्मक माहौल तैयार किया जा रहा है.
Biharsharif News : सभी विभागों की भूमिका अहम
कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि फीमेल जेंडरसाइड जैसी सामाजिक समस्या से निपटने के लिए पुलिस, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय परिषद, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा सामाजिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है. वक्ताओं ने कहा कि यदि किसी बच्ची के साथ हिंसा, बाल विवाह, मानव तस्करी या भ्रूण हत्या जैसी घटनाओं की सूचना मिलती है तो सभी संबंधित विभागों को तत्काल संयुक्त कार्रवाई करनी चाहिए.
बेहतर कार्य करने वाले अधिकारियों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम के दौरान समाज और बच्चों की सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अधिकारियों को सम्मानित किया गया. लाइन ऑर्डर डीएसपी राम दुलार प्रसाद, पटना से आए कमजोर वर्ग के डीएसपी धर्मेंद्र यादव तथा एसपी कार्यालय की एसआई कंचन कुमारी को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया.
इस अवसर पर बाल कल्याण समिति के सदस्य धर्मेंद्र कुमार, धनंजय कुमार, पुरुषोत्तम राम, किशोर न्याय परिषद की सदस्य अंजू कुमार, जिला बाल संरक्षण इकाई की प्रियंका कुमार, संगीता कुमार सहित जिले के सभी थाना प्रभारी एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे.
सामूहिक प्रयास से ही बनेगा सुरक्षित समाज
कार्यशाला के अंत में वक्ताओं ने कहा कि यदि बेटियों को समान अवसर, सुरक्षा और सम्मान देना है तो समाज को अपनी सोच बदलनी होगी. भ्रूण हत्या, बाल विवाह, मानव तस्करी और बच्चियों के प्रति भेदभाव जैसी कुरीतियों को समाप्त करने के लिए केवल सरकार नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है. सभी ने संकल्प लिया कि बेटियों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त प्रयास लगातार जारी रखे जाएंगे.
