भारी छूट का लालच देकर साइबर ठग उड़ा रहे बैंक की रकम, सोशल मीडिया पर फर्जी डिस्काउंट विज्ञापनों से संगठित ठगी

Nalanda News : नालंदा में डिजिटल अरेस्ट, निवेश और नौकरी के नाम पर ठगी के बाद अब सोशल मीडिया के जरिए साइबर अपराधियों ने लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है. फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप और यूट्यूब पर भारी छूट वाले फर्जी विज्ञापनों के माध्यम से लोगों को ठगा जा रहा है.

Nalanda News : (कंचन कुमार) डिजिटल अरेस्ट, निवेश और नौकरी के नाम पर ठगी के बाद अब सोशल मीडिया के जरिए साइबर अपराधियों ने लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है. फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप और यूट्यूब पर भारी छूट वाले फर्जी विज्ञापनों के माध्यम से लोगों को ठगा जा रहा है. छोटे ऑर्डर पूरे कर भरोसा जीतने के बाद हजारों रुपये लेकर ठग वेबसाइट और मोबाइल नंबर बंद कर फरार हो जा रहे हैं.

100 रुपये का भरोसा, फिर हजारों की ठगी

साइबर अपराधी शुरुआत में 100 से 200 रुपये के छोटे ऑर्डर डिलीवर कर ग्राहकों का भरोसा जीतते हैं. इसके बाद 1000 से 5000 रुपये या उससे अधिक की खरीदारी कराने के बाद वेबसाइट और संपर्क नंबर बंद कर दिए जाते हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार यह पूरा नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से संचालित हो रहा है.

किराये के बैंक खातों से चल रहा करोड़ों का खेल

साइबर ठग अपने नाम से बैंक खाते नहीं चलाते. वे 50 हजार से एक लाख रुपये वार्षिक किराये या 1 से 3 प्रतिशत कमीशन पर बैंक खाते लेते हैं. खाते के साथ एटीएम, चेकबुक, पिन और नेट बैंकिंग की जानकारी भी उनके पास रहती है। सूत्रों के अनुसार एक खाते से 15 दिन से तीन महीने तक साइबर ठगी का धंधा चलता है, जिसमें करोड़ों रुपये का लेनदेन होता है.

बिहारशरीफ में कई खाते हो चुके हैं फ्रीज

बिहारशरीफ में पिछले एक वर्ष के दौरान ऐसे एक दर्जन से अधिक बैंक खाते फ्रीज किए जा चुके हैं. कई मामलों में खाताधारक बैंक द्वारा दस्तावेज मांगने के बाद फरार हो गए। शिकायत बढ़ते ही गिरोह तुरंत दूसरा खाता सक्रिय कर देता है.

इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ भी गिरोह में शामिल

जांच एजेंसियों का कहना है कि साइबर अपराध अब संगठित नेटवर्क का रूप ले चुका है. इसमें सॉफ्टवेयर इंजीनियर, बैंकिंग विशेषज्ञ, चार्टर्ड अकाउंटेंट, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले एजेंट और तकनीकी जानकार शामिल रहते हैं. यह नेटवर्क जामताड़ा से आगे बढ़कर पटना, बिहारशरीफ और नालंदा समेत कई राज्यों तक फैल चुका है.

पांच वर्षों में 40 प्रतिशत तक बढ़े साइबर अपराध

जिले में साइबर अपराध के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है. पांच वर्ष पहले जहां 3000 से 3500 मामले सामने आते थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 4500 से 4600 तक पहुंच गया है. सालाना ठगी की रकम भी 20 करोड़ से बढ़कर 40 से 45 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है.

ग्रामीणों को भी बनाया जा रहा निशाना

कतरीसराय, बिहारशरीफ, लहेरी और दीपनगर थाना क्षेत्रों में सबसे अधिक मामले सामने आ रहे हैं. ग्रामीण इलाकों में किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम किसान, पेंशन, बीमा और सस्ता लोन दिलाने के नाम पर लोगों को ठगा जा रहा है.

किशोरों को आसान कमाई का लालच

पुलिस सूत्रों के अनुसार अब किशोर भी साइबर गिरोह का हिस्सा बनते जा रहे हैं. हर माह जिले में 75 से 90 किशोर विभिन्न अपराधों में पकड़े जा रहे हैं, जिनमें कई साइबर ठगी में शामिल पाए जाते हैं. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को आसान कमाई का लालच देकर इस धंधे में उतारा जा रहा है.

1930 हेल्पलाइन पर भी नहीं मिल रही त्वरित मदद

पीड़ितों का आरोप है कि साइबर ठगी की शिकायत के लिए जारी 1930 हेल्पलाइन पर कई बार संपर्क नहीं हो पाता.रामचंद्रपुर के व्यवसायी मनीष गुप्ता, अस्थावां के किसान कृष्ण महतो और बेन थाना क्षेत्र के बिरेंद्र प्रसाद जैसे कई लोग वर्षों बाद भी अपनी रकम वापस नहीं पा सके हैं.

सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव

विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक या सरकारी संस्थान कभी सामान्य मोबाइल नंबर से लिंक भेजकर निजी जानकारी नहीं मांगते. किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और किसी भी स्थिति में ओटीपी साझा न करें। साइबर ठगी होने पर तुरंत बैंक और 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए, क्योंकि देरी होने पर रकम वापस मिलने की संभावना बेहद कम हो जाती है.

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Published by: Vivek Singh

विवेक सिंह की डिजिटल मीडिया और जनसरोकारों से जुड़े विषयों में विशेष रुचि रही है. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कार्यरत हैं. वे बिहार के मिथिला क्षेत्र के निवासी हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं.

उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की पढ़ाई की है. शिक्षा के दौरान उन्होंने रिपोर्टिंग, समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, जनसंचार, फोटो जर्नलिज्म, मोबाइल जर्नलिज्म (MOJO) और मीडिया रिसर्च की गहन समझ विकसित की है. अध्ययन के दौरान उन्होंने दूरदर्शन (Doordarshan) में इंटर्नशिप भी की, जहां उन्हें न्यूजरूम की कार्यप्रणाली, टीवी समाचार निर्माण, स्क्रिप्ट लेखन, विजुअल चयन, फील्ड रिपोर्टिग और प्रसारण प्रक्रिया को नजदीक से समझने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ.

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वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कार्यरत विवेक सिंह राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, खेल, अपराध, रियल-टाइम समाचारों, सामाजिक सरोकारों और समसामयिक विषयों से जुड़ी खबरों पर लेखन करते हैं. डिजिटल पत्रकारिता के साथ-साथ उन्हें SEO (Search Engine Optimization), कंटेंट प्लानिंग और ट्रेंड-आधारित समाचार लेखन की अच्छी समझ है. ब्रेकिंग न्यूज की पहचान, त्वरित कवरेज और कम समय में तथ्यपरक समाचार तैयार करना उनकी प्रमुख कार्यक्षमताओं में शामिल है.

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