Nalanda News : (कंचन कुमार) बिहार पुलिस एवं राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) बिहार की ओर से डिजिटल पुलिसिंग को सशक्त बनाने के उद्देश्य से रविवार को सीसीटीएनएस सीएएस (CCTNS CAS) 1.0 कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस कार्यशाला में राज्यभर के नवस्थापित 343 पुलिस थानों के लिए सीसीटीएनएस सीएएस 1.0 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया .
बिहार को अग्रणी राज्य बनाने की तैयारी
कार्यशाला को संबोधित करते हुए बिहार राज्य सूचना विज्ञान पदाधिकारी (SIO) डॉ. शैलेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि बिहार को सीसीटीएनएस सीएएस 1.0 के सफल क्रियान्वयन में देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि बिहार द्वारा विकसित तकनीकी नवाचार और कार्यप्रणालियां अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकती हैं .
एनआईसी बिहार निभा रहा अहम भूमिका
बिहार पुलिस द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी एनआईसी बिहार को सौंपी गई है. डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि एनआईसी बिहार ने राष्ट्रीय स्तर पर कई उत्कृष्ट तकनीकी पद्धतियों का योगदान दिया है और परियोजना में गुणवत्ता एवं उच्च मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है .
एनसीआरबी ने दी तकनीकी जानकारी
कार्यशाला के दौरान राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के प्रतिनिधियों ने तकनीकी सत्र के माध्यम से सीसीटीएनएस सीएएस 1.0 की प्रमुख विशेषताओं और कार्यप्रणालियों की विस्तृत जानकारी दी. वहीं एनआईसी बिहार के एसटीडी नवीन कुमार ने परियोजना की कार्यान्वयन रणनीति और रोलआउट योजना पर विस्तार से प्रकाश डाला .
अधिकारियों ने दिया मॉड्यूल आधारित प्रशिक्षण
संयुक्त निदेशक राम भगवान सिंह, प्रदीप नायक एवं उप निदेशक अभिषेक कुमार ने विभिन्न मॉड्यूल पर विस्तृत प्रशिक्षण सत्र संचालित किए. प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी निभाते हुए परियोजना के प्रति उत्साह व्यक्त किया .
नालंदा के आठ थानों ने लिया ऑनलाइन प्रशिक्षण
नालंदा जिले से जिला सूचना विज्ञान पदाधिकारी अजीत कुमार, डीआरएम तनवीर आलम, नेटवर्क इंजीनियर नीरज कुमार सिंह एवं आशीष रंजन ने कार्यशाला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वहीं जिले के चयनित आठ थानों के थानाध्यक्षों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त किया .
डिजिटल पुलिसिंग की दिशा में अहम कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्यशाला बिहार में डिजिटल पुलिसिंग व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी. इससे अपराध नियंत्रण, डेटा प्रबंधन और पुलिसिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है.
