(नालंदा से कंचन की रिपोर्ट)
Nalanda News : बिहार में गर्मी का पारा चढ़ते ही बिहारशरीफ में पेयजल संकट गहराने लगा है. शहर के कई इलाकों में लोग पीने के पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं. करोड़ों रुपये खर्च कर जलापूर्ति योजनाएं चलाई गईं, लेकिन हालात यह हैं कि 30 से 40 प्रतिशत स्टैंड पोस्टों से पानी की आपूर्ति बंद हो चुकी है.
मोटर खराबी, जलमीनारों के बंद रहने और कमजोर संचालन व्यवस्था ने समस्या को और गंभीर बना दिया है. बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, स्कूल-कॉलेज और सरकारी कार्यालयों में भी पेयजल संकट महसूस किया जा रहा है.
19 साल बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था
नगर निगम का दर्जा मिलने के करीब 19 वर्ष बाद भी बिहारशरीफ की जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह पटरी पर नहीं आ सकी है. शहर में 230 स्टैंड पोस्ट स्थापित करने पर 16.67 करोड़ रुपये खर्च किए गए. इसके अलावा 25 जलापूर्ति केंद्र और 14 जलमीनार बनाए गए, लेकिन इनमें से केवल आठ जलमीनार ही चालू स्थिति में हैं. गायत्री मंदिर, सदर अस्पताल, सोहसराय, मुगलकुआं, सलेमपुर, सिंगारहाट और रेलवे स्टेशन क्षेत्र की सात जलमीनारें वर्षों से बंद पड़ी हैं.
अमृत योजना के बावजूद 80 हजार घरों तक पानी नहीं
वर्ष 2018 में शुरू हुई अमृत योजना के तहत घर-घर नल कनेक्शन देने का अभियान चलाया गया. अब तक 53 हजार से अधिक घरों में कनेक्शन दिए जा चुके हैं, जबकि दूसरे चरण में 20,500 नए कनेक्शन दिए जा रहे हैं. इसके बावजूद करीब 80 हजार घरों तक नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित नहीं हो सकी है. कई इलाकों में 400 फीट तक बोरिंग कराने के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है.
भूजल दोहन से बढ़ा संकट
शहर में जल संकट के बीच बोतलबंद पानी का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है. जिले में प्रतिदिन 98 हजार लीटर से अधिक भूजल निकालकर पैकेज्ड वाटर तैयार किया जा रहा है. जिले में 90 से 110 के बीच पानी के प्लांट संचालित होने का अनुमान है. विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ता भूजल दोहन भविष्य में जल संकट को और भयावह बना सकता है.
95 प्रतिशत प्लांटों में गुणवत्ता जांच की व्यवस्था नहीं
पैकेज्ड वाटर उद्योग के विस्तार के बावजूद गुणवत्ता नियंत्रण की स्थिति बेहद चिंताजनक है. जानकारों के अनुसार लगभग 95 प्रतिशत प्लांटों में न तो आधुनिक प्रयोगशाला की सुविधा है और न ही प्रशिक्षित केमिस्ट की नियुक्ति. कई जगहों पर केवल पानी को ठंडा कर बाजार में सप्लाई किया जा रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है.
जल गुणवत्ता जांच भी रफ्तार से पीछे
नगर निगम क्षेत्र में जल गुणवत्ता जांच की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है. एक वर्ष में 20 वार्डों की जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन फरवरी 2026 तक सिर्फ पांच वार्डों का ही परीक्षण हो पाया. जबकि शहर के लगभग 80 हजार घर पाइपलाइन जलापूर्ति पर निर्भर हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित जांच नहीं होने से दूषित पानी की आपूर्ति का खतरा बना रहता है.
भूजल स्तर गिरने से बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार तालाब, पोखर, पइन और अन्य पारंपरिक जलस्रोतों के लगातार खत्म होने से भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है. इसका सीधा असर जलापूर्ति व्यवस्था पर पड़ रहा है. शहरवासियों ने नगर निगम और संबंधित विभागों से नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने, जल गुणवत्ता की निगरानी बढ़ाने तथा भूजल संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है.
